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  • जिस इंसान की सोच ओर नियत अच्छी होती हैं,
    भगवान उसकी मदद करने के लिए किसी ना किसी रूप मे या ही जाते हैं ।
    जिस इंसान की सोच ओर नियत अच्छी होती हैं, भगवान उसकी मदद करने के लिए किसी ना किसी रूप मे या ही जाते हैं ।
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  • किसी पर भी भरोसा करते वक्त होशियार रहिए,
    क्योंकि फिटकरी ओर मिश्री एक जैसे ही नजर आते हैं ।
    किसी पर भी भरोसा करते वक्त होशियार रहिए, क्योंकि फिटकरी ओर मिश्री एक जैसे ही नजर आते हैं ।
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  • प्रेम हो या भोजन किसी को ज्यादा दे दो तो वो अधूरा छोड़कर चला जाता हैं ।
    प्रेम हो या भोजन किसी को ज्यादा दे दो तो वो अधूरा छोड़कर चला जाता हैं ।
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  • न कोई शिकवा और शिकायत रही अब
    शायद न पहले जैसी चाहत रही अब !
    न कोई शिकवा और शिकायत रही अब शायद न पहले जैसी चाहत रही अब !
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  • हे प्रभु मेरे पतिदेव की इच्छा पूरी करना 🤣 #talkfeverreel #funny #viralshorts #husbandwife #funnyshorts
    हे प्रभु मेरे पतिदेव की इच्छा पूरी करना 🤣 #talkfeverreel #funny #viralshorts #husbandwife #funnyshorts
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  • " खामोशियों में भी इक कहानी छुपी होती है,
    हर अधूरी ख्वाहिश में रवानी छुपी होती है;
    जो लकीरों से नहीं मिलती वो तक़दीर क्या,
    मेहनत करने वालों की तो नयी ज़ुबानी छुपी होती है। "

    =============== END ===============

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    " खामोशियों में भी इक कहानी छुपी होती है, हर अधूरी ख्वाहिश में रवानी छुपी होती है; जो लकीरों से नहीं मिलती वो तक़दीर क्या, मेहनत करने वालों की तो नयी ज़ुबानी छुपी होती है। " =============== END =============== #ShayariLovers, #HindiShayari, #UrduShayari, #PoetryCommunity, #PoetryLovers, #SoulfulShayari, #DeepShayari, #LoveShayari, #MotivationalShayari, #HeartTouchingLines, #EmotionalPoetry, #WritersOfInstagram, #CreativeWriting, #InstaPoetry, #ShayariGram, #PoetryAddict, #LiteraryVibes, #WordsThatHeal, #PoetryDaily, #ShayariQuotes
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  • " हर दिये को आखिर राख में मिल जाना होता है,
    पर उससे पहले अँधेरों को हराना होता है;
    मिटती है हर लकीर वक़्त की बारिशों में,
    पर उससे पहले नाम आसमान पर लिख जाना होता है। "

    =============== END ===============

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    " हर दिये को आखिर राख में मिल जाना होता है, पर उससे पहले अँधेरों को हराना होता है; मिटती है हर लकीर वक़्त की बारिशों में, पर उससे पहले नाम आसमान पर लिख जाना होता है। " =============== END =============== #PremiumAudience, #HighNetWorth, #LuxuryMarketing, #AffluentAudience, #EliteClients, #PremiumBranding, #LuxuryBrandStrategy, #HighEndMarketing, #WealthManagement, #LuxuryLifestyle, #ExclusiveServices, #UpscaleLiving, #PremiumClients, #LuxuryBusiness, #AffluentMarketing, #BrandPositioning, #LuxuryExperience, #HighValueCustomers, #EliteMarketing, #PremiumServices
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  • ज़िंदगी में कभी ये मत सोचो
    कि कौन कब, कैसे, कहाँ बदल गया…

    बस इतना देखो
    वह तुम्हें *सिखा कर क्या गया।*

    ✨ यही जीवन का सच्चा ज्ञान है।

    पीड़ाएँ केवल दुःख नहीं देतीं,
    वे हमें *समझदार, मजबूत और जागरूक* भी बनाती हैं।" 🌸
    ज़िंदगी में कभी ये मत सोचो कि कौन कब, कैसे, कहाँ बदल गया… बस इतना देखो वह तुम्हें *सिखा कर क्या गया।* ✨ यही जीवन का सच्चा ज्ञान है। पीड़ाएँ केवल दुःख नहीं देतीं, वे हमें *समझदार, मजबूत और जागरूक* भी बनाती हैं।" 🌸
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  • आम का पेड़ और बीरबल

    राम और श्याम नामक दो मित्रों में आपस में लड़ाई हो गई।

    दोनों ही एक आम के पेड़ को अपना बता रहे थे।

    जब दोनों का झगड़ा नहीं सुलझा तब वे बीरबल के पास गए।

    बीरबल ने उनसे पूछा, “मुझे सच-सच बताओ, आम के पेड़ का मालिक कौन है?"

    उत्तर देने की जगह उन्होंने फिर से लड़ना शुरू कर दिया।

    बीरबल ने चिढ़कर कहा, “रुको, इस फ़साद को सुलझाने का बस एक ही उपाय हैं

    इस पेड़ का सारा फल तोड़कर तुम दोनों में बराबर-बराबर बाँट दिया जाए।

    फिर पेड़ को काटकर उसके तने के दो बराबर भाग कर दिए जाएँ।

    इस प्रकार तुम दोनों के पास आम का पेड़ हो जाएगा।

    यही मेरा सुझाव है।

    राम इस सुझाव से अति प्रसन्न हुआ पर श्याम रोने लगा।

    उसने कहा, “नहीं, नहीं, कृपया आम के पेड़ को मत कटवाइएगा।

    मैंने वर्षों इसकी देखभाल की है।

    राम पेड़ ले सकता है पर उसे काटिए मत।"

    बीरबल ने कहा, “श्याम तुम इस पेड़ के असली मालिक हो ।

    राम को इसमें से कुछ भी नहीं मिलेगा।"
    आम का पेड़ और बीरबल राम और श्याम नामक दो मित्रों में आपस में लड़ाई हो गई। दोनों ही एक आम के पेड़ को अपना बता रहे थे। जब दोनों का झगड़ा नहीं सुलझा तब वे बीरबल के पास गए। बीरबल ने उनसे पूछा, “मुझे सच-सच बताओ, आम के पेड़ का मालिक कौन है?" उत्तर देने की जगह उन्होंने फिर से लड़ना शुरू कर दिया। बीरबल ने चिढ़कर कहा, “रुको, इस फ़साद को सुलझाने का बस एक ही उपाय हैं इस पेड़ का सारा फल तोड़कर तुम दोनों में बराबर-बराबर बाँट दिया जाए। फिर पेड़ को काटकर उसके तने के दो बराबर भाग कर दिए जाएँ। इस प्रकार तुम दोनों के पास आम का पेड़ हो जाएगा। यही मेरा सुझाव है। राम इस सुझाव से अति प्रसन्न हुआ पर श्याम रोने लगा। उसने कहा, “नहीं, नहीं, कृपया आम के पेड़ को मत कटवाइएगा। मैंने वर्षों इसकी देखभाल की है। राम पेड़ ले सकता है पर उसे काटिए मत।" बीरबल ने कहा, “श्याम तुम इस पेड़ के असली मालिक हो । राम को इसमें से कुछ भी नहीं मिलेगा।"
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  • रुई का चोर

    सूत कातने के लिए रुई अकबर बाहर से मँगवाते थे कई लोगों की आजीविका उससे चलती थी।

    शुरू में तो सब अच्छा चला पर फिर रुई की चोर बाज़ारी होने लगी।

    चोर बाज़ारी कौन कर रहा था, पता ही नहीं चल रहा था।

    अकबर ने और अधिक रुई मँगवाई जिससे जुलाहों को नुकसान न हो और उनकी आजीविका चलती रहे।

    पर कोई लाभ न हुआ। चोर बाज़ारी के कारण रुई का अभाव ही रहा।

    क्रोधित होकर बादशाह ने रुई मँगवाना ही बंद कर दिया।

    बेचारे जुलाहे परेशान हो गए। वे बीरबल के पास सहायता लेने गए।

    बीरबल ने उन्हें आश्वासन देकर लौटा दिया। बीरबल ने अकबर से कहा, “महाराज! आप

    रुई का आयात न रोकें। रुई के चोरों को मैं पकडूंगा।”

    बीरबल को पता था कि बिचौलिया ही रुई को दबा कर अधिक दामों में बेचते हैं।

    उसने रुई के आढ़तियों को बुलाकर कहा, “जितनी रुई मँगवाई गई वह कातने वालों तक नहीं पहुँची।

    कुछ चोर रुई को अपनी पगड़ी में छिपा लेते हैं।

    मैं जानता हूँ चोर यहीं हैं पगड़ी स्वयं ही मुझे चोर का पता बता देगी।"

    दोषी आढ़तियों ने एक-दूसरे को देखा।

    एक आदमी डर के मारे अपनी पगड़ी ठीक करने लगा कि कहीं पगड़ी पर रुई तो नहीं लगी है...

    बीरबल की नज़रों ने तुरंत ताड़ लिया। बस फिर क्या था... चोर पकड़ा गया।

    उसके गोदाम से रुई की गाठें बरामद की गईं।

    रुई का काम फिर से प्रारम्भ हो गया और गरीबों को आजीविका मिलने लगी।
    रुई का चोर सूत कातने के लिए रुई अकबर बाहर से मँगवाते थे कई लोगों की आजीविका उससे चलती थी। शुरू में तो सब अच्छा चला पर फिर रुई की चोर बाज़ारी होने लगी। चोर बाज़ारी कौन कर रहा था, पता ही नहीं चल रहा था। अकबर ने और अधिक रुई मँगवाई जिससे जुलाहों को नुकसान न हो और उनकी आजीविका चलती रहे। पर कोई लाभ न हुआ। चोर बाज़ारी के कारण रुई का अभाव ही रहा। क्रोधित होकर बादशाह ने रुई मँगवाना ही बंद कर दिया। बेचारे जुलाहे परेशान हो गए। वे बीरबल के पास सहायता लेने गए। बीरबल ने उन्हें आश्वासन देकर लौटा दिया। बीरबल ने अकबर से कहा, “महाराज! आप रुई का आयात न रोकें। रुई के चोरों को मैं पकडूंगा।” बीरबल को पता था कि बिचौलिया ही रुई को दबा कर अधिक दामों में बेचते हैं। उसने रुई के आढ़तियों को बुलाकर कहा, “जितनी रुई मँगवाई गई वह कातने वालों तक नहीं पहुँची। कुछ चोर रुई को अपनी पगड़ी में छिपा लेते हैं। मैं जानता हूँ चोर यहीं हैं पगड़ी स्वयं ही मुझे चोर का पता बता देगी।" दोषी आढ़तियों ने एक-दूसरे को देखा। एक आदमी डर के मारे अपनी पगड़ी ठीक करने लगा कि कहीं पगड़ी पर रुई तो नहीं लगी है... बीरबल की नज़रों ने तुरंत ताड़ लिया। बस फिर क्या था... चोर पकड़ा गया। उसके गोदाम से रुई की गाठें बरामद की गईं। रुई का काम फिर से प्रारम्भ हो गया और गरीबों को आजीविका मिलने लगी।
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  • फ़कीर

    एक दिन एक फ़कीर अकबर के महल में आया।

    वह महल की चारदीवारी पर बैठकर प्रार्थना करने लगा।

    सिपाहियों ने सोचा कि वह थोड़ी देर बाद स्वतः चला जाएगा, किन्तु वह वहीं

    बैठा रहा। घंटों बीत गए।

    फ़कीर की इस अनाधिकार चेष्टा से अकबर

    खीझ उठा और फ़कीर से जाकर बोला,

    “हे पवित्रात्मा! यह महल है, आश्रम या धर्मशाला नहीं। आप जहाँ चाहें वहाँ बैठकर इस प्रकार ध्यान नहीं लगा सकते।"

    फ़कीर ने पूछा, “आपसे पहले इस महल में कौन रहता था?"

    "पहले मेरे दादा जी, फिर मेरे पिता और अब मैं रहता हूँ।

    मेरे बाद मेरा पुत्र और फिर मेरा पोता..." अकबर ने उत्तर दिया।

    अर्थात् लोग आते और चले जाते हैं।

    यहाँ कोई भी सदा नहीं रहता है।

    तब क्या आपको लगता नहीं कि यह एक आश्रम है?

    उसी प्रकार से यह संसार एक आश्रम है जहाँ हम कुछ समय तक रहते हैं

    और फिर चले जाते हैं।" अकबर निरुत्तर हो गया था।

    फ़कीर को लगा कि सम्राट् को बात समझ आ चुकी थी इसलिए उसने अपनी पगड़ी और दाढ़ी उतार दी।

    अकबर यह देखकर हैरान रह गया कि फ़कीर और

    कोई नहीं पर छद्म वेष में बीरबल ही था ।
    फ़कीर एक दिन एक फ़कीर अकबर के महल में आया। वह महल की चारदीवारी पर बैठकर प्रार्थना करने लगा। सिपाहियों ने सोचा कि वह थोड़ी देर बाद स्वतः चला जाएगा, किन्तु वह वहीं बैठा रहा। घंटों बीत गए। फ़कीर की इस अनाधिकार चेष्टा से अकबर खीझ उठा और फ़कीर से जाकर बोला, “हे पवित्रात्मा! यह महल है, आश्रम या धर्मशाला नहीं। आप जहाँ चाहें वहाँ बैठकर इस प्रकार ध्यान नहीं लगा सकते।" फ़कीर ने पूछा, “आपसे पहले इस महल में कौन रहता था?" "पहले मेरे दादा जी, फिर मेरे पिता और अब मैं रहता हूँ। मेरे बाद मेरा पुत्र और फिर मेरा पोता..." अकबर ने उत्तर दिया। अर्थात् लोग आते और चले जाते हैं। यहाँ कोई भी सदा नहीं रहता है। तब क्या आपको लगता नहीं कि यह एक आश्रम है? उसी प्रकार से यह संसार एक आश्रम है जहाँ हम कुछ समय तक रहते हैं और फिर चले जाते हैं।" अकबर निरुत्तर हो गया था। फ़कीर को लगा कि सम्राट् को बात समझ आ चुकी थी इसलिए उसने अपनी पगड़ी और दाढ़ी उतार दी। अकबर यह देखकर हैरान रह गया कि फ़कीर और कोई नहीं पर छद्म वेष में बीरबल ही था ।
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  • दामादों के लिए प्राणदण्ड

    एक दिन अकबर ने अपने दामाद को संदेश भेजा,

    "कृपया कुछ दिनों के लिए मेरी पुत्री को भेज दें।”

    किन्तु दामाद ने अपनी पत्नी को भेजने से मना कर दिया।

    आग बबूला हुए अकबर ने बीरबल से कहा, “राज्य के

    सभी दामादों को फाँसी पर चढ़ाने की व्यवस्था करो।

    " बीरबल मान गया।

    कुछ दिनों के बाद उसने अकबर को सारी तैयारी का निरीक्षण करने के लिए बुलाया।

    अकबर ने देखा कि ढेर

    सारे फाँसी के फंदे लगे हुए थे।

    वहाँ पर दो विशेष फंदे भी थे- एक

    "वह सोने का था और दूसरा चाँदी का।

    अकबर ने बीरबल से पूछा, सोने और चाँदी का फंदा किसके लिए है?"

    बीरबल ने उत्तर दिया, "ओह! महाराज, वह मेरे और आपके लिए है।"

    “क्या? किसने कहा कि मैं फाँसी पर चढ़ने जा रहा हूँ?"

    "महाराज! आपने...' बीरबल ने कहा, "आपने ही कहा था

    कि राज्य के सभी दामादों को फाँसी दे दी जाए।

    आप भी तो किसी के दामाद हैं।

    कल सबसे पहले आप जाएँगे, आपके पीछे मैं और फिर दूसरे लोग।

    " अकबर अत्यधिक शर्मिंदा हुआ।

    अकबर ने तुरंत अपना आदेश वापस ले लिया।
    दामादों के लिए प्राणदण्ड एक दिन अकबर ने अपने दामाद को संदेश भेजा, "कृपया कुछ दिनों के लिए मेरी पुत्री को भेज दें।” किन्तु दामाद ने अपनी पत्नी को भेजने से मना कर दिया। आग बबूला हुए अकबर ने बीरबल से कहा, “राज्य के सभी दामादों को फाँसी पर चढ़ाने की व्यवस्था करो। " बीरबल मान गया। कुछ दिनों के बाद उसने अकबर को सारी तैयारी का निरीक्षण करने के लिए बुलाया। अकबर ने देखा कि ढेर सारे फाँसी के फंदे लगे हुए थे। वहाँ पर दो विशेष फंदे भी थे- एक "वह सोने का था और दूसरा चाँदी का। अकबर ने बीरबल से पूछा, सोने और चाँदी का फंदा किसके लिए है?" बीरबल ने उत्तर दिया, "ओह! महाराज, वह मेरे और आपके लिए है।" “क्या? किसने कहा कि मैं फाँसी पर चढ़ने जा रहा हूँ?" "महाराज! आपने...' बीरबल ने कहा, "आपने ही कहा था कि राज्य के सभी दामादों को फाँसी दे दी जाए। आप भी तो किसी के दामाद हैं। कल सबसे पहले आप जाएँगे, आपके पीछे मैं और फिर दूसरे लोग। " अकबर अत्यधिक शर्मिंदा हुआ। अकबर ने तुरंत अपना आदेश वापस ले लिया।
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