ترقية الحساب

  • क्या प्राचीन भारत में सच में छुआछूत और जातिगत शोषण था.? या फिर यह झूठ हमें बार-बार पढ़ाया गया.?😡

    हज़ारों साल पुराने इतिहास से खुद जवाब ढूंढते हैं।🚩

    📜 वैदिक और प्राचीन भारत

    🔹सम्राट शांतनु ने मछुआरे की पुत्री सत्यवती से विवाह किया। उनके पुत्र के लिए भीष्म ने आजीवन ब्रह्मचर्य की प्रतिज्ञा ली, क्या यह शोषण था या त्याग.?
    🔹महाभारत के रचयिता वेदव्यास मछुआरे कुल से थे, फिर भी महर्षि बने, गुरुकुल चलाया।
    🔹विदुर, दासी पुत्र होकर भी हस्तिनापुर के महामंत्री बने, विदुर नीति आज भी राजनीति का महाग्रंथ है।
    🔹भीम ने वनवासी हिडिम्बा से विवाह किया।
    🔹श्रीकृष्ण ग्वाल परिवार में जन्मे,
    🔹बलराम हल धारण करने वाले कृषक थे। फिर भी श्रीकृष्ण पूरे विश्व के पूजनीय बने और गीता दी।
    🔹राम के मित्र निषादराज उनके साथ गुरुकुल में पढ़े।
    🔹लव-कुश ने शिक्षा पाई वनवासी महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में।

    साफ़ है- शिक्षा, सम्मान और पद योग्यता से मिलते थे, जन्म से नहीं। वर्ण काम के आधार पर थे आज की भाषा में Division of Labour।


    😡असल गंदगी कब शुरू हुई.?

    🔻 मुगल काल में- पर्दा, गुलामी, बाल विवाह।
    🔻 अंग्रेज़ी शासन (1800–1947) में- “Divide & Rule” और जाति की सख़्त दीवारें।

    😡अंग्रेज अधिकारी Nicholas Dirks की किताब “Castes of Mind” बताती है, कैसे अंग्रेजों ने जातिवाद को मजबूत किया और कैसे कुछ स्वार्थी नेताओं ने उसे राजनीति बना दिया।

    🌍मेगास्थनीज, फाहियान, ह्वेनसांग, अलबरूनी- किसी भी विदेशी यात्री ने नहीं लिखा कि भारत में जातिगत शोषण था।

    निष्कर्ष👉 प्राचीन भारत = योग्यता, कर्म और समरसता। जातिवाद = औपनिवेशिक साजिश + आधुनिक राजनीति
    अगर इतिहास सच में जानना है, तो किताबें पढ़िए न कि प्रोपेगेंडा।

    ✊सच कड़वा हो सकता है लेकिन इतिहास झूठ नहीं बोलता।
    #भारत_का_इतिहास #प्राचीन_भारत #सत्य_इतिहास #CasteMyth #DivideAndRule #सनातन #IndianHistory
    क्या प्राचीन भारत में सच में छुआछूत और जातिगत शोषण था.? या फिर यह झूठ हमें बार-बार पढ़ाया गया.?😡 हज़ारों साल पुराने इतिहास से खुद जवाब ढूंढते हैं।🚩 📜 वैदिक और प्राचीन भारत 🔹सम्राट शांतनु ने मछुआरे की पुत्री सत्यवती से विवाह किया। उनके पुत्र के लिए भीष्म ने आजीवन ब्रह्मचर्य की प्रतिज्ञा ली, क्या यह शोषण था या त्याग.? 🔹महाभारत के रचयिता वेदव्यास मछुआरे कुल से थे, फिर भी महर्षि बने, गुरुकुल चलाया। 🔹विदुर, दासी पुत्र होकर भी हस्तिनापुर के महामंत्री बने, विदुर नीति आज भी राजनीति का महाग्रंथ है। 🔹भीम ने वनवासी हिडिम्बा से विवाह किया। 🔹श्रीकृष्ण ग्वाल परिवार में जन्मे, 🔹बलराम हल धारण करने वाले कृषक थे। फिर भी श्रीकृष्ण पूरे विश्व के पूजनीय बने और गीता दी। 🔹राम के मित्र निषादराज उनके साथ गुरुकुल में पढ़े। 🔹लव-कुश ने शिक्षा पाई वनवासी महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में। साफ़ है- शिक्षा, सम्मान और पद योग्यता से मिलते थे, जन्म से नहीं। वर्ण काम के आधार पर थे आज की भाषा में Division of Labour। 😡असल गंदगी कब शुरू हुई.? 🔻 मुगल काल में- पर्दा, गुलामी, बाल विवाह। 🔻 अंग्रेज़ी शासन (1800–1947) में- “Divide & Rule” और जाति की सख़्त दीवारें। 😡अंग्रेज अधिकारी Nicholas Dirks की किताब “Castes of Mind” बताती है, कैसे अंग्रेजों ने जातिवाद को मजबूत किया और कैसे कुछ स्वार्थी नेताओं ने उसे राजनीति बना दिया। 🌍मेगास्थनीज, फाहियान, ह्वेनसांग, अलबरूनी- किसी भी विदेशी यात्री ने नहीं लिखा कि भारत में जातिगत शोषण था। निष्कर्ष👉 प्राचीन भारत = योग्यता, कर्म और समरसता। जातिवाद = औपनिवेशिक साजिश + आधुनिक राजनीति अगर इतिहास सच में जानना है, तो किताबें पढ़िए न कि प्रोपेगेंडा। ✊सच कड़वा हो सकता है लेकिन इतिहास झूठ नहीं बोलता। #भारत_का_इतिहास #प्राचीन_भारत #सत्य_इतिहास #CasteMyth #DivideAndRule #सनातन #IndianHistory
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  • क्या प्राचीन भारत में सच में छुआछूत और जातिगत शोषण था.? या फिर यह झूठ हमें बार-बार पढ़ाया गया.?😡

    हज़ारों साल पुराने इतिहास से खुद जवाब ढूंढते हैं।🚩

    📜 वैदिक और प्राचीन भारत

    🔹सम्राट शांतनु ने मछुआरे की पुत्री सत्यवती से विवाह किया। उनके पुत्र के लिए भीष्म ने आजीवन ब्रह्मचर्य की प्रतिज्ञा ली, क्या यह शोषण था या त्याग.?
    🔹महाभारत के रचयिता वेदव्यास मछुआरे कुल से थे, फिर भी महर्षि बने, गुरुकुल चलाया।
    🔹विदुर, दासी पुत्र होकर भी हस्तिनापुर के महामंत्री बने, विदुर नीति आज भी राजनीति का महाग्रंथ है।
    🔹भीम ने वनवासी हिडिम्बा से विवाह किया।
    🔹श्रीकृष्ण ग्वाल परिवार में जन्मे,
    🔹बलराम हल धारण करने वाले कृषक थे। फिर भी श्रीकृष्ण पूरे विश्व के पूजनीय बने और गीता दी।
    🔹राम के मित्र निषादराज उनके साथ गुरुकुल में पढ़े।
    🔹लव-कुश ने शिक्षा पाई वनवासी महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में।

    साफ़ है- शिक्षा, सम्मान और पद योग्यता से मिलते थे, जन्म से नहीं। वर्ण काम के आधार पर थे आज की भाषा में Division of Labour।


    😡असल गंदगी कब शुरू हुई.?

    🔻 मुगल काल में- पर्दा, गुलामी, बाल विवाह।
    🔻 अंग्रेज़ी शासन (1800–1947) में- “Divide & Rule” और जाति की सख़्त दीवारें।

    😡अंग्रेज अधिकारी Nicholas Dirks की किताब “Castes of Mind” बताती है, कैसे अंग्रेजों ने जातिवाद को मजबूत किया और कैसे कुछ स्वार्थी नेताओं ने उसे राजनीति बना दिया।

    🌍मेगास्थनीज, फाहियान, ह्वेनसांग, अलबरूनी- किसी भी विदेशी यात्री ने नहीं लिखा कि भारत में जातिगत शोषण था।

    निष्कर्ष👉 प्राचीन भारत = योग्यता, कर्म और समरसता। जातिवाद = औपनिवेशिक साजिश + आधुनिक राजनीति
    अगर इतिहास सच में जानना है, तो किताबें पढ़िए न कि प्रोपेगेंडा।

    ✊सच कड़वा हो सकता है लेकिन इतिहास झूठ नहीं बोलता।
    #भारत_का_इतिहास #प्राचीन_भारत #सत्य_इतिहास #CasteMyth #DivideAndRule #सनातन #IndianHistory
    क्या प्राचीन भारत में सच में छुआछूत और जातिगत शोषण था.? या फिर यह झूठ हमें बार-बार पढ़ाया गया.?😡 हज़ारों साल पुराने इतिहास से खुद जवाब ढूंढते हैं।🚩 📜 वैदिक और प्राचीन भारत 🔹सम्राट शांतनु ने मछुआरे की पुत्री सत्यवती से विवाह किया। उनके पुत्र के लिए भीष्म ने आजीवन ब्रह्मचर्य की प्रतिज्ञा ली, क्या यह शोषण था या त्याग.? 🔹महाभारत के रचयिता वेदव्यास मछुआरे कुल से थे, फिर भी महर्षि बने, गुरुकुल चलाया। 🔹विदुर, दासी पुत्र होकर भी हस्तिनापुर के महामंत्री बने, विदुर नीति आज भी राजनीति का महाग्रंथ है। 🔹भीम ने वनवासी हिडिम्बा से विवाह किया। 🔹श्रीकृष्ण ग्वाल परिवार में जन्मे, 🔹बलराम हल धारण करने वाले कृषक थे। फिर भी श्रीकृष्ण पूरे विश्व के पूजनीय बने और गीता दी। 🔹राम के मित्र निषादराज उनके साथ गुरुकुल में पढ़े। 🔹लव-कुश ने शिक्षा पाई वनवासी महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में। साफ़ है- शिक्षा, सम्मान और पद योग्यता से मिलते थे, जन्म से नहीं। वर्ण काम के आधार पर थे आज की भाषा में Division of Labour। 😡असल गंदगी कब शुरू हुई.? 🔻 मुगल काल में- पर्दा, गुलामी, बाल विवाह। 🔻 अंग्रेज़ी शासन (1800–1947) में- “Divide & Rule” और जाति की सख़्त दीवारें। 😡अंग्रेज अधिकारी Nicholas Dirks की किताब “Castes of Mind” बताती है, कैसे अंग्रेजों ने जातिवाद को मजबूत किया और कैसे कुछ स्वार्थी नेताओं ने उसे राजनीति बना दिया। 🌍मेगास्थनीज, फाहियान, ह्वेनसांग, अलबरूनी- किसी भी विदेशी यात्री ने नहीं लिखा कि भारत में जातिगत शोषण था। निष्कर्ष👉 प्राचीन भारत = योग्यता, कर्म और समरसता। जातिवाद = औपनिवेशिक साजिश + आधुनिक राजनीति अगर इतिहास सच में जानना है, तो किताबें पढ़िए न कि प्रोपेगेंडा। ✊सच कड़वा हो सकता है लेकिन इतिहास झूठ नहीं बोलता। #भारत_का_इतिहास #प्राचीन_भारत #सत्य_इतिहास #CasteMyth #DivideAndRule #सनातन #IndianHistory
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  • मशीन बन जाओ । फिर तुम अच्छे बेटे, अच्छे पति, अच्छे पिता, अच्छी पत्नी, अच्छी बहु और अच्छे कर्मचारी कहलाओगे...।
    मशीन बन जाओ । फिर तुम अच्छे बेटे, अच्छे पति, अच्छे पिता, अच्छी पत्नी, अच्छी बहु और अच्छे कर्मचारी कहलाओगे...।
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  • लाखों रुपये दहेज में देके एक बाप कहता है
    ऐसा घर मिला है मेरी बेटी को
    जहां *किसी चीज की कमी नहीं* है।
    लाखों रुपये दहेज में देके एक बाप कहता है ऐसा घर मिला है मेरी बेटी को जहां *किसी चीज की कमी नहीं* है।
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    ·17 مشاهدة ·0 معاينة
  • सबसे बड़ा मंदिर माता-पिता।
    जिसके दरवाज़े
    कभी बंद नहीं होते।
    सबसे बड़ा मंदिर माता-पिता। जिसके दरवाज़े कभी बंद नहीं होते।
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    ·17 مشاهدة ·0 معاينة
  • *कल* जो *चाहिए* था,
    आज वही *नहीं* चाहिए
    बस यही
    *समय की ताकत* है। ⏳🙂
    *कल* जो *चाहिए* था, आज वही *नहीं* चाहिए बस यही *समय की ताकत* है। ⏳🙂
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  • सबसे पहले पुरी जानकारी के साथ
    सबसे पहले पुरी जानकारी के साथ
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    ·78 مشاهدة ·0 معاينة
  • #Drone
    भाई मेरे पीछे क्यों पड़ा है मेरा पीछा छोड़ दो
    #Drone भाई मेरे पीछे क्यों पड़ा है मेरा पीछा छोड़ दो
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    ·52 مشاهدة ·4 Plays ·0 معاينة
  • ऐसा कार एक्सीडेंट नहीं देखा होगा , जिसने भी देखा उसका घटना देखकर दिल पसिज गया ।
    ऐसा कार एक्सीडेंट नहीं देखा होगा , जिसने भी देखा उसका घटना देखकर दिल पसिज गया ।
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    ·111 مشاهدة ·6 Plays ·0 معاينة
  • सोनीपत हरियाणा की घटना
    सोनीपत हरियाणा की घटना
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    ·59 مشاهدة ·7 Plays ·0 معاينة
  • *देश में एस आई आर बना मजाक और परेशान करने की वजह*

    देश में एस आई आर के नाम पर किस तरह का मज़ाक़ चल रहा है, लोगों को दौडा़या जा रहा है। लोग अपनी रोजी रोटी छोडकर नाम जुडवाने के लिए कागज लिए घूम रहे हैं। कई जगहों से नाम काटने के लिए बी एल ओ के ऊपर दबाव बनाने की भी खबरें आयी हैं। लगता है कि यह लोगो को बेवजह परेशान करने का हथियार बन चुका है। ऐसा नहीं है कि इससे गरीब और अशिक्षित लोग ही परेशान हैं। इससे देश का हर वर्ग परेशान हैं।

    ऐसा कहा जा रहा है कि मांगे गए कागजात को जमा कर देने के बाद भी लोगों के नाम कटवाने वाले कुछ गिरोहों द्वारा फार्म भरकर बीएलओ के पास देने से नाम काटने का खेल चल रहा है।

    हैरान कर देने वाला ताजा मामला हवलदार अब्दुल मुख्तार का आया है। तीन पीढ़ियां सेना में अपनी सेवाएं दे चुकी है। फिर भी उन्हें अपनी पहचान साबित करनी पड़ी रही है।

    सवाल यह है कि क्या बिना देश की नागरिकता के उनके परिवार की तीन पीढ़ियों को सेना में भर्ती किया गया था?

    क्या सेना में भर्ती होने के बाद पुलिस वेरीफिकेशन नहीं किया गया ?

    क्या कोई भी व्यक्ति किसी का नाम काटने का आवेदन कर सकता है? और बी एल ओ नाम काट सकता है?

    क्या यह देश की अपनी ही व्यवस्था का मज़ाक़ नहीं है? एक विभाग द्वारा बेरीफाइड को अनबेरीफाइड मानना,उस विभाग पर प्रश्न चिन्ह नहीं है ?
    *देश में एस आई आर बना मजाक और परेशान करने की वजह* देश में एस आई आर के नाम पर किस तरह का मज़ाक़ चल रहा है, लोगों को दौडा़या जा रहा है। लोग अपनी रोजी रोटी छोडकर नाम जुडवाने के लिए कागज लिए घूम रहे हैं। कई जगहों से नाम काटने के लिए बी एल ओ के ऊपर दबाव बनाने की भी खबरें आयी हैं। लगता है कि यह लोगो को बेवजह परेशान करने का हथियार बन चुका है। ऐसा नहीं है कि इससे गरीब और अशिक्षित लोग ही परेशान हैं। इससे देश का हर वर्ग परेशान हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि मांगे गए कागजात को जमा कर देने के बाद भी लोगों के नाम कटवाने वाले कुछ गिरोहों द्वारा फार्म भरकर बीएलओ के पास देने से नाम काटने का खेल चल रहा है। हैरान कर देने वाला ताजा मामला हवलदार अब्दुल मुख्तार का आया है। तीन पीढ़ियां सेना में अपनी सेवाएं दे चुकी है। फिर भी उन्हें अपनी पहचान साबित करनी पड़ी रही है। सवाल यह है कि क्या बिना देश की नागरिकता के उनके परिवार की तीन पीढ़ियों को सेना में भर्ती किया गया था? क्या सेना में भर्ती होने के बाद पुलिस वेरीफिकेशन नहीं किया गया ? क्या कोई भी व्यक्ति किसी का नाम काटने का आवेदन कर सकता है? और बी एल ओ नाम काट सकता है? क्या यह देश की अपनी ही व्यवस्था का मज़ाक़ नहीं है? एक विभाग द्वारा बेरीफाइड को अनबेरीफाइड मानना,उस विभाग पर प्रश्न चिन्ह नहीं है ?
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  • आग से खेलना कोई मजाक नहीं
    आग से खेलना कोई मजाक नहीं
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