• एक शेर बहुत दुःखी हो उठा और एक दिन वह बह्माजी के सामने जा पहुंचा और लगा गिड़-गिड़ाने। भगवान! मेरे शरीर में बल, पराक्रम, साहस और मजबूत हैं कि उनकी बदौलत में जंगल का राजा बना फिरता हूँ। फिर भी एक मुर्गे की आवाज सुनते ही डर जाता हूँ - मेरे लिए शर्म की बात नहीं। प्रभु आपने मुझे पैदा करते समय मेरे पीछे कौन-सी बला लगा दी ?ब्रह्माजी ने शेर को समझाया - बेटा! यह कौन-सा असंतोष ले बैठे ? भला इससे कौन सा लाभ उठा लोगे ?जो संसार में पैदा होता है। वह किसी न किसी बात में कम रहता है और उससे लाभ भी उठाता है। जाओ, यह असंतोष छोड़ों और आनन्द से अपना समय बिताओ। ब्रह्माजी के इस प्रकार समझाने पर भी शेर को संतोष नहीं हुआ। वह मन में जलता-भुनता और ब्रह्माजी को कोस्टा हुआ वन की ओर लौटा। मार्ग में क्या देखता है कि सामने में एक लम्बा चौड़ा भारी भरकम हाथी अपने कान बराबर हिलाता चला आ रहा है। सूप जैसे बड़ा-बड़ा कान। शेर ने हाथी से पूछा क्यों भाई! अपने सूप जैसे बड़े-बड़े कान लगातार हिलाते हुए चल रहे हो ?हठी ने पैर आगे बढ़ाते-बढ़ाते उत्तर दिया-तुम इतना भी नहीं जानते ? इन भन-भन करते हुए मच्छरों से बहुत डरता हूँ। यदि इनमें से एक भी मच्छर मेरे कान में घुस जाए तो मैं बैचैन हो जाऊं तड़प-तपड़ कर मर जाऊं। यह सुनते ही शेर को संतोष हो गया उसने अपने आप को कहा - भला मेरे दुःखी होने का कोई कारण नहीं है। जब इतना बड़ा हाथी इतने छोटे मच्छर से रात दिन डरता है तब मैं मच्छर की

    उपेक्षा बहुत बड़े मुर्गे की आवाज से कांप उठता हूँ तो यह कौन सी अचरज की

    बात है।

    एक शेर बहुत दुःखी हो उठा और एक दिन वह बह्माजी के सामने जा पहुंचा और लगा गिड़-गिड़ाने। भगवान! मेरे शरीर में बल, पराक्रम, साहस और मजबूत हैं कि उनकी बदौलत में जंगल का राजा बना फिरता हूँ। फिर भी एक मुर्गे की आवाज सुनते ही डर जाता हूँ - मेरे लिए शर्म की बात नहीं। प्रभु आपने मुझे पैदा करते समय मेरे पीछे कौन-सी बला लगा दी ?ब्रह्माजी ने शेर को समझाया - बेटा! यह कौन-सा असंतोष ले बैठे ? भला इससे कौन सा लाभ उठा लोगे ?जो संसार में पैदा होता है। वह किसी न किसी बात में कम रहता है और उससे लाभ भी उठाता है। जाओ, यह असंतोष छोड़ों और आनन्द से अपना समय बिताओ। ब्रह्माजी के इस प्रकार समझाने पर भी शेर को संतोष नहीं हुआ। वह मन में जलता-भुनता और ब्रह्माजी को कोस्टा हुआ वन की ओर लौटा। मार्ग में क्या देखता है कि सामने में एक लम्बा चौड़ा भारी भरकम हाथी अपने कान बराबर हिलाता चला आ रहा है। सूप जैसे बड़ा-बड़ा कान। शेर ने हाथी से पूछा क्यों भाई! अपने सूप जैसे बड़े-बड़े कान लगातार हिलाते हुए चल रहे हो ?हठी ने पैर आगे बढ़ाते-बढ़ाते उत्तर दिया-तुम इतना भी नहीं जानते ? इन भन-भन करते हुए मच्छरों से बहुत डरता हूँ। यदि इनमें से एक भी मच्छर मेरे कान में घुस जाए तो मैं बैचैन हो जाऊं तड़प-तपड़ कर मर जाऊं। यह सुनते ही शेर को संतोष हो गया उसने अपने आप को कहा - भला मेरे दुःखी होने का कोई कारण नहीं है। जब इतना बड़ा हाथी इतने छोटे मच्छर से रात दिन डरता है तब मैं मच्छर की उपेक्षा बहुत बड़े मुर्गे की आवाज से कांप उठता हूँ तो यह कौन सी अचरज की बात है।
    0 Comments 0 Shares 318 Views 0 Reviews
  • एक सिपाही बहुत बलवान था, बहुत बहादुर था और बहुत लड़ने वाला था। उसका घोडा भी वैसा ही बलवान, बहादुर और लड़ने का हौसला रखने वाला था। एक दिन सिपाही अपने लड़ने घोड़े पर बैठकर किसी पहाड़ी रास्ते से जा रहा था। अचानक घोड़े का पैर पत्थर से टकराया और उसकी नाल निकल गई। नाल निकल जाने से घोडा को बहुत कष्ट हुआ और वह लंगड़ाकर चलने लगा। सिपाही ने घोड़े का कष्ट तो समझ ही लिया परन्तु उसकी विशेष चिंता नहीं की। बस वह उसी सोच में डूबा रहा। नाल बंधवा देगा। इस प्रकार आज-काल के चक्कर में दिन निकलते गए और घोड़े का कष्ट दूर न हुआ। अचानक देश पर शत्रुओं ने आक्रमण कर दिया। राजा की ओर से सिपाही को आज्ञा मिली। बस! चल फ़ौरन पर। अब सिपाही क्या करता। इतना समय ही कहाँ था की जो घोड़े के पैर में नाल बंधवा पाता। परन्तु लड़ाई पर तो जाना ही था इसलिए वह उसी लंगड़ाते हुए घोड़े पर बैठा और दूसरे सिपाहियों के साथ चल पड़ा। दुर्भाग्यवश घोड़े के दूसरे पैर से भी नाल निकल गई। पहले वह तीन पैर से कुछ चल भी लेता था। परन्तु अब तो पैर क्या करता। किस तरह आगे बढ़ता। देखते-देखते शत्रु सामने आ पहुंचे। वे संख्या में इतने अधिक थे कि उनके सामने सिपाही के साथ ठहर भी न सके। वे फ़ौरन अपने-अपने घोड़े दौड़ाकर लड़ाई के मैदान से भाग निकले। परन्तु वह सिपाही कैसे भागता। उनका लंगड़ा घोडा जहाँ का तहाँ खड़ा रह गया। सिपाही ने दुःख से हाथ मलते हुए कहा यदि मैं आज-कल के चक्कर में न पड़ा

    रहता और उसी दिन अपने घोड़े के पैरों में नई नाल बंधवा देता तो आज इस

    विपात्त में क्यों फंसता।

    एक सिपाही बहुत बलवान था, बहुत बहादुर था और बहुत लड़ने वाला था। उसका घोडा भी वैसा ही बलवान, बहादुर और लड़ने का हौसला रखने वाला था। एक दिन सिपाही अपने लड़ने घोड़े पर बैठकर किसी पहाड़ी रास्ते से जा रहा था। अचानक घोड़े का पैर पत्थर से टकराया और उसकी नाल निकल गई। नाल निकल जाने से घोडा को बहुत कष्ट हुआ और वह लंगड़ाकर चलने लगा। सिपाही ने घोड़े का कष्ट तो समझ ही लिया परन्तु उसकी विशेष चिंता नहीं की। बस वह उसी सोच में डूबा रहा। नाल बंधवा देगा। इस प्रकार आज-काल के चक्कर में दिन निकलते गए और घोड़े का कष्ट दूर न हुआ। अचानक देश पर शत्रुओं ने आक्रमण कर दिया। राजा की ओर से सिपाही को आज्ञा मिली। बस! चल फ़ौरन पर। अब सिपाही क्या करता। इतना समय ही कहाँ था की जो घोड़े के पैर में नाल बंधवा पाता। परन्तु लड़ाई पर तो जाना ही था इसलिए वह उसी लंगड़ाते हुए घोड़े पर बैठा और दूसरे सिपाहियों के साथ चल पड़ा। दुर्भाग्यवश घोड़े के दूसरे पैर से भी नाल निकल गई। पहले वह तीन पैर से कुछ चल भी लेता था। परन्तु अब तो पैर क्या करता। किस तरह आगे बढ़ता। देखते-देखते शत्रु सामने आ पहुंचे। वे संख्या में इतने अधिक थे कि उनके सामने सिपाही के साथ ठहर भी न सके। वे फ़ौरन अपने-अपने घोड़े दौड़ाकर लड़ाई के मैदान से भाग निकले। परन्तु वह सिपाही कैसे भागता। उनका लंगड़ा घोडा जहाँ का तहाँ खड़ा रह गया। सिपाही ने दुःख से हाथ मलते हुए कहा यदि मैं आज-कल के चक्कर में न पड़ा रहता और उसी दिन अपने घोड़े के पैरों में नई नाल बंधवा देता तो आज इस विपात्त में क्यों फंसता।
    0 Comments 0 Shares 319 Views 0 Reviews
  • एक 20-22 साल का नौजवान सुपर मार्केट में दाखिल हुआ ।कुछ ख़रीदारी कर ही रहा था कि उसे महसूस हुआ कि कोई औरत उसका पीछा कर रही है ।मगर उसने अपना शक समझते हुए नज़रअंदाज़ किया और ख़रीदारी में मसरूफ हो गया ।लेकिन वह औरत लगातार उसका पीछा कर रही थी, अबकी बार उस नौजवान से रहा न गया ।वह अचानक उस औरत की तरफ मुड़ा और पूछा,


    माँ जी खैरियत है ? औरत बोली बेटा आपकी शक्ल मेरे मरहूम बेटे से बहुत ज्यादा मिलती जुलती है ।मैं ना चाहते हुए भी आपको अपना बेटा समझते हुए आपके पीछे चल पड़ी,


    और आप ने मुझे माँ जी कहा तो मेरे दिल के जज़्बात और खुशी बयां करने लायक नही।


    औरत ने यह कहा और उसकी आँखों से आँसू बहने शुरू हो गये। नौजवान कहता है कोई बात नहीं माँ जी आप मुझे अपना बेटा ही समझें।वह औरत बोली कि बेटा क्या आप मुझे एक बार फिर माँ जी कहोगे


    नौजवान ने ऊँची आवाज़ से कहा, जी माँ जीपर उस औरत ने ऐसा बर्ताव किया जैसे उसने सुना ही ना हो,


    नौजवान ने फिर ऊंची आवाज़ में कहा जी माँ जी.... ।औरत ने सुना और नौजवान के दोनों हाथ पकड़ कर चूमे ,


    अपने आंखों से लगाऐ और रोते हुए वहां से रुखसत हो गई।नौजवान उस मंज़र को देख कर अपने आप पर काबू नहीं कर सका और उसकी आंखों से आंसू बहने लगे,वह अपनी खरीदारी पूरी करे बगैर ही वापस चल दिया।काउंटर पर पहुँचा तो कैशियर ने दस हज़ार का बिल थमा दिया....


    नौजवान ने पूछा दस हज़ार कैसे ? कैशियर ने कहा आठ सौ का बिल आपका है ।और नौ हजार दो सौ का आपकी माँ के हैं,


    जिन्हें आप अभी माँ जी माँ जी कह रहे थे।वह दिन और आज का दिन,


    नौजवान अपनी असली मां को भी मौसी कहता है।

    एक 20-22 साल का नौजवान सुपर मार्केट में दाखिल हुआ ।कुछ ख़रीदारी कर ही रहा था कि उसे महसूस हुआ कि कोई औरत उसका पीछा कर रही है ।मगर उसने अपना शक समझते हुए नज़रअंदाज़ किया और ख़रीदारी में मसरूफ हो गया ।लेकिन वह औरत लगातार उसका पीछा कर रही थी, अबकी बार उस नौजवान से रहा न गया ।वह अचानक उस औरत की तरफ मुड़ा और पूछा, माँ जी खैरियत है ? औरत बोली बेटा आपकी शक्ल मेरे मरहूम बेटे से बहुत ज्यादा मिलती जुलती है ।मैं ना चाहते हुए भी आपको अपना बेटा समझते हुए आपके पीछे चल पड़ी, और आप ने मुझे माँ जी कहा तो मेरे दिल के जज़्बात और खुशी बयां करने लायक नही।औरत ने यह कहा और उसकी आँखों से आँसू बहने शुरू हो गये। नौजवान कहता है कोई बात नहीं माँ जी आप मुझे अपना बेटा ही समझें।वह औरत बोली कि बेटा क्या आप मुझे एक बार फिर माँ जी कहोगेनौजवान ने ऊँची आवाज़ से कहा, जी माँ जीपर उस औरत ने ऐसा बर्ताव किया जैसे उसने सुना ही ना हो,नौजवान ने फिर ऊंची आवाज़ में कहा जी माँ जी.... ।औरत ने सुना और नौजवान के दोनों हाथ पकड़ कर चूमे ,अपने आंखों से लगाऐ और रोते हुए वहां से रुखसत हो गई।नौजवान उस मंज़र को देख कर अपने आप पर काबू नहीं कर सका और उसकी आंखों से आंसू बहने लगे,वह अपनी खरीदारी पूरी करे बगैर ही वापस चल दिया।काउंटर पर पहुँचा तो कैशियर ने दस हज़ार का बिल थमा दिया....नौजवान ने पूछा दस हज़ार कैसे ? कैशियर ने कहा आठ सौ का बिल आपका है ।और नौ हजार दो सौ का आपकी माँ के हैं,जिन्हें आप अभी माँ जी माँ जी कह रहे थे।वह दिन और आज का दिन,नौजवान अपनी असली मां को भी मौसी कहता है।
    0 Comments 0 Shares 318 Views 0 Reviews
  • एक गदहा मैदान में हरी-हरी कोमल-कोमल दूब चार रहा था था, अचानक जो उसने सर उठाया, तो एक बाघ को अपनी ओर आते देखा। गदहा समझ गया कि अब प्राण बचना असम्भव है। बाघ के सामने से भाग निकलना भी असम्भव है। फिर क्या करे ?यों ही प्राण खो दें। ?बड़े बूढ़े की कहावत बन गए हैं। अक्ल बड़ी या भैंस ? क्यों न आज वही कहावत काम में लायें बुद्धि से बल से नीचा दिखाएं और बाघ को उल्लू बनायें। पिछले एक पैर से लंगड़ा-लंगड़ा कर चलना शुरू कर दिया। बाघ ने गदहे के पास

    जाते-जाते पूछा-क्यों भाई गदहे! यह तू लंगड़ा-लंगड़ा कर क्यों चलता है ?गदहे ने उत्तर दिया-क्या कहें सरकार! दौड़ते समय पैर में एक बहुत लम्बा बहुत मोटा काटा चुभ गया है। उसी से पैर में बहुत कष्ट हो रहा है और मैं लंगड़ाकर चल रहा हूँ। बाघ ने पूछा -फिर ?गदहे ने कहा यदि खाने के विचार रखते हो तो पहले वह कांटा बाहर निकालो। कहीं ऐसा नहीं हो कि मुझे खाते समय वह कांटा गलती से तुम्हारे गले में अटक जाए और तुम्हें अपने प्राण खोने पड़े। बाघ को गदहे का कहना जँच गया। उसने गदहे का वह पैर उठाया और बड़े ध्यान से उसमें कांटा ढूँढना शुरू किया। गदहे ने यह मौका बहुत अच्छा समझा और कसकर दुलत्ती फटकारी तथा हवा के समान तेजी से भाग निकला। जो तड़ाक से दुलत्ती की चोट पड़ी तो बाघ का मुहं टेढ़ा हो गया उसके सामने वाले दांत झड़ गए और जबड़े खून से भर गए। बस वह लज्जित होकर कह उठा-उफ़। गदहे की बुद्धि के सामने बाघ का बल कुछ काम न आया।

    एक गदहा मैदान में हरी-हरी कोमल-कोमल दूब चार रहा था था, अचानक जो उसने सर उठाया, तो एक बाघ को अपनी ओर आते देखा। गदहा समझ गया कि अब प्राण बचना असम्भव है। बाघ के सामने से भाग निकलना भी असम्भव है। फिर क्या करे ?यों ही प्राण खो दें। ?बड़े बूढ़े की कहावत बन गए हैं। अक्ल बड़ी या भैंस ? क्यों न आज वही कहावत काम में लायें बुद्धि से बल से नीचा दिखाएं और बाघ को उल्लू बनायें। पिछले एक पैर से लंगड़ा-लंगड़ा कर चलना शुरू कर दिया। बाघ ने गदहे के पास जाते-जाते पूछा-क्यों भाई गदहे! यह तू लंगड़ा-लंगड़ा कर क्यों चलता है ?गदहे ने उत्तर दिया-क्या कहें सरकार! दौड़ते समय पैर में एक बहुत लम्बा बहुत मोटा काटा चुभ गया है। उसी से पैर में बहुत कष्ट हो रहा है और मैं लंगड़ाकर चल रहा हूँ। बाघ ने पूछा -फिर ?गदहे ने कहा यदि खाने के विचार रखते हो तो पहले वह कांटा बाहर निकालो। कहीं ऐसा नहीं हो कि मुझे खाते समय वह कांटा गलती से तुम्हारे गले में अटक जाए और तुम्हें अपने प्राण खोने पड़े। बाघ को गदहे का कहना जँच गया। उसने गदहे का वह पैर उठाया और बड़े ध्यान से उसमें कांटा ढूँढना शुरू किया। गदहे ने यह मौका बहुत अच्छा समझा और कसकर दुलत्ती फटकारी तथा हवा के समान तेजी से भाग निकला। जो तड़ाक से दुलत्ती की चोट पड़ी तो बाघ का मुहं टेढ़ा हो गया उसके सामने वाले दांत झड़ गए और जबड़े खून से भर गए। बस वह लज्जित होकर कह उठा-उफ़। गदहे की बुद्धि के सामने बाघ का बल कुछ काम न आया।
    0 Comments 0 Shares 316 Views 0 Reviews
  • एक दिन अकवर बादशाह ने बीरबल से कहा, हमने न तो अप्सरा देखी है और न चुड़ैल, सिर्फ नाम सुने हैं । बीरबल, क्या तुम इन्हें दिखा सकते हो ? जी हाँ, मैं आपको अप्सरा और चुड़ैल दोनों दिखा दूंगा । कब ? बहुत जल्दी । न दिखा सके तो सजा मिलेगी । बीरबल बुद्धिमान तो थे ही, उन्होंने विचार किया और एक गरीब कुलीन मेहनती

    किसान की स्त्री और एक खूबसूरत स्त्री को अपने साथ लिया और दरबार में

    हाजिर हो गए । बीरबल, यह क्या तमाशा है ?हुजूर ये अप्सरा और चुड़ैल हैं । क्या बात करते हो ?यह साँवली स्त्री अप्सरा है और यह गोरी जो है वह चुड़ैल है । बीरबल की बात सुनकर बादशाह चौंक पड़े । उन्होंने कहा, बीरबल, तुम उलटी बात कह रहे हो । वह सुंदरी तो अप्सरा लगती है । नहीं हुजूर, बीरबल समझाने लगे, यह काली स्त्री साक्षात अप्सरा है, जो

    अपने पति को सच्चे प्यार से आनंदित करती है और यह वेश्या चुड़ैल है, जो

    जिस्मफरोशी करती है, लुटती है । इसका धंधा ही ऐसा है ।

    बादशाह को बीरबल का उत्तर तर्क-संगत लगा ।

    एक दिन अकवर बादशाह ने बीरबल से कहा, हमने न तो अप्सरा देखी है और न चुड़ैल, सिर्फ नाम सुने हैं । बीरबल, क्या तुम इन्हें दिखा सकते हो ? जी हाँ, मैं आपको अप्सरा और चुड़ैल दोनों दिखा दूंगा । कब ? बहुत जल्दी । न दिखा सके तो सजा मिलेगी । बीरबल बुद्धिमान तो थे ही, उन्होंने विचार किया और एक गरीब कुलीन मेहनती किसान की स्त्री और एक खूबसूरत स्त्री को अपने साथ लिया और दरबार में हाजिर हो गए । बीरबल, यह क्या तमाशा है ?हुजूर ये अप्सरा और चुड़ैल हैं । क्या बात करते हो ?यह साँवली स्त्री अप्सरा है और यह गोरी जो है वह चुड़ैल है । बीरबल की बात सुनकर बादशाह चौंक पड़े । उन्होंने कहा, बीरबल, तुम उलटी बात कह रहे हो । वह सुंदरी तो अप्सरा लगती है । नहीं हुजूर, बीरबल समझाने लगे, यह काली स्त्री साक्षात अप्सरा है, जो अपने पति को सच्चे प्यार से आनंदित करती है और यह वेश्या चुड़ैल है, जो जिस्मफरोशी करती है, लुटती है । इसका धंधा ही ऐसा है । बादशाह को बीरबल का उत्तर तर्क-संगत लगा ।
    0 Comments 0 Shares 311 Views 0 Reviews
  • एक दिन ऊँचा सुनने वाला एक चार साल का लड़का स्कूल से घर लौटा, तो उसकी

    जेब में उसके शिक्षक का एक नोट रखा था, जिस पर लिखा था, आपका टॉमी इतना

    मंदबुद्धि का है कि वह कुछ नहीं सीख सकता। उसे स्कूल से बाहर निकाल लीजिये। उसकी माँ ने वह नोट पढ़ कर जवाब दिया, मेरा टॉमी इतना मंदबुद्धि नहीं है कि कुछ सीख न सके। मैं उसे खुद पढ़ाऊंगी। और वही टॉमी एक दिन बड़ा होकर महान थॉमस एडीसन बना। वह स्कूल में केवल तीन महीने पढ़ सके थे।

    एक दिन ऊँचा सुनने वाला एक चार साल का लड़का स्कूल से घर लौटा, तो उसकी जेब में उसके शिक्षक का एक नोट रखा था, जिस पर लिखा था, आपका टॉमी इतना मंदबुद्धि का है कि वह कुछ नहीं सीख सकता। उसे स्कूल से बाहर निकाल लीजिये। उसकी माँ ने वह नोट पढ़ कर जवाब दिया, मेरा टॉमी इतना मंदबुद्धि नहीं है कि कुछ सीख न सके। मैं उसे खुद पढ़ाऊंगी। और वही टॉमी एक दिन बड़ा होकर महान थॉमस एडीसन बना। वह स्कूल में केवल तीन महीने पढ़ सके थे।
    0 Comments 0 Shares 308 Views 0 Reviews
  • एक आदमी अपनी नई कार धो रहा था, तभी उसके पड़ोसी ने पूछा, आपने यह कार कब खरीदी ?उस आदमी ने जवाब दिया, इसे मेरे भाई ने दिया है। पड़ोसी ने कहा, काश! मेरे पास भी ऐसी कार होती। इस पर उस आदमी ने कहा, आपको यह सोचना चाहिए था कि काश ! मेरा कोई ऐसा भाई होता। पड़ोसी की पत्नी उनकी बातचीत सुन रही थी। उसने बीच में टोक कर कहा, मैं

    सोचती हूँ - काश ! वह भाई मैं होती। यह सोचने का कितना सकारात्मक नजरिया

    है।

    एक आदमी अपनी नई कार धो रहा था, तभी उसके पड़ोसी ने पूछा, आपने यह कार कब खरीदी ?उस आदमी ने जवाब दिया, इसे मेरे भाई ने दिया है। पड़ोसी ने कहा, काश! मेरे पास भी ऐसी कार होती। इस पर उस आदमी ने कहा, आपको यह सोचना चाहिए था कि काश ! मेरा कोई ऐसा भाई होता। पड़ोसी की पत्नी उनकी बातचीत सुन रही थी। उसने बीच में टोक कर कहा, मैं सोचती हूँ - काश ! वह भाई मैं होती। यह सोचने का कितना सकारात्मक नजरिया है।
    0 Comments 0 Shares 308 Views 0 Reviews
  • एक दिन बीरबल किसी दूसरे शहर में अपने रिश्तेदारों से मिलने पहुंचे ।

    बीरबल को आता देखकर पति-पत्नी ने लड़ाई का नाटक करने का फैसला किया ।


    आदमी ने एक लकड़ी हाथ में ली और लड़ाई का नाटक शुरू कर दिया । बीरबल ने जब यह देखा तो वे समझ गए कि यह सब नाटक है । वह घर के चौबारे में छुपकर बैठ गए । अब उन्होंने देखा कि पति-पत्नी ने लड़ाई रोक दी और अपनी-अपनी होशियारी जताने लगी । पति ने कहा, देखा किस होशियारी से मैंने लकड़ी उठाकर चलाई लेकिन तुम्हें एक भी नहीं लगी । इस पर पत्नी, आपने देखा, मैं कितनी चतुराई से चिल्लाई लेकिन रोइ नहीं । यह सुनकर बीरबल से न रहा गया और वह बोले, तुम लोगों ने देखा, मैं किस तरह से चौबारे में छिप गया लेकिन मैं गया नहीं ।


    एक दिन बीरबल किसी दूसरे शहर में अपने रिश्तेदारों से मिलने पहुंचे । बीरबल को आता देखकर पति-पत्नी ने लड़ाई का नाटक करने का फैसला किया ।आदमी ने एक लकड़ी हाथ में ली और लड़ाई का नाटक शुरू कर दिया । बीरबल ने जब यह देखा तो वे समझ गए कि यह सब नाटक है । वह घर के चौबारे में छुपकर बैठ गए । अब उन्होंने देखा कि पति-पत्नी ने लड़ाई रोक दी और अपनी-अपनी होशियारी जताने लगी । पति ने कहा, देखा किस होशियारी से मैंने लकड़ी उठाकर चलाई लेकिन तुम्हें एक भी नहीं लगी । इस पर पत्नी, आपने देखा, मैं कितनी चतुराई से चिल्लाई लेकिन रोइ नहीं । यह सुनकर बीरबल से न रहा गया और वह बोले, तुम लोगों ने देखा, मैं किस तरह से चौबारे में छिप गया लेकिन मैं गया नहीं ।
    0 Comments 0 Shares 305 Views 0 Reviews
  • बादशाह ने एक प्रश्न किया, 'वह क्या है, जिसे सूरज-चाँद भी नहीं देख सकते ?' बारी-बारी सबसे प्रश्न पूछा गया ।

    सभी दरबारियों ने अपनी-अपनी तरह उत्तर दिए । किसी ने बताया खुदा, किसी ने भगवान तो किसी ने रूह ।

    बादशाह, किसी के उत्तर से संतुष्ट नहीं हो सके । सभी के उत्तर गलत थे । अंत में बीरबल से पूछा गया । वह विनम्रता के साथ बोले, जिसे सूरज और चाँद नहीं देख सकते हैं वह चीज है, अंधकार । बादशाह प्रसन्नता से खिल उठे ।

    उत्तर सही था ।

    बादशाह ने एक प्रश्न किया, 'वह क्या है, जिसे सूरज-चाँद भी नहीं देख सकते ?' बारी-बारी सबसे प्रश्न पूछा गया । सभी दरबारियों ने अपनी-अपनी तरह उत्तर दिए । किसी ने बताया खुदा, किसी ने भगवान तो किसी ने रूह । बादशाह, किसी के उत्तर से संतुष्ट नहीं हो सके । सभी के उत्तर गलत थे । अंत में बीरबल से पूछा गया । वह विनम्रता के साथ बोले, जिसे सूरज और चाँद नहीं देख सकते हैं वह चीज है, अंधकार । बादशाह प्रसन्नता से खिल उठे । उत्तर सही था ।
    0 Comments 0 Shares 310 Views 0 Reviews
  • एक दिन बादशाह ने बीरबल से पूछा, पान सड़े, घोड़े अड़े, विद्या बिसर जाए, अंगारों पर रोटी जले, बताओ कोई उपाय, अर्थात पान क्यों सड़ता है, घोडा क्यों अड़ता है, विद्या कैसे लोप हो जाती है, अंगारे पर रोटी क्यों जलती है ?

    इसका उत्तर सिर्फ तीन शब्दों में बताओ । बीरबल तुरन्त उत्तर दिया, फेरा नहीं था । बादशाह, साफ-साफ बताओं ।

    बीरबल बोले, जहाँपनाह ! पान न फेरने से सड़ जाता है । घोड़ा फेरे बिना अड़ियल हो जाता है । बिना दोहराए विद्या लॉप हो जाती है । अंगारों पर फेरे बिना रोटी जलकर राख हो जाती है ।

    एक दिन बादशाह ने बीरबल से पूछा, पान सड़े, घोड़े अड़े, विद्या बिसर जाए, अंगारों पर रोटी जले, बताओ कोई उपाय, अर्थात पान क्यों सड़ता है, घोडा क्यों अड़ता है, विद्या कैसे लोप हो जाती है, अंगारे पर रोटी क्यों जलती है ? इसका उत्तर सिर्फ तीन शब्दों में बताओ । बीरबल तुरन्त उत्तर दिया, फेरा नहीं था । बादशाह, साफ-साफ बताओं । बीरबल बोले, जहाँपनाह ! पान न फेरने से सड़ जाता है । घोड़ा फेरे बिना अड़ियल हो जाता है । बिना दोहराए विद्या लॉप हो जाती है । अंगारों पर फेरे बिना रोटी जलकर राख हो जाती है ।
    0 Comments 0 Shares 313 Views 0 Reviews
  • एक आदमी सुबह को समुद्र के किनारे टहल रहा था । उसने देखा कि लहरों के साथ सैकड़ों स्टार मछलियाँ तट पर आ जाती हैं, जब

    लहरे पीछे जाती हैं तो मछलियाँ किनारे पर ही जाती हैं और धूप से मर जाती

    हैं । लहरें उसी समय लौटी थी और स्टार मछलियाँ अभी जीवित थी । वह आदमी कुछ कदम आगे बढ़ा, उसने एक मछली उठाई और पानी में फेंक दी । वह ऐसा बार-बार करता रहा । उस आदमी के ठीक पीछे एक और आदमी था, जो यह नहीं समझ पा रहा था कि वह क्या कर रहा है । वह उसके पास आया और पूछा तुम क्या कर रहे हो ? यहाँ तो सैकड़ों स्टार मछलियाँ हैं । तुम कितनें को बचा सकोगे ?तुम्हारे ऐसा करने से क्या फर्क पड़ेगा ? उस आदमी ने कोई जवाब नहीं दिया, दो कदम आगे बढ़कर उसने एक और मछली को

    उठाकर पानी में फेंक दिया और बोला, इससे इस एक मछली को तो फर्क पड़ता है । हम कौन-सा फर्क डाल रहे हैं ? बड़ा या छोटा, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता । अगर सब थोड़ा-थोड़ा फर्क लाएँ तो बहुत बड़ा फर्क पड़ेगा ।

    एक आदमी सुबह को समुद्र के किनारे टहल रहा था । उसने देखा कि लहरों के साथ सैकड़ों स्टार मछलियाँ तट पर आ जाती हैं, जब लहरे पीछे जाती हैं तो मछलियाँ किनारे पर ही जाती हैं और धूप से मर जाती हैं । लहरें उसी समय लौटी थी और स्टार मछलियाँ अभी जीवित थी । वह आदमी कुछ कदम आगे बढ़ा, उसने एक मछली उठाई और पानी में फेंक दी । वह ऐसा बार-बार करता रहा । उस आदमी के ठीक पीछे एक और आदमी था, जो यह नहीं समझ पा रहा था कि वह क्या कर रहा है । वह उसके पास आया और पूछा तुम क्या कर रहे हो ? यहाँ तो सैकड़ों स्टार मछलियाँ हैं । तुम कितनें को बचा सकोगे ?तुम्हारे ऐसा करने से क्या फर्क पड़ेगा ? उस आदमी ने कोई जवाब नहीं दिया, दो कदम आगे बढ़कर उसने एक और मछली को उठाकर पानी में फेंक दिया और बोला, इससे इस एक मछली को तो फर्क पड़ता है । हम कौन-सा फर्क डाल रहे हैं ? बड़ा या छोटा, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता । अगर सब थोड़ा-थोड़ा फर्क लाएँ तो बहुत बड़ा फर्क पड़ेगा ।
    0 Comments 0 Shares 30 Views 0 Reviews
  • हर अंधेरे मोड़ पर रोशनी का इम्तिहान होता है,

    गिरकर संभलना ही इंसान की पहचान होता है।

    थाम लो हौसले को जब भी लगे राह कठिन,

    क्योंकि हर मुश्किल के बाद ही नया आसमान होता है…✨


    =============== END ===============


    #HindiShayari, #MotivationalShayari, #LifeQuotesHindi, #InspirationDaily, #PositiveVibesOnly, #StayMotivated, #SelfGrowthJourney, #MindsetMatters, #SuccessMindset, #DailyInspiration, #HopeAndStrength, #NeverGiveUp, #InnerStrength, #LifeMotivation, #WordsOfWisdom, #EmotionalHealing, #GrowthMindset, #BelieveInYourself, #MotivationForLife, #InspirationalWords

    हर अंधेरे मोड़ पर रोशनी का इम्तिहान होता है, गिरकर संभलना ही इंसान की पहचान होता है। थाम लो हौसले को जब भी लगे राह कठिन, क्योंकि हर मुश्किल के बाद ही नया आसमान होता है…✨=============== END =============== #HindiShayari, #MotivationalShayari, #LifeQuotesHindi, #InspirationDaily, #PositiveVibesOnly, #StayMotivated, #SelfGrowthJourney, #MindsetMatters, #SuccessMindset, #DailyInspiration, #HopeAndStrength, #NeverGiveUp, #InnerStrength, #LifeMotivation, #WordsOfWisdom, #EmotionalHealing, #GrowthMindset, #BelieveInYourself, #MotivationForLife, #InspirationalWords
    0 Comments 0 Shares 241 Views 0 Reviews
More Results
Talkfever - Growing worldwide https://talkfever.com