एक सरदारजी एक 25 मंजिला भवन की छत पर बैठे थे, तभी एक आदमी हांफता हुआ आया और

कहने लगा कि संतासिंह आपकी पोती मर गई।

सरदारजी ये खबर सुनकर बहुत हताश हो जाते हैं और

बिल्डिंग से कूद पड़ते हैं। जब वो 20वीं मंजिल तक पहुंचते हैं तो उन्हें ख्याल आता है कि उनकी तो कोई

पोती ही नहीं है।

10 वीं मंजिल आने पर ध्यान आता है कि उनकी तो शादी ही नहीं हुई है और जैसे ही

जमीन पर गिरने वाले होते हैं कि खयाल आता है कि उनका नाम तो संतासिंह है ही नहीं।

एक सरदारजी एक 25 मंजिला भवन की छत पर बैठे थे, तभी एक आदमी हांफता हुआ आया औरकहने लगा कि संतासिंह आपकी पोती मर गई। सरदारजी ये खबर सुनकर बहुत हताश हो जाते हैं औरबिल्डिंग से कूद पड़ते हैं। जब वो 20वीं मंजिल तक पहुंचते हैं तो उन्हें ख्याल आता है कि उनकी तो कोईपोती ही नहीं है। 10 वीं मंजिल आने पर ध्यान आता है कि उनकी तो शादी ही नहीं हुई है और जैसे हीजमीन पर गिरने वाले होते हैं कि खयाल आता है कि उनका नाम तो संतासिंह है ही नहीं।
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