Postari Promovate
How Applore Technologies Empowers Startups and Enterprises with Innovative Tech Solutions
In today’s rapidly evolving digital landscape, businesses—especially startups—need more than just a service provider. They need a reliable Tech Partner for startups who can guide them through innovation, scalability, and long-term growth. This is where Applore Technologies stands out as a trusted Startup Technology Partner, delivering cutting-edge solutions in development,...
Like
2
1 Commentarii 0 Distribuiri 7K Views 0 previzualizare
  • रिश्ते निभाने में हम सभी से गलतियाँ होती हैं कभी-कभी हम दूसरों की

    जरूरतों के प्रति असंवेदनशील हो जाते हैं खासकर उनके प्रति जो हमारे बहुत

    करीबी हैं । फिर इससे मायूसी और नाराजगी पैदा होती है । मायूसी से बचने के लिए आपसी समझदारी जरूरी है । आपसी रिश्ते लोगों में पूर्णता होने के वजह से नहीं बनते बल्कि वे आपसी समझदारी से है । एक अच्छा इंसान बनने से ज्यादा संतोष दूसरों का ख्याल रखने में मिलता है । इससे हमारी ख्याति अपने आप ही बढ़ जाती है जो हमारे जीवन का सबसे बेहतर बीमा है और जिसके लिए कुछ खास खर्च नहीं करना पड़ता है । उदार बनें उदारता भावनात्मक परिपक्वता की पहचान है । उदार होने का मतलब है कि हम

    बिना किसी के कहे औरों का खयाल रखें और उनके लिए सोचे-विचारें ।

    रिश्ते निभाने में हम सभी से गलतियाँ होती हैं कभी-कभी हम दूसरों की जरूरतों के प्रति असंवेदनशील हो जाते हैं खासकर उनके प्रति जो हमारे बहुत करीबी हैं । फिर इससे मायूसी और नाराजगी पैदा होती है । मायूसी से बचने के लिए आपसी समझदारी जरूरी है । आपसी रिश्ते लोगों में पूर्णता होने के वजह से नहीं बनते बल्कि वे आपसी समझदारी से है । एक अच्छा इंसान बनने से ज्यादा संतोष दूसरों का ख्याल रखने में मिलता है । इससे हमारी ख्याति अपने आप ही बढ़ जाती है जो हमारे जीवन का सबसे बेहतर बीमा है और जिसके लिए कुछ खास खर्च नहीं करना पड़ता है । उदार बनें उदारता भावनात्मक परिपक्वता की पहचान है । उदार होने का मतलब है कि हम बिना किसी के कहे औरों का खयाल रखें और उनके लिए सोचे-विचारें ।
    0 Commentarii 0 Distribuiri 72 Views 0 previzualizare
  • अज्ञानी होना उतनी शर्म की ब्बत नहीं है जितनी कि किसी काम को सही ढंग से सीखने की इच्छा न होना। जानकारी का भ्रम होना शिक्षा नहीं बल्कि अज्ञानता है। बेवकूफ लोगों के पास एक अजीब तरीके का आत्मविश्वास(Confidence) होता है, जो सिर्फ अज्ञानता से ही आता है। अज्ञानी होना बुरी बात नहीं है, लेकिन अज्ञानता को अपना कैरियर बना लेना यकीनन बेवकूफी है।

    कुछ लोग अज्ञान जमा कर लेते हैं और फिर उसी को शिक्षा मानने की भूल कर बैठते हैं। अज्ञानता वरदान नहीं हैं। यह तो आभाव, दुःख, गरीबी और बीमारी का दूसरा नाम है। अगर अज्ञानता कोई नियामत है, तो बहुत-सी अज्ञानता छोटापन (Pettiness),

    डर, कट्टरपन, अहंकार और पक्षपात की तरफ ले जाता है। समझदारी अज्ञानता के

    अहंकार को मिटाने को कहते हैं। हम सूचना-युग में जी रहे हैं। एक अंदाज के मुताबिक सूचना की मात्रा हर साल दूनी होती जा रही है। सूचनाओं के इतनी सरलता से उपलब्ध होने के कारण इस दिनों अज्ञानता को मिटाना आसान है। लेकिन दुःख की बात यह है कि हमें जरूरी चीजों के अलावा बाकी हर चीज सिखाई जाती है। हमें लिखना-पढ़ना सिखाया जाता है, पर ऐसी बौद्धिक शिक्षा किस काम की, जो

    इंसान को दूसरों की इज्जत करना और हमदर्दी से पेश आना न सिखाए।


    हमारे स्कूल ज्ञान के झरने हैं। कुछ छात्र वहां अपनी प्यास मिटाने, कुछ

    चुस्की भरने और कुछ केवल कुल्ला करने जाते हैं।

    अज्ञानी होना उतनी शर्म की ब्बत नहीं है जितनी कि किसी काम को सही ढंग से सीखने की इच्छा न होना। जानकारी का भ्रम होना शिक्षा नहीं बल्कि अज्ञानता है। बेवकूफ लोगों के पास एक अजीब तरीके का आत्मविश्वास(Confidence) होता है, जो सिर्फ अज्ञानता से ही आता है। अज्ञानी होना बुरी बात नहीं है, लेकिन अज्ञानता को अपना कैरियर बना लेना यकीनन बेवकूफी है। कुछ लोग अज्ञान जमा कर लेते हैं और फिर उसी को शिक्षा मानने की भूल कर बैठते हैं। अज्ञानता वरदान नहीं हैं। यह तो आभाव, दुःख, गरीबी और बीमारी का दूसरा नाम है। अगर अज्ञानता कोई नियामत है, तो बहुत-सी अज्ञानता छोटापन (Pettiness), डर, कट्टरपन, अहंकार और पक्षपात की तरफ ले जाता है। समझदारी अज्ञानता के अहंकार को मिटाने को कहते हैं। हम सूचना-युग में जी रहे हैं। एक अंदाज के मुताबिक सूचना की मात्रा हर साल दूनी होती जा रही है। सूचनाओं के इतनी सरलता से उपलब्ध होने के कारण इस दिनों अज्ञानता को मिटाना आसान है। लेकिन दुःख की बात यह है कि हमें जरूरी चीजों के अलावा बाकी हर चीज सिखाई जाती है। हमें लिखना-पढ़ना सिखाया जाता है, पर ऐसी बौद्धिक शिक्षा किस काम की, जो इंसान को दूसरों की इज्जत करना और हमदर्दी से पेश आना न सिखाए। हमारे स्कूल ज्ञान के झरने हैं। कुछ छात्र वहां अपनी प्यास मिटाने, कुछ चुस्की भरने और कुछ केवल कुल्ला करने जाते हैं।
    0 Commentarii 0 Distribuiri 77 Views 0 previzualizare
  • सेहत को ठीक रखने के लिए पैसे की जरूरत होती है । पैसे के साथ-साथ और बहुत सी चीजों की भी जरूरत होती है । जिसमें पैसे की जरूरत नहीं होती । पैसा मात्र साधन है, लक्ष्य नहीं है । आप चाहें तो अपना खर्च सीमित कर सकते हैं । सीमित खर्चा तो सेहत के लिए टॉनिक है । आमदनी सौ रुपया और खर्चा साठ सत्तर का हो तो अपने नींद आ जाती है । खर्चा बढ़ जाता है तो उसे घटाना आसान नहीं होता । दुनिया के पास क्या-क्या है, इसको देखने की जरूरत नहीं । मेरे पास क्या है उसको ही देखना चाहिए । हर वक्त पैसे की माला फेरना ज्यादा ठीक नहीं है । जब काम पर जाओ तो काम का ध्यान रखो । जब काम से छुट्टी हो तो सांसारिक बातों से हटकर ज्ञान प्राप्त करने की कोशिश करो । यह सेहत का खजाना है
    सेहत को ठीक रखने के लिए पैसे की जरूरत होती है । पैसे के साथ-साथ और बहुत सी चीजों की भी जरूरत होती है । जिसमें पैसे की जरूरत नहीं होती । पैसा मात्र साधन है, लक्ष्य नहीं है । आप चाहें तो अपना खर्च सीमित कर सकते हैं । सीमित खर्चा तो सेहत के लिए टॉनिक है । आमदनी सौ रुपया और खर्चा साठ सत्तर का हो तो अपने नींद आ जाती है । खर्चा बढ़ जाता है तो उसे घटाना आसान नहीं होता । दुनिया के पास क्या-क्या है, इसको देखने की जरूरत नहीं । मेरे पास क्या है उसको ही देखना चाहिए । हर वक्त पैसे की माला फेरना ज्यादा ठीक नहीं है । जब काम पर जाओ तो काम का ध्यान रखो । जब काम से छुट्टी हो तो सांसारिक बातों से हटकर ज्ञान प्राप्त करने की कोशिश करो । यह सेहत का खजाना है
    0 Commentarii 0 Distribuiri 76 Views 0 previzualizare
  • सुख खरीदा नहीं जा सकता, अनुभव किया जा सकता है । एक बार एक राजा जंगल में जा रहा था कि एक आदमी अपनी झोंपड़ी के द्वार पर सोया हुआ था । झोंपड़ी खुली थी । राजा अपने घोड़े से उतरा और झोंपड़ी के अन्दर गया और बाहर आ गया । राजा सोचने लगा कि यह आदमी देखों कितने सुख से सोया हुआ है । राजा वहाँ लिखता है कि " ओ सुख की नींद सोने वाले सुख की नींद मुझे दे । मैं तुम्हे धन से माला माल कर दूंगा "


    और चला गया । एक दिन फिर वहां से निकला तो क्या देखता है कि जहाँ राजा ने लिखा था उसके साथ लिखा था

    " ओ मूर्ख पैसों से सुख की नींद खरीदी नहीं जा सकती । सुख मन का होता । एक मेहनती इन्सान काम करता है तो उसे ख़ुशी होती है । अगर वही काम कोई आलसी करता है तो वह बोझ महसूस करता है । सुख को किसी जगह फिट नहीं किया जा सकता है । दुनिया का हर अच्छा काम सुख अनुभव कराता है । कर्जा न हो सेहत अच्छी हो और सत्य का आचरण हो । बुराई अगर सौ परदों में भी की जाये तो मन में भय

    उतपन्न होता है । भय का होना ही दुःख का कारण है । भगतसिंह फांसी के फंदे को ही सुख मानता था । वो चाहता तो छूट सकता था । कुदरती साधनों का इस्तेमाल करना सुख का साधन होता है ।

    सुख खरीदा नहीं जा सकता, अनुभव किया जा सकता है । एक बार एक राजा जंगल में जा रहा था कि एक आदमी अपनी झोंपड़ी के द्वार पर सोया हुआ था । झोंपड़ी खुली थी । राजा अपने घोड़े से उतरा और झोंपड़ी के अन्दर गया और बाहर आ गया । राजा सोचने लगा कि यह आदमी देखों कितने सुख से सोया हुआ है । राजा वहाँ लिखता है कि " ओ सुख की नींद सोने वाले सुख की नींद मुझे दे । मैं तुम्हे धन से माला माल कर दूंगा " और चला गया । एक दिन फिर वहां से निकला तो क्या देखता है कि जहाँ राजा ने लिखा था उसके साथ लिखा था " ओ मूर्ख पैसों से सुख की नींद खरीदी नहीं जा सकती । सुख मन का होता । एक मेहनती इन्सान काम करता है तो उसे ख़ुशी होती है । अगर वही काम कोई आलसी करता है तो वह बोझ महसूस करता है । सुख को किसी जगह फिट नहीं किया जा सकता है । दुनिया का हर अच्छा काम सुख अनुभव कराता है । कर्जा न हो सेहत अच्छी हो और सत्य का आचरण हो । बुराई अगर सौ परदों में भी की जाये तो मन में भय उतपन्न होता है । भय का होना ही दुःख का कारण है । भगतसिंह फांसी के फंदे को ही सुख मानता था । वो चाहता तो छूट सकता था । कुदरती साधनों का इस्तेमाल करना सुख का साधन होता है ।
    0 Commentarii 0 Distribuiri 79 Views 0 previzualizare
  • इतने मजबूत बनिए कि आपके मन की शांति को कोई भंग न कर सके। हर मिलने वाले आदमी से सेहत, खुशी और समृद्धि के बारे में बात करें। अपने सभी दोस्तों को अहसास कराएँ कि हम उनकी खूबियों और मजबूतियों की कदर करते हैं। हर चीज के केवल उजले पहलू को देखें। केवल अच्छी से अच्छी बातें सोचें,

    केवल अच्छे से अच्छे नतीजों के लिए काम करें और केवल अच्छे से अच्छे नतीजों

    की उम्मीद करें। बीते दिनों की गलतियों को भूल जाएँ और आने वाले दिनों से ज्यादा बड़ी कामयाबियाँ हासिल करने के लिए आगे बढ़ें। हर आदमी का मुस्करा कर स्वागत करें। अपने को बेहतर बनाने में इतना वक्त लगाएँ कि दूसरों की आलोचना करने के लिए हमारे पास वक्त ही न बचे।


    इतने बड़े बनें कि चिंता छू न सके और इतने अच्छे बनें कि गुस्सा आए ही नहीं।

    इतने मजबूत बनिए कि आपके मन की शांति को कोई भंग न कर सके। हर मिलने वाले आदमी से सेहत, खुशी और समृद्धि के बारे में बात करें। अपने सभी दोस्तों को अहसास कराएँ कि हम उनकी खूबियों और मजबूतियों की कदर करते हैं। हर चीज के केवल उजले पहलू को देखें। केवल अच्छी से अच्छी बातें सोचें, केवल अच्छे से अच्छे नतीजों के लिए काम करें और केवल अच्छे से अच्छे नतीजों की उम्मीद करें। बीते दिनों की गलतियों को भूल जाएँ और आने वाले दिनों से ज्यादा बड़ी कामयाबियाँ हासिल करने के लिए आगे बढ़ें। हर आदमी का मुस्करा कर स्वागत करें। अपने को बेहतर बनाने में इतना वक्त लगाएँ कि दूसरों की आलोचना करने के लिए हमारे पास वक्त ही न बचे। इतने बड़े बनें कि चिंता छू न सके और इतने अच्छे बनें कि गुस्सा आए ही नहीं।
    0 Commentarii 0 Distribuiri 81 Views 0 previzualizare
  • विनम्रता के बिना आत्मविश्वास अहंकार बन जाता है । विनम्रता सारी खूबियों की बुनियाद है । यह आदमी की महानता को दर्शाती है । विनम्रता का अर्थ अपनी प्रतिष्ठा घटा कर कद को छोटा करना नहीं है ।

    सच्ची विनम्रता लोगों को आकर्षित करती है, लेकिन बनावटी विनम्रता दूसरों को

    हमसे परे धकेलती है ।

    विनम्रता के बिना आत्मविश्वास अहंकार बन जाता है । विनम्रता सारी खूबियों की बुनियाद है । यह आदमी की महानता को दर्शाती है । विनम्रता का अर्थ अपनी प्रतिष्ठा घटा कर कद को छोटा करना नहीं है । सच्ची विनम्रता लोगों को आकर्षित करती है, लेकिन बनावटी विनम्रता दूसरों को हमसे परे धकेलती है ।
    0 Commentarii 0 Distribuiri 83 Views 0 previzualizare
  • जिस तरह हमारे शरीर को हर रोज अच्छे खाने की जरूरत होती है, उसी तरह हमारे मस्तिष्क को भी हर रोज अच्छे विचारों की जरूरतों होती है। इस वाक्य में सबसे अहम शब्द, अच्छा खाना और अच्छे विचार हैं। अगर हम अपने शरीर को रोज सड़े-गले खाने और अपने दिमाग को बुरे विचारों की

    खुराक दें, तो हमारा शरीर और दिमाग बीमार पड़ जाएँगे। सही पटरी पर बने रहने

    के लिए हमें अपने मस्तिष्क को शुद्ध और सकारात्मक खुराक देनी होगी।

    जिस तरह हमारे शरीर को हर रोज अच्छे खाने की जरूरत होती है, उसी तरह हमारे मस्तिष्क को भी हर रोज अच्छे विचारों की जरूरतों होती है। इस वाक्य में सबसे अहम शब्द, अच्छा खाना और अच्छे विचार हैं। अगर हम अपने शरीर को रोज सड़े-गले खाने और अपने दिमाग को बुरे विचारों की खुराक दें, तो हमारा शरीर और दिमाग बीमार पड़ जाएँगे। सही पटरी पर बने रहने के लिए हमें अपने मस्तिष्क को शुद्ध और सकारात्मक खुराक देनी होगी।
    0 Commentarii 0 Distribuiri 75 Views 0 previzualizare
  • इस संसार चक्र को जरूर समझना चाहिए । बीता हुआ कल भूतकाल जिसे कहते हैं, उस काल से शिक्षा लेनी चाहिए । वो हम को कई चीजों की जानकारी दे सकता है । जो बीते हुए काल में गल्तियां हुई हों उसे हम आगे न करें । ऐसा विचार करना चाहिए । जो हमारे पूर्वजों ने अच्छे काम किये हैं । उन्हें दोहराना चाहिए भूतकाल शिक्षा का समय होता है । हर इन्सान को भूतकाल को याद रखना चाहिए । संसार को शिक्षा देने वाला भूतकाल ही है । वर्तमान काल जिसमें हम जी रहे हैं । आज कोई ऐसा काम न करें जिससे आने वाला कल विपत्ति लेकर आये । ऐसा विचार करना चाहिए । आज को जितना अच्छा बना सकें, बनाना चाहिए । जिसका आज अच्छा होगा उसका कल भी अच्छा होगा । ऐसा महापुरषों का मानना है । जो आज बोओगे वही कल काट सकोगे । ऐसा ही संसार का विधान है । कहते हैं "बोया पेड़ बबूल का आम कहा से होय " वाली कहावत सही है । कई लोग आने वाले कल की परवाह ही नहीं करते । जो वक्त को नहीं समझता उसे वक्त रुला देता हैं । वक्त दुनिया में अनमोल है । वक्त की कीमत दुनिया की हर चीज से भी महंगी है । एक सैकण्ड भी वापस नहीं आ सकता । आज का काम कल पर मत डालो उसको निपटाना ही सुखदायी है और तभी आने वाला कल ठीक होगा ।
    इस संसार चक्र को जरूर समझना चाहिए । बीता हुआ कल भूतकाल जिसे कहते हैं, उस काल से शिक्षा लेनी चाहिए । वो हम को कई चीजों की जानकारी दे सकता है । जो बीते हुए काल में गल्तियां हुई हों उसे हम आगे न करें । ऐसा विचार करना चाहिए । जो हमारे पूर्वजों ने अच्छे काम किये हैं । उन्हें दोहराना चाहिए भूतकाल शिक्षा का समय होता है । हर इन्सान को भूतकाल को याद रखना चाहिए । संसार को शिक्षा देने वाला भूतकाल ही है । वर्तमान काल जिसमें हम जी रहे हैं । आज कोई ऐसा काम न करें जिससे आने वाला कल विपत्ति लेकर आये । ऐसा विचार करना चाहिए । आज को जितना अच्छा बना सकें, बनाना चाहिए । जिसका आज अच्छा होगा उसका कल भी अच्छा होगा । ऐसा महापुरषों का मानना है । जो आज बोओगे वही कल काट सकोगे । ऐसा ही संसार का विधान है । कहते हैं "बोया पेड़ बबूल का आम कहा से होय " वाली कहावत सही है । कई लोग आने वाले कल की परवाह ही नहीं करते । जो वक्त को नहीं समझता उसे वक्त रुला देता हैं । वक्त दुनिया में अनमोल है । वक्त की कीमत दुनिया की हर चीज से भी महंगी है । एक सैकण्ड भी वापस नहीं आ सकता । आज का काम कल पर मत डालो उसको निपटाना ही सुखदायी है और तभी आने वाला कल ठीक होगा ।
    0 Commentarii 0 Distribuiri 75 Views 0 previzualizare
  • संता सिंह को मनोविज्ञान पढ़ने की सूझी। वह उसी में डूब गए। एक दिन उनका एक मित्र मिला। संता

    सिंह ने उससे कहा, मैंने सुना था कि तुम्हारा देहांत हो गया है। मित्र ने कहा, लेकिन मैं तो तुम्हारे सामने जीवित खड़ा हूं। असंभव। जिसने मुझे यह बताया था, वह तुम्हारी तुलना में ज्यादा भरोसेमंद था। संता सिंह ने

    मनोविज्ञान बघारा। भविष्यफल भविष्यफल पढ़ते हुए विकास ने सत्यजीत से पूछा- तुम्हारा क्या विचार है, इस

    भविष्यफल के बारे में ? सत्यजीत- 'मैंने पिछले हफ्ते पढ़ा था कि इस माह आपके साथ ऐसी कुछ घटना होगी,

    जिससे आपकी बोलती बंद हो जाएगी। विकास- 'तो क्या फिर वैसी कोई घटना हुई ? सत्यजीत- हाँ, मेरा मोबाइल गुम गया।

    संता सिंह को मनोविज्ञान पढ़ने की सूझी। वह उसी में डूब गए। एक दिन उनका एक मित्र मिला। संतासिंह ने उससे कहा, मैंने सुना था कि तुम्हारा देहांत हो गया है। मित्र ने कहा, लेकिन मैं तो तुम्हारे सामने जीवित खड़ा हूं। असंभव। जिसने मुझे यह बताया था, वह तुम्हारी तुलना में ज्यादा भरोसेमंद था। संता सिंह नेमनोविज्ञान बघारा। भविष्यफल भविष्यफल पढ़ते हुए विकास ने सत्यजीत से पूछा- तुम्हारा क्या विचार है, इसभविष्यफल के बारे में ? सत्यजीत- 'मैंने पिछले हफ्ते पढ़ा था कि इस माह आपके साथ ऐसी कुछ घटना होगी,जिससे आपकी बोलती बंद हो जाएगी। विकास- 'तो क्या फिर वैसी कोई घटना हुई ? सत्यजीत- हाँ, मेरा मोबाइल गुम गया।
    0 Commentarii 0 Distribuiri 73 Views 0 previzualizare
  • आगरा से पागलो को हवाई जहाज में बिठाकर दिल्‍ली लाया जा रहा था।


    पागल जहाज में हुड़दंग मचा रहे थे।


    उनमें से एक तो पायलट के कैबिन

    में घुस गया और बोला, उठो जहाज मैं चलाऊंगा।


    पायलट ने हट्टे-कट्टे


    पागल से उलझना ठीक न समझा और उससे कहा,


    अगर तुम शोर मचा

    रहे इन लोगो को शान्त कर दो तो मैं तुम्हें जहाज चलाने दूंगा।'


    पागल


    कैबिन में चला गया और तीन-चार मिनट बाद आकर बोला, लो शान्ति

    हो गई है अब मुझे जहाज चलाने दो।' पायलट ने देखा सचमुच कोई


    आवाज नहीं आ रही थी। उसने पागल से पूछा, “यह तुमने कैसे किया ?पागल बोला, 'कुछ खास नहीं। जहाज उड़ रहा था मैंने उसका दरवाजाखोलकर उनसे कहा उतरो हवाई अड्डा आ गया है और वे सब उतर गए।'

    आगरा से पागलो को हवाई जहाज में बिठाकर दिल्‍ली लाया जा रहा था। पागल जहाज में हुड़दंग मचा रहे थे। उनमें से एक तो पायलट के कैबिनमें घुस गया और बोला, उठो जहाज मैं चलाऊंगा। पायलट ने हट्टे-कट्टेपागल से उलझना ठीक न समझा और उससे कहा, अगर तुम शोर मचारहे इन लोगो को शान्त कर दो तो मैं तुम्हें जहाज चलाने दूंगा।' पागलकैबिन में चला गया और तीन-चार मिनट बाद आकर बोला, लो शान्तिहो गई है अब मुझे जहाज चलाने दो।' पायलट ने देखा सचमुच कोईआवाज नहीं आ रही थी। उसने पागल से पूछा, “यह तुमने कैसे किया ?पागल बोला, 'कुछ खास नहीं। जहाज उड़ रहा था मैंने उसका दरवाजाखोलकर उनसे कहा उतरो हवाई अड्डा आ गया है और वे सब उतर गए।'
    0 Commentarii 0 Distribuiri 65 Views 0 previzualizare
  • एक फौजी अफसर ने मेज पर रखे हुए बिस्कुट के डिब्बों की तरफ इशारा करते हुए अपने सिपाहियों से

    कहा - जवानो, इन पर इस तरह टूट पड़ो, जैसे लडाई में दुश्मन पर टूटते हैं।

    यह सुनते ही सिपाही बिस्कुटों पर टूट पड़े और उन्हें खाने में जुट गए। लेकिन एक सिपाही कुछ

    बिस्कुट खाता, कुछ अपनी जेब में रखता जा रहा था। अफसर ने उसे देख लिया।पूछा - नौजवान, ये क्या कर रहे हो?दुश्मनों को कैदी बना रहा हूं सर- जवान ने जवाब दिया।सेना का एक जवान अपने अधिकारी से आठ दिन की छुट्टी माँगने गया तो अधिकारी ने उसे टालने

    की गरज से कहा 'जाओ पहले दुश्मन की सेना का एक टैंक ले आओदूसरे दिन जवान सचमुच दुश्मन का एक टैंक लेकर आ गया, इस पर अधिकारी ने आश्चर्य में भरकर

    पूछा ये तुमने कैसे किया?इसमें कौन सी बड़ी बात है, जवान ने सरलता से कहा जब उन्हें आठ दिन की छुट्टी चाहिए होती है तो

    वे हमसे टैंक ले जाते हैं।डैडी-एक किशोर ने पूछा- "अगर मैं कार चोरी कर लूं तो क्या होगा?

    "तो तू जेल जाएगा और क्या होगा?- पिता ने उत्तर दिया।किशोर सकपकाया, हकबकाया, उसने बेचैनी से पहलू बदला और फिर बोला-'डैडी, मेरी गैरहाजिरी में

    आप कार की सवस वगैरह तो कराते रहोगे न?मम्मी (राजू से) : बेटे, टिकट लगा कर चिट्ठी को लेटर बाक्स में डाल आए हो न?

    राजू : मम्मी, टिकट खरीदने की जरूरत ही नहीं पड़ी।

    मम्मी : क्यों?राजू : क्योंकि लेटर बाक्स की ओर कोई देख नहीं रहा था इसलिए मैं ने बिना टिकट लगाए चिट्ठी उस

    में डाल दी।

    एक बड़ा-सा कुत्ता एक छोटे से बच्चे के मुंह और हाथ को चाटने लगा। उससे एक साल बड़ा भाई मारे डर

    के चीखने लगा।मां ने अंदर से पूछा-कुत्ते ने काटा तो नहीं?बेटे ने जवाब दिया-नहीं अभी तो चख रहा है।प्रेमिका से भेंट होने पर प्रेमी बोला - आज मैं अपने ड्राइवर की छुट्टी कर रहा हूं। उसने मुझे तीन बार

    मौत के मुंह में पहुंचा दिया।छोड़ो प्यारे। प्रेमिका ने कहा - उसे एक मौका और दो बेचारा बीबी बच्चों वाला है।एक आदमी ने अपनी उम्र, आय आदि का ब्यौरा देते हुए अखबार में विज्ञापन दिया, पत्नी चाहिए।जवाब में उसके पास दो सौ से अधिक पुरुषों के पत्र आए। उन्होंने लिखा था, मेरी ले जाएं।

    एक फौजी अफसर ने मेज पर रखे हुए बिस्कुट के डिब्बों की तरफ इशारा करते हुए अपने सिपाहियों सेकहा - जवानो, इन पर इस तरह टूट पड़ो, जैसे लडाई में दुश्मन पर टूटते हैं।यह सुनते ही सिपाही बिस्कुटों पर टूट पड़े और उन्हें खाने में जुट गए। लेकिन एक सिपाही कुछबिस्कुट खाता, कुछ अपनी जेब में रखता जा रहा था। अफसर ने उसे देख लिया।पूछा - नौजवान, ये क्या कर रहे हो?दुश्मनों को कैदी बना रहा हूं सर- जवान ने जवाब दिया।सेना का एक जवान अपने अधिकारी से आठ दिन की छुट्टी माँगने गया तो अधिकारी ने उसे टालनेकी गरज से कहा 'जाओ पहले दुश्मन की सेना का एक टैंक ले आओदूसरे दिन जवान सचमुच दुश्मन का एक टैंक लेकर आ गया, इस पर अधिकारी ने आश्चर्य में भरकरपूछा ये तुमने कैसे किया?इसमें कौन सी बड़ी बात है, जवान ने सरलता से कहा जब उन्हें आठ दिन की छुट्टी चाहिए होती है तोवे हमसे टैंक ले जाते हैं।डैडी-एक किशोर ने पूछा- "अगर मैं कार चोरी कर लूं तो क्या होगा?"तो तू जेल जाएगा और क्या होगा?- पिता ने उत्तर दिया।किशोर सकपकाया, हकबकाया, उसने बेचैनी से पहलू बदला और फिर बोला-'डैडी, मेरी गैरहाजिरी मेंआप कार की सवस वगैरह तो कराते रहोगे न?मम्मी (राजू से) : बेटे, टिकट लगा कर चिट्ठी को लेटर बाक्स में डाल आए हो न?राजू : मम्मी, टिकट खरीदने की जरूरत ही नहीं पड़ी।मम्मी : क्यों?राजू : क्योंकि लेटर बाक्स की ओर कोई देख नहीं रहा था इसलिए मैं ने बिना टिकट लगाए चिट्ठी उसमें डाल दी।एक बड़ा-सा कुत्ता एक छोटे से बच्चे के मुंह और हाथ को चाटने लगा। उससे एक साल बड़ा भाई मारे डरके चीखने लगा।मां ने अंदर से पूछा-कुत्ते ने काटा तो नहीं?बेटे ने जवाब दिया-नहीं अभी तो चख रहा है।प्रेमिका से भेंट होने पर प्रेमी बोला - आज मैं अपने ड्राइवर की छुट्टी कर रहा हूं। उसने मुझे तीन बारमौत के मुंह में पहुंचा दिया।छोड़ो प्यारे। प्रेमिका ने कहा - उसे एक मौका और दो बेचारा बीबी बच्चों वाला है।एक आदमी ने अपनी उम्र, आय आदि का ब्यौरा देते हुए अखबार में विज्ञापन दिया, पत्नी चाहिए।जवाब में उसके पास दो सौ से अधिक पुरुषों के पत्र आए। उन्होंने लिखा था, मेरी ले जाएं।
    0 Commentarii 0 Distribuiri 70 Views 0 previzualizare
  • 0 Commentarii 0 Distribuiri 77 Views 0 previzualizare
Mai multe povesti
Talkfever - Growing worldwide https://talkfever.com