रिश्ते निभाने में हम सभी से गलतियाँ होती हैं कभी-कभी हम दूसरों की

जरूरतों के प्रति असंवेदनशील हो जाते हैं खासकर उनके प्रति जो हमारे बहुत

करीबी हैं । फिर इससे मायूसी और नाराजगी पैदा होती है । मायूसी से बचने के लिए आपसी समझदारी जरूरी है । आपसी रिश्ते लोगों में पूर्णता होने के वजह से नहीं बनते बल्कि वे आपसी समझदारी से है । एक अच्छा इंसान बनने से ज्यादा संतोष दूसरों का ख्याल रखने में मिलता है । इससे हमारी ख्याति अपने आप ही बढ़ जाती है जो हमारे जीवन का सबसे बेहतर बीमा है और जिसके लिए कुछ खास खर्च नहीं करना पड़ता है । उदार बनें उदारता भावनात्मक परिपक्वता की पहचान है । उदार होने का मतलब है कि हम

बिना किसी के कहे औरों का खयाल रखें और उनके लिए सोचे-विचारें ।

रिश्ते निभाने में हम सभी से गलतियाँ होती हैं कभी-कभी हम दूसरों की जरूरतों के प्रति असंवेदनशील हो जाते हैं खासकर उनके प्रति जो हमारे बहुत करीबी हैं । फिर इससे मायूसी और नाराजगी पैदा होती है । मायूसी से बचने के लिए आपसी समझदारी जरूरी है । आपसी रिश्ते लोगों में पूर्णता होने के वजह से नहीं बनते बल्कि वे आपसी समझदारी से है । एक अच्छा इंसान बनने से ज्यादा संतोष दूसरों का ख्याल रखने में मिलता है । इससे हमारी ख्याति अपने आप ही बढ़ जाती है जो हमारे जीवन का सबसे बेहतर बीमा है और जिसके लिए कुछ खास खर्च नहीं करना पड़ता है । उदार बनें उदारता भावनात्मक परिपक्वता की पहचान है । उदार होने का मतलब है कि हम बिना किसी के कहे औरों का खयाल रखें और उनके लिए सोचे-विचारें ।
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