• एक सुप्रसिद्ध अभिनेत्री जब बूढ़ी हो गई तो वह इमारत की सबसे ऊपर

    वाली मंजिल पर फ्लैट लेकर रहने लगी।

    खास बात यह थी कि इमारत में

    लिफ्ट नहीं थी। एक दिन उसका कोई प्रशंसक मंजिलो की सारी सीढियां

    चढ़कर हांफता हुआ उसके फ्लैट तक पहुंचा। घंटी की आवाज सुनकर बूढ़ी

    अभिनेत्री ने जैसे ही दरवाजा खोला। उस प्रशंसक ने हांफते हुए पूछा-


    आपने इतनी ऊंचाई पर फ्लैट क्यों लिया। 'भला क्‍या करती ? इस उम्र में यही एक तरीका रह गया था। दरअसल मैं

    चाहती हूं कि जब मेरे प्रशंसक मुझसे मिलने आएं तो उनका दिल मेरे लिए


    जोरो से धड़क रहा हो।' बूढी अभिनेत्री ने जवाब दिया।

    एक सुप्रसिद्ध अभिनेत्री जब बूढ़ी हो गई तो वह इमारत की सबसे ऊपरवाली मंजिल पर फ्लैट लेकर रहने लगी। खास बात यह थी कि इमारत मेंलिफ्ट नहीं थी। एक दिन उसका कोई प्रशंसक मंजिलो की सारी सीढियांचढ़कर हांफता हुआ उसके फ्लैट तक पहुंचा। घंटी की आवाज सुनकर बूढ़ीअभिनेत्री ने जैसे ही दरवाजा खोला। उस प्रशंसक ने हांफते हुए पूछा-आपने इतनी ऊंचाई पर फ्लैट क्यों लिया। 'भला क्‍या करती ? इस उम्र में यही एक तरीका रह गया था। दरअसल मैंचाहती हूं कि जब मेरे प्रशंसक मुझसे मिलने आएं तो उनका दिल मेरे लिएजोरो से धड़क रहा हो।' बूढी अभिनेत्री ने जवाब दिया।
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  • एक सुप्रसिद्ध अभिनेत्री जब बूढ़ी हो गई तो वह इमारत की सबसे ऊपर

    वाली मंजिल पर फ्लैट लेकर रहने लगी। खास बात यह थी कि इमारत में

    लिफ्ट नहीं थी। एक दिन उसका कोई प्रशंसक मंजिलो की सारी सीढियां

    चढ़कर हांफता हुआ उसके फ्लैट तक पहुंचा। घंटी की आवाज सुनकर बूढ़ी

    अभिनेत्री ने जैसे ही दरवाजा खोला। उस प्रशंसक ने हांफते हुए पूछा-


    आपने इतनी ऊंचाई पर फ्लैट क्यों लिया। 'भला क्‍या करती ? इस उम्र में यही एक तरीका रह गया था। दरअसल मैं

    चाहती हूं कि जब मेरे प्रशंसक मुझसे मिलने आएं तो उनका दिल मेरे लिए


    जोरो से धड़क रहा हो।' बूढी अभिनेत्री ने जवाब दिया।

    एक सुप्रसिद्ध अभिनेत्री जब बूढ़ी हो गई तो वह इमारत की सबसे ऊपरवाली मंजिल पर फ्लैट लेकर रहने लगी। खास बात यह थी कि इमारत मेंलिफ्ट नहीं थी। एक दिन उसका कोई प्रशंसक मंजिलो की सारी सीढियांचढ़कर हांफता हुआ उसके फ्लैट तक पहुंचा। घंटी की आवाज सुनकर बूढ़ीअभिनेत्री ने जैसे ही दरवाजा खोला। उस प्रशंसक ने हांफते हुए पूछा-आपने इतनी ऊंचाई पर फ्लैट क्यों लिया। 'भला क्‍या करती ? इस उम्र में यही एक तरीका रह गया था। दरअसल मैंचाहती हूं कि जब मेरे प्रशंसक मुझसे मिलने आएं तो उनका दिल मेरे लिएजोरो से धड़क रहा हो।' बूढी अभिनेत्री ने जवाब दिया।
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  • एक सुप्रसिद्ध अभिनेत्री जब बूढ़ी हो गई तो वह इमारत की सबसे ऊपर

    वाली मंजिल पर फ्लैट लेकर रहने लगी। खास बात यह थी कि इमारत में

    लिफ्ट नहीं थी। एक दिन उसका कोई प्रशंसक मंजिलो की सारी सीढियां

    चढ़कर हांफता हुआ उसके फ्लैट तक पहुंचा। घंटी की आवाज सुनकर बूढ़ी

    अभिनेत्री ने जैसे ही दरवाजा खोला। उस प्रशंसक ने हांफते हुए पूछा-


    आपने इतनी ऊंचाई पर फ्लैट क्यों लिया। 'भला क्‍या करती ? इस उम्र में यही एक तरीका रह गया था। दरअसल मैं

    चाहती हूं कि जब मेरे प्रशंसक मुझसे मिलने आएं तो उनका दिल मेरे लिए


    जोरो से धड़क रहा हो।' बूढी अभिनेत्री ने जवाब दिया।

    एक सुप्रसिद्ध अभिनेत्री जब बूढ़ी हो गई तो वह इमारत की सबसे ऊपरवाली मंजिल पर फ्लैट लेकर रहने लगी। खास बात यह थी कि इमारत मेंलिफ्ट नहीं थी। एक दिन उसका कोई प्रशंसक मंजिलो की सारी सीढियांचढ़कर हांफता हुआ उसके फ्लैट तक पहुंचा। घंटी की आवाज सुनकर बूढ़ीअभिनेत्री ने जैसे ही दरवाजा खोला। उस प्रशंसक ने हांफते हुए पूछा-आपने इतनी ऊंचाई पर फ्लैट क्यों लिया। 'भला क्‍या करती ? इस उम्र में यही एक तरीका रह गया था। दरअसल मैंचाहती हूं कि जब मेरे प्रशंसक मुझसे मिलने आएं तो उनका दिल मेरे लिएजोरो से धड़क रहा हो।' बूढी अभिनेत्री ने जवाब दिया।
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  • मरने के बाद एक इंजीनियर को जब नर्क भेज दिया गया तो

    उसने वहांमेहनत करके सड़के, शौचालय, नालियां और एयरकंडीशनर आदि कि व्यवस्था कर दी।

    इस पर स्वर्ग के मैंनेजर ने नर्क के मैंनेजर को फोन


    किया। स्वर्ग का मैंनेजर - इस इंजीनियर को बाहर निकालो। नर्क का मैंनेजर - नहीं। स्वर्ग का मैनेजर - जैसा कहता हूं, वही करो। नहीं तो मैं तुम्हें भगवान की अदालत में घसीटूंगा। नर्क का मैंनेजर - कोई बात नहीं। देख लूंगा। सारे वकील तो मेरे यहां हैं।

    मरने के बाद एक इंजीनियर को जब नर्क भेज दिया गया तो उसने वहांमेहनत करके सड़के, शौचालय, नालियां और एयरकंडीशनर आदि कि व्यवस्था कर दी। इस पर स्वर्ग के मैंनेजर ने नर्क के मैंनेजर को फोनकिया। स्वर्ग का मैंनेजर - इस इंजीनियर को बाहर निकालो। नर्क का मैंनेजर - नहीं। स्वर्ग का मैनेजर - जैसा कहता हूं, वही करो। नहीं तो मैं तुम्हें भगवान की अदालत में घसीटूंगा। नर्क का मैंनेजर - कोई बात नहीं। देख लूंगा। सारे वकील तो मेरे यहां हैं।
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  • हिन्दोस्तान से ताजा-ताजा विलायत पहुंचा एक पंजाबी जाट लंदन के एक रेस्टोरेंट में वेटर की नौकरी

    पर लगा।

    वहां उसे काम करते कुछ ही दिन हुए थे कि एक रोज मैनेजर ने उसे अपने ऑफिस में बुलाया और बताया कि पंजाब से उसके भाई का फोन था।

    वेटर ने फोन रिसीव किया और काफी देर टूटी-फूटी अंग्रेजी मेंअपने भाई से बात करता रहा।

    आखिरकार उसने फोन रखा तो मैनेजर ने उससे पूछा - अपने भाई से

    अंग्रेजी में बात क्यों की ?

    अपनी जुबान में क्‍यों नहीं की ?

    साहब जी - वेटर हकबकाया-सा बोला - अब मुझे कया मालूम था कि आपका टेलीफोन पंजाबी भी

    बोलता है।

    हिन्दोस्तान से ताजा-ताजा विलायत पहुंचा एक पंजाबी जाट लंदन के एक रेस्टोरेंट में वेटर की नौकरीपर लगा। वहां उसे काम करते कुछ ही दिन हुए थे कि एक रोज मैनेजर ने उसे अपने ऑफिस में बुलाया और बताया कि पंजाब से उसके भाई का फोन था। वेटर ने फोन रिसीव किया और काफी देर टूटी-फूटी अंग्रेजी मेंअपने भाई से बात करता रहा। आखिरकार उसने फोन रखा तो मैनेजर ने उससे पूछा - अपने भाई सेअंग्रेजी में बात क्यों की ? अपनी जुबान में क्‍यों नहीं की ? साहब जी - वेटर हकबकाया-सा बोला - अब मुझे कया मालूम था कि आपका टेलीफोन पंजाबी भीबोलता है।
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  • एक शराबी एयरपोर्ट के बाहर खड़ा था, तभी एक वर्दीधारी युवक वहाँ से गुजरा।

    यह देखते ही शराबी ने कहा- अरे एक टैक्सी ले आ यार।

    वर्दीधारी ने नाराज होते हुए कहा- 'दिखता नहीं, मैं पायलट हूँ, टैक्सी ड्राइवर नहीं।

    यह सुन शराबी ने कहा- तो नाराज क्यों होते हो यार, एक हवाई जहाज ही लाओ,

    उसी में चलते हैं।

    एक शराबी एयरपोर्ट के बाहर खड़ा था, तभी एक वर्दीधारी युवक वहाँ से गुजरा। यह देखते ही शराबी ने कहा- अरे एक टैक्सी ले आ यार। वर्दीधारी ने नाराज होते हुए कहा- 'दिखता नहीं, मैं पायलट हूँ, टैक्सी ड्राइवर नहीं। यह सुन शराबी ने कहा- तो नाराज क्यों होते हो यार, एक हवाई जहाज ही लाओ,उसी में चलते हैं।
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  • एक सरदारजी एक 25 मंजिला भवन की छत पर बैठे थे, तभी एक आदमी हांफता हुआ आया और

    कहने लगा कि संतासिंह आपकी पोती मर गई।

    सरदारजी ये खबर सुनकर बहुत हताश हो जाते हैं और

    बिल्डिंग से कूद पड़ते हैं। जब वो 20वीं मंजिल तक पहुंचते हैं तो उन्हें ख्याल आता है कि उनकी तो कोई

    पोती ही नहीं है।

    10 वीं मंजिल आने पर ध्यान आता है कि उनकी तो शादी ही नहीं हुई है और जैसे ही

    जमीन पर गिरने वाले होते हैं कि खयाल आता है कि उनका नाम तो संतासिंह है ही नहीं।

    एक सरदारजी एक 25 मंजिला भवन की छत पर बैठे थे, तभी एक आदमी हांफता हुआ आया औरकहने लगा कि संतासिंह आपकी पोती मर गई। सरदारजी ये खबर सुनकर बहुत हताश हो जाते हैं औरबिल्डिंग से कूद पड़ते हैं। जब वो 20वीं मंजिल तक पहुंचते हैं तो उन्हें ख्याल आता है कि उनकी तो कोईपोती ही नहीं है। 10 वीं मंजिल आने पर ध्यान आता है कि उनकी तो शादी ही नहीं हुई है और जैसे हीजमीन पर गिरने वाले होते हैं कि खयाल आता है कि उनका नाम तो संतासिंह है ही नहीं।
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  • हर धड़कन में तेरा ही असर बाकी है,

    दिल की वीरानियों में तेरा सफ़र बाकी है।

    मालूम है मुक़द्दर ने हमें जुदा लिखा है,

    फिर भी मेरी रूह में तेरा घर बाकी है।


    =============== END ===============


    #shayari, #love, #hindishayari, #heartfelt, #emotional, #poetry, #ishq, #sadshayari

    हर धड़कन में तेरा ही असर बाकी है,दिल की वीरानियों में तेरा सफ़र बाकी है।मालूम है मुक़द्दर ने हमें जुदा लिखा है,फिर भी मेरी रूह में तेरा घर बाकी है।=============== END =============== #shayari, #love, #hindishayari, #heartfelt, #emotional, #poetry, #ishq, #sadshayari
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  • "कहइ रीछपति सुनु हनुमाना।

    का चुप साधि रहेहु बलवाना॥"

    "पवन तनय बल पवन समाना।

    बुधि बिबेक बिग्यान निधाना॥"

    "कवन सो काज कठिन जग माहीं।

    जो नहिं होइ तात तुम्ह पाहीं॥"

    "राम काज लगि तव अवतारा।

    सुनतहिं भयउ पर्बताकारा॥"

    ••••••===••••••••••••

    🪷🪷🪷🎂🪷🪷🪷

    श्री सिद्ध मंशापूर्ण हनुमान मंदिर, पड़ाव ग्वालियर।।

    मंगलवार, 14।04।2026


    "कहइ रीछपति सुनु हनुमाना। का चुप साधि रहेहु बलवाना॥""पवन तनय बल पवन समाना। बुधि बिबेक बिग्यान निधाना॥""कवन सो काज कठिन जग माहीं। जो नहिं होइ तात तुम्ह पाहीं॥""राम काज लगि तव अवतारा। सुनतहिं भयउ पर्बताकारा॥"••••••===••••••••••••🪷🪷🪷🎂🪷🪷🪷श्री सिद्ध मंशापूर्ण हनुमान मंदिर, पड़ाव ग्वालियर।।मंगलवार, 14।04।2026
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  • खामोश लम्हों में भी उनकी आहट सुनाई देती है,

    दूर रहकर भी पास होने की गवाही देती है,

    यादें वो नहीं जो वक्त के साथ मिट जाएँ,

    ये तो खुशबू हैं—हर सांस में बस ही जाती हैं।


    =============== END ===============


    #HindiShayari, #ShayariLovers, #EmotionalShayari, #HeartTouchingLines, #Feelings, #Yaadein, #LoveQuotesHindi, #DilKiBaat, #PoetryLovers, #ShayariStatus, #Alfaaz, #ZindagiQuotes, #BrokenHeart, #SoulfulWords, #WritersOfInstagram, #HindiPoetry, #InstaShayari, #SadShayari, #DeepThoughts, #EmotionalQuotes

    खामोश लम्हों में भी उनकी आहट सुनाई देती है, दूर रहकर भी पास होने की गवाही देती है, यादें वो नहीं जो वक्त के साथ मिट जाएँ, ये तो खुशबू हैं—हर सांस में बस ही जाती हैं।=============== END =============== #HindiShayari, #ShayariLovers, #EmotionalShayari, #HeartTouchingLines, #Feelings, #Yaadein, #LoveQuotesHindi, #DilKiBaat, #PoetryLovers, #ShayariStatus, #Alfaaz, #ZindagiQuotes, #BrokenHeart, #SoulfulWords, #WritersOfInstagram, #HindiPoetry, #InstaShayari, #SadShayari, #DeepThoughts, #EmotionalQuotes
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  • एक दिन की बात है. अकबर महाराज ने अपनी सभा में एक अजीब सा सवाल पूछा, जिससे पूरी सभा के लोग हैरान रह गए। जैसे ही वे सभी उत्तर जानने की कोशिश कर रहे थे, तभी बीरबल अंदर आए और पूछा कि मामला क्या है। उन्होंने उससे सवाल दोहराया. सवाल था, “शहर में कितने कौवे हैं?“बीरबल तुरंत मुस्कुराए और अकबर महाराज के पास गए। उन्होंने उत्तर की घोषणा की. उनका जवाब था कि नगर में इक्कीस हजार पांच सौ तेईस कौवे हैं।यह पूछे जाने पर कि वह उत्तर कैसे जानते हैं, तब बीरबल ने कहा, “अपने आदमियों से कौवे की संख्या गिनने के लिए कहें।यदि अधिक मिले तो कौवे के रिश्तेदार उनके पास आस-पास के शहरों से आ रहे

    होंगे। यदि कम हैं, तो हमारे शहर के कौवे शहर से बाहर रहने वाले अपने

    रिश्तेदारों के पास जरूर गए होंगे।” यह जवाब सुनकर, राजा को काफ़ी संतोष मिला। इस उत्तर से प्रसन्न होकर अकबर ने बीरबल को एक माणिक और मोती की जंजीर भेंट की। वहीं उन्होंने बीरबल की बुद्धि की काफ़ी प्रसंशा करी। कहानी की सीख उत्तर में सही स्पष्टीकरण यानि दलील होना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना सही उत्तर का होना।

    एक दिन की बात है. अकबर महाराज ने अपनी सभा में एक अजीब सा सवाल पूछा, जिससे पूरी सभा के लोग हैरान रह गए। जैसे ही वे सभी उत्तर जानने की कोशिश कर रहे थे, तभी बीरबल अंदर आए और पूछा कि मामला क्या है। उन्होंने उससे सवाल दोहराया. सवाल था, “शहर में कितने कौवे हैं?“बीरबल तुरंत मुस्कुराए और अकबर महाराज के पास गए। उन्होंने उत्तर की घोषणा की. उनका जवाब था कि नगर में इक्कीस हजार पांच सौ तेईस कौवे हैं।यह पूछे जाने पर कि वह उत्तर कैसे जानते हैं, तब बीरबल ने कहा, “अपने आदमियों से कौवे की संख्या गिनने के लिए कहें।यदि अधिक मिले तो कौवे के रिश्तेदार उनके पास आस-पास के शहरों से आ रहे होंगे। यदि कम हैं, तो हमारे शहर के कौवे शहर से बाहर रहने वाले अपने रिश्तेदारों के पास जरूर गए होंगे।” यह जवाब सुनकर, राजा को काफ़ी संतोष मिला। इस उत्तर से प्रसन्न होकर अकबर ने बीरबल को एक माणिक और मोती की जंजीर भेंट की। वहीं उन्होंने बीरबल की बुद्धि की काफ़ी प्रसंशा करी। कहानी की सीख उत्तर में सही स्पष्टीकरण यानि दलील होना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना सही उत्तर का होना।
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  • एक न्यायाधीश अत्यंत सदा जीवन व्यतीत करते थे। वह अपनी पत्नी के साथ एक साधारण मकान में रहते और सीमित साधनों में गुजारा करते थे।

    अधिक की लालसा उनके मन में नहीं थी। जो अर्जित कर पाते थे, उसमें ही संतुष्ट रहते थे। एक बार उन्हें किसी सरकारी कार्य से सतारा जिले में पाना पड़ा। सतारा में उन्हें अनेक स्थानों पर जाना था। उनके साथ में उनकी पत्नी भी थी। उन्होंने पत्नी से कहा तुम सरकारी रेस्ट

    हॉउस में जाकर आराम करो में कार्य निपटाकर बाद में आ जाऊंगा। पत्नी ने

    घोड़ा-गाड़ी ली और गेस्टहाउस की ओर चल दी। घोड़ा-गाड़ी रवाना हुई, तो मार्ग में एक आम का बगीचा दिखाई दिया। रसीले आम देखकर न्यायाधीश की पत्नी के मन में लालच आ गया। उसने घोडा-गाड़ी रुकवाई और चुपके से आम बगीचे में दाखिल हो गई। पत्थर मारकर उसने दो-तीन आम गिराए। दुर्भाग्यवश एक बड़ा आम उनके हाथ पर ही आ गिरा, जिससे उनकी स्वर्णजड़ित चूड़ी टूट गई। टूटा स्वर्ण अंश भी नहीं मिला।

    उन्हें बहुत पश्चात्ताप हुआ। घर आकर उन्होंने पति को सारी बात बताई। पति ने कहा- पराई वस्तु लेने का यही परिणाम होता है। साथ में मुझे भी तुम्हारे अपराध की थोड़ी सजा मिल गई। मेरी घड़ी कहीं खो गई।


    न्यायाधीश की पत्नी ने भविष्य में ऐसा फिर नहीं करने का संकल्प लिया। सार यह है कि आप की कौड़ी पुण्य का सोना भी खींच लेती है।

    एक न्यायाधीश अत्यंत सदा जीवन व्यतीत करते थे। वह अपनी पत्नी के साथ एक साधारण मकान में रहते और सीमित साधनों में गुजारा करते थे। अधिक की लालसा उनके मन में नहीं थी। जो अर्जित कर पाते थे, उसमें ही संतुष्ट रहते थे। एक बार उन्हें किसी सरकारी कार्य से सतारा जिले में पाना पड़ा। सतारा में उन्हें अनेक स्थानों पर जाना था। उनके साथ में उनकी पत्नी भी थी। उन्होंने पत्नी से कहा तुम सरकारी रेस्ट हॉउस में जाकर आराम करो में कार्य निपटाकर बाद में आ जाऊंगा। पत्नी ने घोड़ा-गाड़ी ली और गेस्टहाउस की ओर चल दी। घोड़ा-गाड़ी रवाना हुई, तो मार्ग में एक आम का बगीचा दिखाई दिया। रसीले आम देखकर न्यायाधीश की पत्नी के मन में लालच आ गया। उसने घोडा-गाड़ी रुकवाई और चुपके से आम बगीचे में दाखिल हो गई। पत्थर मारकर उसने दो-तीन आम गिराए। दुर्भाग्यवश एक बड़ा आम उनके हाथ पर ही आ गिरा, जिससे उनकी स्वर्णजड़ित चूड़ी टूट गई। टूटा स्वर्ण अंश भी नहीं मिला। उन्हें बहुत पश्चात्ताप हुआ। घर आकर उन्होंने पति को सारी बात बताई। पति ने कहा- पराई वस्तु लेने का यही परिणाम होता है। साथ में मुझे भी तुम्हारे अपराध की थोड़ी सजा मिल गई। मेरी घड़ी कहीं खो गई। न्यायाधीश की पत्नी ने भविष्य में ऐसा फिर नहीं करने का संकल्प लिया। सार यह है कि आप की कौड़ी पुण्य का सोना भी खींच लेती है।
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