पिता की खामोशी
अमन हमेशा सोचता था कि उसके पिता उससे ज्यादा प्यार नहीं करते। उसके दोस्त अपने पिता के साथ घूमने जाते थे, बातें करते थे, लेकिन अमन के पिता ज्यादा चुप रहते थे।
वे सुबह जल्दी काम पर चले जाते और देर रात लौटते। अमन को लगता कि उन्हें उसकी परवाह नहीं है।
एक दिन रात को अमन पानी लेने उठा। उसने देखा कि उसके पिता मेज पर बैठे हिसाब कर रहे थे। उनकी आँखों में थकान थी, लेकिन चेहरे पर चिंता भी।
अमन ने सुना कि वे माँ से कह रहे थे,
“अमन की कॉलेज फीस ज्यादा है, लेकिन उसकी पढ़ाई नहीं रुकनी चाहिए। मैं कुछ और काम कर लूंगा।”
उस पल अमन की आँखों में आँसू आ गए। उसे समझ आया कि उसके पिता की खामोशी में भी बहुत सारा प्यार छिपा था।
उस दिन से अमन ने शिकायत करना बंद कर दिया। उसे समझ आ गया कि कुछ लोग प्यार शब्दों से नहीं, अपने त्याग से दिखाते हैं।
पिता की खामोशी
अमन हमेशा सोचता था कि उसके पिता उससे ज्यादा प्यार नहीं करते। उसके दोस्त अपने पिता के साथ घूमने जाते थे, बातें करते थे, लेकिन अमन के पिता ज्यादा चुप रहते थे।
वे सुबह जल्दी काम पर चले जाते और देर रात लौटते। अमन को लगता कि उन्हें उसकी परवाह नहीं है।
एक दिन रात को अमन पानी लेने उठा। उसने देखा कि उसके पिता मेज पर बैठे हिसाब कर रहे थे। उनकी आँखों में थकान थी, लेकिन चेहरे पर चिंता भी।
अमन ने सुना कि वे माँ से कह रहे थे,
“अमन की कॉलेज फीस ज्यादा है, लेकिन उसकी पढ़ाई नहीं रुकनी चाहिए। मैं कुछ और काम कर लूंगा।”
उस पल अमन की आँखों में आँसू आ गए। उसे समझ आया कि उसके पिता की खामोशी में भी बहुत सारा प्यार छिपा था।
उस दिन से अमन ने शिकायत करना बंद कर दिया। उसे समझ आ गया कि कुछ लोग प्यार शब्दों से नहीं, अपने त्याग से दिखाते हैं।