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  • जो होता है अच्छा होता है

    एक दिन शिकार करते समय अकबर की अँगुली कट गई।

    बीरबल ने यह देखा तो कहा, “जो होता है अच्छा होता है।”

    बीरबल की बात सुनकर अकबर नाराज हो उठा और उसे अपनी नज़रों से दूर कर राज्य से

    निकाल दिया। जाते-जाते बीरबल ने कहा, "यह भी अच्छा ही हुआ।" कई दिनों बाद

    अकबर पुनः शिकार करने गया।

    जंगल में कबीलियों ने उसे पकड़ लिया। वे

    अपने देवता को अकबर की बलि देने ले गए।

    वह बुरी तरह डर गया।

    कबीले वाले अकबर की बलि देने की तैयारी ही कर रहे थे कि उन्होंने उसकी कटी हुई अँगुली देखी।

    उसने कहा, “ओह! हम इसकी बलि नहीं दे सकते।

    देखो, इसकी अँगुली कटी हुई है।

    दोषपूर्ण शरीर की बलि अपने भगवान को नहीं दी जा सकती है।"

    उन लोगों ने यह कहकर अकबर को छोड़ दिया।

    घर वापस आकर अकबर ने बीरबल को बुलाया और उसे सारा किस्सा विस्तारपूर्वक सुनाते हुए कहा, "तुम्हारा कथन सत्य हो गया।

    पर तुम्हें राज्य से निकालने की मेरी आज्ञा तुम्हारे लिए अच्छी कैसे हुई?"

    बीरबल ने कहा, "यदि आपने मुझे जाने के लिए नहीं कहा होता तो शायद मैं भी आपके साथ शिकार पर जाता ।

    वहाँ आपकी जगह मुझे पकड़कर कबीले वाले मेरी बलि चढ़ा देते।

    आपकी आज्ञा ने तो मेरी जान बचा दी।"
    जो होता है अच्छा होता है एक दिन शिकार करते समय अकबर की अँगुली कट गई। बीरबल ने यह देखा तो कहा, “जो होता है अच्छा होता है।” बीरबल की बात सुनकर अकबर नाराज हो उठा और उसे अपनी नज़रों से दूर कर राज्य से निकाल दिया। जाते-जाते बीरबल ने कहा, "यह भी अच्छा ही हुआ।" कई दिनों बाद अकबर पुनः शिकार करने गया। जंगल में कबीलियों ने उसे पकड़ लिया। वे अपने देवता को अकबर की बलि देने ले गए। वह बुरी तरह डर गया। कबीले वाले अकबर की बलि देने की तैयारी ही कर रहे थे कि उन्होंने उसकी कटी हुई अँगुली देखी। उसने कहा, “ओह! हम इसकी बलि नहीं दे सकते। देखो, इसकी अँगुली कटी हुई है। दोषपूर्ण शरीर की बलि अपने भगवान को नहीं दी जा सकती है।" उन लोगों ने यह कहकर अकबर को छोड़ दिया। घर वापस आकर अकबर ने बीरबल को बुलाया और उसे सारा किस्सा विस्तारपूर्वक सुनाते हुए कहा, "तुम्हारा कथन सत्य हो गया। पर तुम्हें राज्य से निकालने की मेरी आज्ञा तुम्हारे लिए अच्छी कैसे हुई?" बीरबल ने कहा, "यदि आपने मुझे जाने के लिए नहीं कहा होता तो शायद मैं भी आपके साथ शिकार पर जाता । वहाँ आपकी जगह मुझे पकड़कर कबीले वाले मेरी बलि चढ़ा देते। आपकी आज्ञा ने तो मेरी जान बचा दी।"
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  • बीरबल की चतुराई का घड़ा

    एक दिन, अकबर ने बीरबल से क्रुद्ध होकर उसे राज्य छोड़कर चले जाने के लिए कह दिया।

    सम्राट की आज्ञा मानकर बीरबल चला गया।

    कुछ दिनों के बाद अकबर को बीरबल की याद सताने लगी।

    अकबर ने अपने दूतों को बीरबल को ढूँढ़ने भेजा पर बीरबल उन्हें कहीं नहीं मिला।

    अंततः अकबर को एक युक्ति सूझी।

    अपने राज्य के गाँवों में उसने एक संदेश भेजा, “तीन माह के भीतर आपको चतुराई से भरा घड़ा भेजना होगा अगर असफल रहे,

    तो हीरे-जवाहरातों से भरा घड़ा आपको राजा के पास भेजना होगा।"

    राजा का संदेश पाकर गाँव के मुखिया परेशान हो उठे।

    बीरबल एक गाँव में छिपा हुआ था।

    गाँव के मुखिया से जाकर उसने कहा, “मैं राजा को चतुराई भरा घड़ा भेजूँगा।”

    बीरबल एक घड़ा लेकर अपने बगीचे में गया।

    लता में लगे हुए एक छोटे तरबुज को उसने घड़े में रख दिया।

    तीन माह बाद तरबूज ने बड़े होकर घड़े को भर दिया।

    उसने घड़े को

    अकबर के पास यह लिखकर भेजा, “घड़े को तोड़े बिना चतुराई को निकाल लें।”

    अकबर ने तुरंत पहचान लिया कि यह बीरबल की ही करतूत है।

    वह स्वयं उस गाँव में जाकर बीरबल को अपने साथ वापस ले आया।
    बीरबल की चतुराई का घड़ा एक दिन, अकबर ने बीरबल से क्रुद्ध होकर उसे राज्य छोड़कर चले जाने के लिए कह दिया। सम्राट की आज्ञा मानकर बीरबल चला गया। कुछ दिनों के बाद अकबर को बीरबल की याद सताने लगी। अकबर ने अपने दूतों को बीरबल को ढूँढ़ने भेजा पर बीरबल उन्हें कहीं नहीं मिला। अंततः अकबर को एक युक्ति सूझी। अपने राज्य के गाँवों में उसने एक संदेश भेजा, “तीन माह के भीतर आपको चतुराई से भरा घड़ा भेजना होगा अगर असफल रहे, तो हीरे-जवाहरातों से भरा घड़ा आपको राजा के पास भेजना होगा।" राजा का संदेश पाकर गाँव के मुखिया परेशान हो उठे। बीरबल एक गाँव में छिपा हुआ था। गाँव के मुखिया से जाकर उसने कहा, “मैं राजा को चतुराई भरा घड़ा भेजूँगा।” बीरबल एक घड़ा लेकर अपने बगीचे में गया। लता में लगे हुए एक छोटे तरबुज को उसने घड़े में रख दिया। तीन माह बाद तरबूज ने बड़े होकर घड़े को भर दिया। उसने घड़े को अकबर के पास यह लिखकर भेजा, “घड़े को तोड़े बिना चतुराई को निकाल लें।” अकबर ने तुरंत पहचान लिया कि यह बीरबल की ही करतूत है। वह स्वयं उस गाँव में जाकर बीरबल को अपने साथ वापस ले आया।
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  • त्रिदेव

    एक बार ब्रह्मा और विष्णु में कौन अधिक श्रेष्ठ है?

    इस बात को लेकर विवाद हो गया।

    अचानक उनके समक्ष एक प्रकाश स्तम्भ प्रकट हुआ।

    दोनों में सहमति बनी कि जो भी उसके छोर को ढूँढेगा वही श्रेष्ठ होगा।

    ब्रह्मा स्तम्भ का छोर ढूँढने के लिए आकाश की ओर गए जबकि विष्णु भूतल की ओर छोर ढूँढने गए।

    किन्तु दोनों ही छोर न ढूँढ सके।

    इसी बीच आकाश से गिरते हुए केतकी के फूल को पकड़कर ब्रह्मा विष्णु से मिलने गए।

    विष्णु ने छोर को ढूँढ पाने में अपनी असमर्थता बताई।

    तब ब्रह्मा ने केतकी के पुष्प को दिखाते हुए असत्य कहा कि यह उन्हें स्तम्भ के ऊपर मिला था।

    ब्रह्मा के असत्य से शिव रुष्ट हो गए।

    वस्तुतः ब्रह्मा, विष्णु और महेश एक दूसरे के पूरक हैं।

    जिस प्रकार अ, उ, म एक साथ मिलकर ‘ओऽम्’ बनता है उसी प्रकार ब्रह्मा सृष्टिकर्ता,

    विष्णु-पालनकर्ता और महेश-संहारक हैं जो एक साथ त्रिदेव कहलाते हैं।
    त्रिदेव एक बार ब्रह्मा और विष्णु में कौन अधिक श्रेष्ठ है? इस बात को लेकर विवाद हो गया। अचानक उनके समक्ष एक प्रकाश स्तम्भ प्रकट हुआ। दोनों में सहमति बनी कि जो भी उसके छोर को ढूँढेगा वही श्रेष्ठ होगा। ब्रह्मा स्तम्भ का छोर ढूँढने के लिए आकाश की ओर गए जबकि विष्णु भूतल की ओर छोर ढूँढने गए। किन्तु दोनों ही छोर न ढूँढ सके। इसी बीच आकाश से गिरते हुए केतकी के फूल को पकड़कर ब्रह्मा विष्णु से मिलने गए। विष्णु ने छोर को ढूँढ पाने में अपनी असमर्थता बताई। तब ब्रह्मा ने केतकी के पुष्प को दिखाते हुए असत्य कहा कि यह उन्हें स्तम्भ के ऊपर मिला था। ब्रह्मा के असत्य से शिव रुष्ट हो गए। वस्तुतः ब्रह्मा, विष्णु और महेश एक दूसरे के पूरक हैं। जिस प्रकार अ, उ, म एक साथ मिलकर ‘ओऽम्’ बनता है उसी प्रकार ब्रह्मा सृष्टिकर्ता, विष्णु-पालनकर्ता और महेश-संहारक हैं जो एक साथ त्रिदेव कहलाते हैं।
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  • मत देख ऐ हसीना मुझको यु हँसते हँसते.
    मेरे दोस्त बड़े नालायक है कह देंगे भाभी नमस्ते!
    मत देख ऐ हसीना मुझको यु हँसते हँसते. मेरे दोस्त बड़े नालायक है कह देंगे भाभी नमस्ते!
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  • ज़िन्दगी एक बार ही सही.. लेकिन ऐसे शख्स से जरूर मिलाती है..
    जो तुम्हारी अच्छी खासी ज़िन्दगी का सत्यानाश कर देता है...
    ज़िन्दगी एक बार ही सही.. लेकिन ऐसे शख्स से जरूर मिलाती है.. जो तुम्हारी अच्छी खासी ज़िन्दगी का सत्यानाश कर देता है...
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  • 🌄✨ 🙏🙏आबू राजा – माउंट आबू का विस्तृत 3D मानचित्र
    राजस्थान की अरावली पर्वतमाला की गोद में बसा माउंट आबू राज्य का एकमात्र हिल स्टेशन है। हरियाली, झीलों, मंदिरों और पहाड़ी दृश्यों से सुसज्जित यह स्थान प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक शांति का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है।🙏🙏
    🏔️👉 गुरु शिखर (1722 मीटर)
    अरावली पर्वतमाला की सर्वोच्च चोटी गुरु शिखर यहाँ का प्रमुख आकर्षण है, जहाँ से चारों ओर का विहंगम दृश्य मन मोह लेता है।👈
    🏞️ 👉नक्की झील
    शहर के हृदय में स्थित नक्की झील शांत वातावरण और नौकायन के लिए प्रसिद्ध है। इसके आसपास बसा बाजार और पहाड़ी दृश्य इसे और आकर्षक बनाते हैं।
    🛕 👉आध्यात्मिक धरोहरें
    • दिलवाड़ा जैन मंदिर – संगमरमर की बारीक नक्काशी का विश्वप्रसिद्ध उदाहरण।
    • अर्बुदा देवी मंदिर – पहाड़ी पर स्थित आस्था का केंद्र।
    • अचलेश्वर महादेव मंदिर – धार्मिक महत्व का प्राचीन स्थल।
    🌅 👉प्राकृतिक व्यू पॉइंट्स
    • हनीमून पॉइंट
    • सनसेट पॉइंट
    • टोड रॉक
    🌳👉 वन्यजीव और हरियाली
    माउंट आबू वन्यजीव अभयारण्य घने जंगलों, दुर्लभ वनस्पतियों और वन्यजीवों का संरक्षण करता है, जो इस क्षेत्र को मरुस्थलीय राजस्थान से अलग पहचान देता है।
    📍👉 स्थान:
    सिरोही जिला, राजस्थान
    औसत ऊँचाई: लगभग 1220 मीटर
    माउंट आबू केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि प्रकृति, आध्यात्म और शांति का अद्वितीय संगम है। 🌿
    🌄✨ 🙏🙏आबू राजा – माउंट आबू का विस्तृत 3D मानचित्र राजस्थान की अरावली पर्वतमाला की गोद में बसा माउंट आबू राज्य का एकमात्र हिल स्टेशन है। हरियाली, झीलों, मंदिरों और पहाड़ी दृश्यों से सुसज्जित यह स्थान प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक शांति का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है।🙏🙏 🏔️👉 गुरु शिखर (1722 मीटर) अरावली पर्वतमाला की सर्वोच्च चोटी गुरु शिखर यहाँ का प्रमुख आकर्षण है, जहाँ से चारों ओर का विहंगम दृश्य मन मोह लेता है।👈 🏞️ 👉नक्की झील शहर के हृदय में स्थित नक्की झील शांत वातावरण और नौकायन के लिए प्रसिद्ध है। इसके आसपास बसा बाजार और पहाड़ी दृश्य इसे और आकर्षक बनाते हैं। 🛕 👉आध्यात्मिक धरोहरें • दिलवाड़ा जैन मंदिर – संगमरमर की बारीक नक्काशी का विश्वप्रसिद्ध उदाहरण। • अर्बुदा देवी मंदिर – पहाड़ी पर स्थित आस्था का केंद्र। • अचलेश्वर महादेव मंदिर – धार्मिक महत्व का प्राचीन स्थल। 🌅 👉प्राकृतिक व्यू पॉइंट्स • हनीमून पॉइंट • सनसेट पॉइंट • टोड रॉक 🌳👉 वन्यजीव और हरियाली माउंट आबू वन्यजीव अभयारण्य घने जंगलों, दुर्लभ वनस्पतियों और वन्यजीवों का संरक्षण करता है, जो इस क्षेत्र को मरुस्थलीय राजस्थान से अलग पहचान देता है। 📍👉 स्थान: सिरोही जिला, राजस्थान औसत ऊँचाई: लगभग 1220 मीटर माउंट आबू केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि प्रकृति, आध्यात्म और शांति का अद्वितीय संगम है। 🌿
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  • जिन लोगो कि शरीर पर तिलों की संख्या ज्यादा होती है वह औसतन कम तिल वाले लोगो से ज्यादा जीते हैं.
    जिन लोगो कि शरीर पर तिलों की संख्या ज्यादा होती है वह औसतन कम तिल वाले लोगो से ज्यादा जीते हैं.
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  • महिलाएं हर रोज औसतन 20,000 शब्द बोलती हैं, जो पुरुषों के औसत से एक हज़ार-दो हज़ार नहीं 13000 शब्द ज्यादा है.
    महिलाएं हर रोज औसतन 20,000 शब्द बोलती हैं, जो पुरुषों के औसत से एक हज़ार-दो हज़ार नहीं 13000 शब्द ज्यादा है.
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  • रोचक तथ्य
    Righted-handed लोग औसतन left-handed लोगों से 9 साल ज्यादा जीते हैं.

    रोचक तथ्य Righted-handed लोग औसतन left-handed लोगों से 9 साल ज्यादा जीते हैं.
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  • रोचक तथ्य
    बादल का वजन: एक औसत आकार के बादल का वजन लगभग 80 हाथियों (करीब 10 लाख टन) के बराबर हो सकता है।
    रोचक तथ्य बादल का वजन: एक औसत आकार के बादल का वजन लगभग 80 हाथियों (करीब 10 लाख टन) के बराबर हो सकता है।
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  • **बस एक फोटो…**

    वो सड़क और वो फुटपाथ कब से उसका घर बन गए थे, ये उसे खुद भी याद नहीं था। दुनिया उसे “कालू” कहती थी। किसी ने कभी उसका असली नाम नहीं पूछा, शायद उसे खुद भी याद नहीं था।

    उम्र करीब दस साल थी, लेकिन आँखों में बहुत समझ थी। भूख और हालात ने उसे जल्दी बड़ा कर दिया था। सुबह ठंडी ज़मीन उसे जगा देती। आसमान उसकी छत था और सड़क उसकी दुनिया।

    दिन भर लोग आते-जाते रहते। कोई मोबाइल में खोया रहता, कोई हँसता, कोई ग़ुस्से में। वो सबको चुपचाप देखता। उसे समझ आ गया था कि इस दुनिया से उम्मीद रखना बेकार है।

    लेकिन उस दिन उसके मन में एक छोटी-सी ख्वाहिश जागी।

    वो चौराहे पर बैठा था। लोग सेल्फी ले रहे थे, वीडियो बना रहे थे। वो सबको देखता रहा। उसने कभी खुद को ठीक से नहीं देखा था। दुकानों के काँच में उसका चेहरा धुंधला दिखता था।

    उसके मन में बस एक सवाल था—

    “मैं फोटो में कैसा लगता हूँ?”

    हिम्मत करके उसने एक आदमी से कहा,
    “भैया, मेरी एक फोटो ले दोगे?”

    “हट जा, काम है,” आदमी बोला।

    फिर एक महिला से पूछा।
    “दूर रहो,” उसने फोन बचाते हुए कहा।

    एक लड़का हँसा, “पहले कपड़े बदल के आ।”

    हर जवाब उसके दिल को तोड़ रहा था।

    वो फुटपाथ पर बैठ गया। सिर झुका लिया। शायद उसकी ख्वाहिश ही गलत थी।

    तभी किसी ने पूछा,
    “बेटे, उदास क्यों हो?”

    सामने एक सज्जन खड़े थे, आँखों में अपनापन था।

    “फोटो चाहिए?” उन्होंने पूछा।

    वो धीरे से बोला, “बस देखना था… मैं कैसा लगता हूँ।”

    उन्होंने मोबाइल निकाला।
    “इधर खड़े हो जाओ।”

    क्लिक।

    “देखो।”

    स्क्रीन पर वही चेहरा था। लेकिन पहली बार उसे लगा कि वो भी किसी से कम नहीं है।

    थोड़ी देर बाद सज्जन एक छपी हुई फोटो लेकर आए।

    “ये लो।”

    उसने कांपते हाथों से पकड़ी। अपनी पहली तस्वीर।

    आँखें भर आईं।
    “धन्यवाद…”

    वो खुशी-खुशी लौट गया।

    उस रात वो फोटो सीने से लगाकर सोया।

    उसके लिए वही उसकी सबसे बड़ी दौलत थी।

    **मुझे ज़माने की दौलत नहीं चाहिए,
    मेरी तस्वीर ही काफी है।**
    **बस एक फोटो…** वो सड़क और वो फुटपाथ कब से उसका घर बन गए थे, ये उसे खुद भी याद नहीं था। दुनिया उसे “कालू” कहती थी। किसी ने कभी उसका असली नाम नहीं पूछा, शायद उसे खुद भी याद नहीं था। उम्र करीब दस साल थी, लेकिन आँखों में बहुत समझ थी। भूख और हालात ने उसे जल्दी बड़ा कर दिया था। सुबह ठंडी ज़मीन उसे जगा देती। आसमान उसकी छत था और सड़क उसकी दुनिया। दिन भर लोग आते-जाते रहते। कोई मोबाइल में खोया रहता, कोई हँसता, कोई ग़ुस्से में। वो सबको चुपचाप देखता। उसे समझ आ गया था कि इस दुनिया से उम्मीद रखना बेकार है। लेकिन उस दिन उसके मन में एक छोटी-सी ख्वाहिश जागी। वो चौराहे पर बैठा था। लोग सेल्फी ले रहे थे, वीडियो बना रहे थे। वो सबको देखता रहा। उसने कभी खुद को ठीक से नहीं देखा था। दुकानों के काँच में उसका चेहरा धुंधला दिखता था। उसके मन में बस एक सवाल था— “मैं फोटो में कैसा लगता हूँ?” हिम्मत करके उसने एक आदमी से कहा, “भैया, मेरी एक फोटो ले दोगे?” “हट जा, काम है,” आदमी बोला। फिर एक महिला से पूछा। “दूर रहो,” उसने फोन बचाते हुए कहा। एक लड़का हँसा, “पहले कपड़े बदल के आ।” हर जवाब उसके दिल को तोड़ रहा था। वो फुटपाथ पर बैठ गया। सिर झुका लिया। शायद उसकी ख्वाहिश ही गलत थी। तभी किसी ने पूछा, “बेटे, उदास क्यों हो?” सामने एक सज्जन खड़े थे, आँखों में अपनापन था। “फोटो चाहिए?” उन्होंने पूछा। वो धीरे से बोला, “बस देखना था… मैं कैसा लगता हूँ।” उन्होंने मोबाइल निकाला। “इधर खड़े हो जाओ।” क्लिक। “देखो।” स्क्रीन पर वही चेहरा था। लेकिन पहली बार उसे लगा कि वो भी किसी से कम नहीं है। थोड़ी देर बाद सज्जन एक छपी हुई फोटो लेकर आए। “ये लो।” उसने कांपते हाथों से पकड़ी। अपनी पहली तस्वीर। आँखें भर आईं। “धन्यवाद…” वो खुशी-खुशी लौट गया। उस रात वो फोटो सीने से लगाकर सोया। उसके लिए वही उसकी सबसे बड़ी दौलत थी। **मुझे ज़माने की दौलत नहीं चाहिए, मेरी तस्वीर ही काफी है।**
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  • ## राज्य में अंधों की संख्या – अकबर बीरबल की कहानी

    एक दिन सम्राट अकबर ने राज्य के सभी अंधों को दान देने का निश्चय किया। उन्होंने आदेश दिया कि पूरे राज्य में दृष्टिहीन लोगों की सूची तैयार की जाए ताकि कोई भी वंचित न रहे।

    सूची तैयार होकर दरबार में प्रस्तुत हुई। अकबर ने वह सूची बीरबल को देकर दान बाँटने की व्यवस्था करने को कहा।

    सूची देखते ही बीरबल बोले, “महाराज, इसमें जितने नाम हैं, उनसे कहीं अधिक अंधे हमारे राज्य में हैं। सच तो यह है कि देखने वालों से ज़्यादा अंधे हैं।”

    अकबर चौंक गए। “यह कैसे संभव है? इसे सिद्ध करो,” उन्होंने चुनौती दी।

    अगले दिन बीरबल एक पुराने पलंग का ढांचा लेकर मुख्य चौराहे पर बैठ गए और उसकी रस्सी बुनने लगे। पास में एक सेवक कागज़-कलम लेकर खड़ा था।

    लोग आते, आश्चर्य से पूछते, “बीरबल, आप क्या कर रहे हैं?”
    बीरबल कुछ न कहते, बस सेवक को संकेत करते और सेवक कागज़ पर एक नाम लिख लेता।

    देखते ही देखते भीड़ जमा हो गई। हर कोई वही सवाल दोहराता रहा—“आप क्या कर रहे हैं?”

    शाम तक यह खबर अकबर तक पहुँची। वे स्वयं वहाँ आए और बोले, “बीरबल, यह क्या कर रहे हो?”

    सेवक ने फिर कागज़ पर एक नाम लिख लिया। तब बीरबल खड़े हुए और बोले, “महाराज, मैं अंधों की सूची बना रहा था।”

    उन्होंने वह सूची अकबर को थमा दी। अंत में अपना नाम देखकर अकबर हैरान रह गए।
    “मेरा नाम क्यों?” उन्होंने पूछा।

    बीरबल मुस्कुराए, “महाराज, आप स्पष्ट देख सकते थे कि मैं पलंग बुन रहा हूँ, फिर भी आपने पूछा कि मैं क्या कर रहा हूँ। जो सामने दिख रहा हो, उसे न देख पाना भी तो अंधापन ही है।”

    अकबर हँस पड़े और बोले, “तुम सही कहते हो, बीरबल। हमारे राज्य में आँखों से देखने वालों से ज़्यादा मन से अंधे लोग हैं।”

    सीख:
    सच्चा अंधापन आँखों का नहीं, समझ का होता है। जो स्पष्ट सत्य को भी न देख पाए, वही असली अंधा है।
    ## राज्य में अंधों की संख्या – अकबर बीरबल की कहानी एक दिन सम्राट अकबर ने राज्य के सभी अंधों को दान देने का निश्चय किया। उन्होंने आदेश दिया कि पूरे राज्य में दृष्टिहीन लोगों की सूची तैयार की जाए ताकि कोई भी वंचित न रहे। सूची तैयार होकर दरबार में प्रस्तुत हुई। अकबर ने वह सूची बीरबल को देकर दान बाँटने की व्यवस्था करने को कहा। सूची देखते ही बीरबल बोले, “महाराज, इसमें जितने नाम हैं, उनसे कहीं अधिक अंधे हमारे राज्य में हैं। सच तो यह है कि देखने वालों से ज़्यादा अंधे हैं।” अकबर चौंक गए। “यह कैसे संभव है? इसे सिद्ध करो,” उन्होंने चुनौती दी। अगले दिन बीरबल एक पुराने पलंग का ढांचा लेकर मुख्य चौराहे पर बैठ गए और उसकी रस्सी बुनने लगे। पास में एक सेवक कागज़-कलम लेकर खड़ा था। लोग आते, आश्चर्य से पूछते, “बीरबल, आप क्या कर रहे हैं?” बीरबल कुछ न कहते, बस सेवक को संकेत करते और सेवक कागज़ पर एक नाम लिख लेता। देखते ही देखते भीड़ जमा हो गई। हर कोई वही सवाल दोहराता रहा—“आप क्या कर रहे हैं?” शाम तक यह खबर अकबर तक पहुँची। वे स्वयं वहाँ आए और बोले, “बीरबल, यह क्या कर रहे हो?” सेवक ने फिर कागज़ पर एक नाम लिख लिया। तब बीरबल खड़े हुए और बोले, “महाराज, मैं अंधों की सूची बना रहा था।” उन्होंने वह सूची अकबर को थमा दी। अंत में अपना नाम देखकर अकबर हैरान रह गए। “मेरा नाम क्यों?” उन्होंने पूछा। बीरबल मुस्कुराए, “महाराज, आप स्पष्ट देख सकते थे कि मैं पलंग बुन रहा हूँ, फिर भी आपने पूछा कि मैं क्या कर रहा हूँ। जो सामने दिख रहा हो, उसे न देख पाना भी तो अंधापन ही है।” अकबर हँस पड़े और बोले, “तुम सही कहते हो, बीरबल। हमारे राज्य में आँखों से देखने वालों से ज़्यादा मन से अंधे लोग हैं।” सीख: सच्चा अंधापन आँखों का नहीं, समझ का होता है। जो स्पष्ट सत्य को भी न देख पाए, वही असली अंधा है।
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