बूढ़ा पेड़
गाँव में एक बूढ़ा पेड़ था जो हर साल कम फल देता था। लोग उसे काटना चाहते थे। एक बुज़ुर्ग ने कहा, “जिस पेड़ ने सालों तक हमें छाया दी, उसे आख़िरी दिनों में मत छोड़ो।” उस दिन सबने समझा—कृतज्ञता भी इंसानियत का हिस्सा है।
गाँव में एक बूढ़ा पेड़ था जो हर साल कम फल देता था। लोग उसे काटना चाहते थे। एक बुज़ुर्ग ने कहा, “जिस पेड़ ने सालों तक हमें छाया दी, उसे आख़िरी दिनों में मत छोड़ो।” उस दिन सबने समझा—कृतज्ञता भी इंसानियत का हिस्सा है।
बूढ़ा पेड़
गाँव में एक बूढ़ा पेड़ था जो हर साल कम फल देता था। लोग उसे काटना चाहते थे। एक बुज़ुर्ग ने कहा, “जिस पेड़ ने सालों तक हमें छाया दी, उसे आख़िरी दिनों में मत छोड़ो।” उस दिन सबने समझा—कृतज्ञता भी इंसानियत का हिस्सा है।
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