Mise à niveau vers Pro

  • https://manchestersuites.in/hotel-rooms-in-coimbatore.php
    https://manchestersuites.in/hotel-rooms-in-coimbatore.php
    MANCHESTERSUITES.IN
    Hotel Rooms in Coimbatore | Hotel Near KMCH Hospital
    Manchester Suites offers premium hotel rooms in Coimbatore, a comfortable hotel near Broadway Mall Coimbatore with modern amenities and easy city access.
    1
    1 Commentaires ·852 Vue ·0 Aperçu
  • Step into the world of medieval & dark fantasy cosplay at Wales Comic Con ⚔️🔥 Discover stunning leather armor, cloaks, and gothic-inspired outfits that bring fantasy to life. Get inspired by the best looks from this iconic event and level up your next cosplay.

    🔗 https://creedleather.com/blogs/events-cons-fairs/wales-comic-con-best-medieval-dark-fantasy-costumes

    #WalesComicCon #DarkFantasy #CosplayInspo #MedievalStyle #LARP #FantasyFashion #GeekCulture
    Step into the world of medieval & dark fantasy cosplay at Wales Comic Con ⚔️🔥 Discover stunning leather armor, cloaks, and gothic-inspired outfits that bring fantasy to life. Get inspired by the best looks from this iconic event and level up your next cosplay. 🔗 https://creedleather.com/blogs/events-cons-fairs/wales-comic-con-best-medieval-dark-fantasy-costumes #WalesComicCon #DarkFantasy #CosplayInspo #MedievalStyle #LARP #FantasyFashion #GeekCulture
    CREEDLEATHER.COM
    Wales Comic Con 2026: Best Medieval & Dark Fantasy Costumes to Wear
    Discover the best medieval and dark fantasy costumes for Wales Comic Con 2026, plus cosplay tips, outfit ideas, and styling inspiration.
    1
    ·387 Vue ·0 Aperçu
  • PCD Pharma Franchise - Plenumbiotech

    Plenumbiotech offers a trusted and growth-oriented PCD Pharma Franchise opportunity across India. The company provides a wide range of high-quality pharmaceutical products, including tablets, capsules, syrups, injections, and nutraceuticals, manufactured under strict quality standards. Franchise partners benefit from monopoly rights, attractive profit margins, promotional support, and timely product delivery. Plenumbiotech focuses on innovation, affordability, and compliance, helping partners build a strong market presence. With ethical business practices, competitive pricing, and consistent support, Plenumbiotech is an ideal choice for entrepreneurs looking to succeed in the pharmaceutical industry.
    https://www.plenumbiotech.com/plenum-biotech-services/pcd-pharma-franchise/
    PCD Pharma Franchise - Plenumbiotech Plenumbiotech offers a trusted and growth-oriented PCD Pharma Franchise opportunity across India. The company provides a wide range of high-quality pharmaceutical products, including tablets, capsules, syrups, injections, and nutraceuticals, manufactured under strict quality standards. Franchise partners benefit from monopoly rights, attractive profit margins, promotional support, and timely product delivery. Plenumbiotech focuses on innovation, affordability, and compliance, helping partners build a strong market presence. With ethical business practices, competitive pricing, and consistent support, Plenumbiotech is an ideal choice for entrepreneurs looking to succeed in the pharmaceutical industry. https://www.plenumbiotech.com/plenum-biotech-services/pcd-pharma-franchise/
    WWW.PLENUMBIOTECH.COM
    PCD Pharma Franchise
    Plenum Biotech a top leading PCD Pharma Franchise Company in India offering 2500+ best quality products at affordable price..
    ·506 Vue ·0 Aperçu
  • मटके में क्या है?

    एक बार सुदूर गाँव से एक विद्वान् अकबर के दरबार में आया।

    उसने अपनी विद्वता की खूब तारीफ़ की।

    उसने राजा से पूछा कि क्या उसके दरबारी विद्वान हैं और उसकी चुनौती को स्वीकार कर सकते हैं?" अकबर ने

    चुनौती स्वीकार कर ली और उस विद्वान् को अगले दिन आने के लिए कहा।

    अगले दिन दरबार सजा

    हुआ था। बादशाह अपने दरबारियों के साथ बैठे थे।

    तभी विद्वान आया।

    उसने घोषणा की, “यह एक मटका है, जो कपड़े से ढंका हुआ है। यदि आप में

    से कोई भी यह बता देगा कि इसके भीतर क्या है?

    तो मैं अपनी हार स्वीकार कर लूँगा।"

    किसी भी दरबारी का कुछ भी कहने का साहस नहीं हुआ।

    मटके के भीतर क्या है यह उनकी कल्पना से परे था।

    तब बीरबल उठा, आगे बढ़ा, मटके को खोलकर भीतर झाँका और बोला, “मटके में कुछ भी नहीं है।

    वह खाली है।" विद्वान् चिल्लाया, “तुमने धोखा किया है, तुमने मटके को खोल दिया है।"

    बीरबल ने कहा, "किन्तु श्रीमान्, आपने यह तो नहीं कहा था कि मटके को खोलना नहीं है।

    " विद्वान् ने बीरबल की समझदारी का लोहा मान लिया।

    उसने बादशाह के सामने सिर झुकाया और चला गया।
    मटके में क्या है? एक बार सुदूर गाँव से एक विद्वान् अकबर के दरबार में आया। उसने अपनी विद्वता की खूब तारीफ़ की। उसने राजा से पूछा कि क्या उसके दरबारी विद्वान हैं और उसकी चुनौती को स्वीकार कर सकते हैं?" अकबर ने चुनौती स्वीकार कर ली और उस विद्वान् को अगले दिन आने के लिए कहा। अगले दिन दरबार सजा हुआ था। बादशाह अपने दरबारियों के साथ बैठे थे। तभी विद्वान आया। उसने घोषणा की, “यह एक मटका है, जो कपड़े से ढंका हुआ है। यदि आप में से कोई भी यह बता देगा कि इसके भीतर क्या है? तो मैं अपनी हार स्वीकार कर लूँगा।" किसी भी दरबारी का कुछ भी कहने का साहस नहीं हुआ। मटके के भीतर क्या है यह उनकी कल्पना से परे था। तब बीरबल उठा, आगे बढ़ा, मटके को खोलकर भीतर झाँका और बोला, “मटके में कुछ भी नहीं है। वह खाली है।" विद्वान् चिल्लाया, “तुमने धोखा किया है, तुमने मटके को खोल दिया है।" बीरबल ने कहा, "किन्तु श्रीमान्, आपने यह तो नहीं कहा था कि मटके को खोलना नहीं है। " विद्वान् ने बीरबल की समझदारी का लोहा मान लिया। उसने बादशाह के सामने सिर झुकाया और चला गया।
    1
    ·128 Vue ·0 Aperçu
  • लालची कुम्हार

    एक बार एक धोबी के गधे ने पड़ोस में रहने वाले कुम्हार के बनाए हुए बर्तन तोड़ दिए।

    हालांकि धोबी ने गधे से हुए नुकसान की भरपाई कर दी थी पर कुम्हार असंतुष्ट था।

    उसने धोबी को परेशान करने की एक योजना बनाई।

    राजा अकबर के पास जाकर उसने कहा, “मेरे रिश्तेदार कहते हैं कि उनके यहाँ सफ़ेद हाथी हैं।”

    यह सुनकर अकबर को बहुत आश्चर्य हुआ।

    उसने अपने सभी हाथियों को अच्छी तरह से साफ़ करने की आज्ञा दी।

    यह कार्य धोबी को सौंपा गया।

    धोबी कितना भी हाथियों को साफ़ करता, रगड़ता, वे स्याह ही रहते।

    वह डर गया और राजा के भय से बीरबल के पास सहायता माँगने गया।

    बीरबल ने उसे एक उपाय सुझाया।

    धोबी ने राजा से कहा, “महाराज! हाथियों को नहलाकर सफ़ेद करने के लिए आप कुम्हार से एक बड़ा-सा हौदा बनवा दीजिए।"

    अकबर ने तुरंत कुम्हार को एक बड़ा-सा गया।

    हौदा, हाथियों को नहलाने के लिए, बनाने की आज्ञा दी।

    हौदा बना पर हाथी के उसमें जाते ही हौदा टूट कुम्हार को और मज़बूत हौदा बनाने का आदेश दिया पर वह भी टूट गया।

    कुम्हार ने अपना सिर पीट लिया।

    धोबी को परेशान करने की इच्छा उसे बहुत भारी पड़ रही थी।

    उसने धोबी से क्षमा माँगी।
    लालची कुम्हार एक बार एक धोबी के गधे ने पड़ोस में रहने वाले कुम्हार के बनाए हुए बर्तन तोड़ दिए। हालांकि धोबी ने गधे से हुए नुकसान की भरपाई कर दी थी पर कुम्हार असंतुष्ट था। उसने धोबी को परेशान करने की एक योजना बनाई। राजा अकबर के पास जाकर उसने कहा, “मेरे रिश्तेदार कहते हैं कि उनके यहाँ सफ़ेद हाथी हैं।” यह सुनकर अकबर को बहुत आश्चर्य हुआ। उसने अपने सभी हाथियों को अच्छी तरह से साफ़ करने की आज्ञा दी। यह कार्य धोबी को सौंपा गया। धोबी कितना भी हाथियों को साफ़ करता, रगड़ता, वे स्याह ही रहते। वह डर गया और राजा के भय से बीरबल के पास सहायता माँगने गया। बीरबल ने उसे एक उपाय सुझाया। धोबी ने राजा से कहा, “महाराज! हाथियों को नहलाकर सफ़ेद करने के लिए आप कुम्हार से एक बड़ा-सा हौदा बनवा दीजिए।" अकबर ने तुरंत कुम्हार को एक बड़ा-सा गया। हौदा, हाथियों को नहलाने के लिए, बनाने की आज्ञा दी। हौदा बना पर हाथी के उसमें जाते ही हौदा टूट कुम्हार को और मज़बूत हौदा बनाने का आदेश दिया पर वह भी टूट गया। कुम्हार ने अपना सिर पीट लिया। धोबी को परेशान करने की इच्छा उसे बहुत भारी पड़ रही थी। उसने धोबी से क्षमा माँगी।
    1
    ·133 Vue ·0 Aperçu
  • दिव्य खरगोश

    एक बार एक शिकारी रंगीन खरगोश लेकर बादशाह के दरबार में उपस्थित हुआ।

    उसने अकबर से कहा, "महाराज! कल मुझे जंगल में यह रंगीन खरगोश मिला था।

    मेरे बड़े दादा ने बताया कि यह

    खरगोश दिव्य शक्तियों से भरपूर है।

    उन्होंने इस खरगोश को आपको देने की सलाह

    दी जिससे आप इसका सही उपयोग कर सकें।"

    अकबर प्रसन्न

    हो गए पर बीरबल को कुछ शंका थी।

    बीरबल ने कहा,

    'श्रीमान्! यह खरगोश सीधा जंगल से आ रहा है, धूल

    से सना होगा। कृपया शिकारी से कहें कि वह उसे स्नान करा दे और फिर उसे पुरस्कृत भी किया जाएगा।"

    बीरबल की बातें सुनकर शिकारी भयभीत हो उठा।

    पर वह राजा की आज्ञा की अवहेलना न कर सका।

    सेवक एक बड़े से पात्र में पानी भरकर लाए।

    ज्यों-ही शिकारी ने खरगोश को नहलाना प्रारम्भ किया, सारा रंग पानी में घुल कर निकल गया।

    खरगोश अब पूरी तरह सफेद हो चुका था।

    बीरबल ने कहा, “इस व्यक्ति ने पुरस्कार के लोभ में खरगोश को रंग दिया था।

    वस्तुतः वह आपको धोखा दे रहा था ।

    " क्रुद्ध अकबर ने शिकारी को दण्ड दिया।
    दिव्य खरगोश एक बार एक शिकारी रंगीन खरगोश लेकर बादशाह के दरबार में उपस्थित हुआ। उसने अकबर से कहा, "महाराज! कल मुझे जंगल में यह रंगीन खरगोश मिला था। मेरे बड़े दादा ने बताया कि यह खरगोश दिव्य शक्तियों से भरपूर है। उन्होंने इस खरगोश को आपको देने की सलाह दी जिससे आप इसका सही उपयोग कर सकें।" अकबर प्रसन्न हो गए पर बीरबल को कुछ शंका थी। बीरबल ने कहा, 'श्रीमान्! यह खरगोश सीधा जंगल से आ रहा है, धूल से सना होगा। कृपया शिकारी से कहें कि वह उसे स्नान करा दे और फिर उसे पुरस्कृत भी किया जाएगा।" बीरबल की बातें सुनकर शिकारी भयभीत हो उठा। पर वह राजा की आज्ञा की अवहेलना न कर सका। सेवक एक बड़े से पात्र में पानी भरकर लाए। ज्यों-ही शिकारी ने खरगोश को नहलाना प्रारम्भ किया, सारा रंग पानी में घुल कर निकल गया। खरगोश अब पूरी तरह सफेद हो चुका था। बीरबल ने कहा, “इस व्यक्ति ने पुरस्कार के लोभ में खरगोश को रंग दिया था। वस्तुतः वह आपको धोखा दे रहा था । " क्रुद्ध अकबर ने शिकारी को दण्ड दिया।
    1
    ·136 Vue ·0 Aperçu
  • एक कठिन प्रश्न

    एक बार अकबर के दरबार में एक विद्वान् आया।

    उसकी इच्छा अपनी विद्वता सिद्ध कर राजा से पुरस्कार पाने की थी।

    उसने कहा, “मैंने बहुत ज्ञानार्जन किया है।

    यहाँ उपस्थित सभी लोगों से मैं अधिक ज्ञानी हूँ।

    आप मुझसे कुछ भी प्रश्न पूछ सकते हैं और मैं बदले में आपसे कुछ प्रश्न करूँगा।

    क्या किसी को मेरी चुनौती स्वीकार है?”

    अकबर ने पल भर कुछ सोचा।

    उस समय बीरबल दरबार में उपस्थित नहीं था।

    एक दूत भेजकर तुरंत अकबर ने बीरबल को बुलवाया।

    बीरबल के दरबार में आते ही अकबर ने उसे उस विद्वान् की बात बताई।

    बीरबल ने उसकी चुनौती स्वीकार कर ली।

    विद्वान् ने कहा, “मैं आपसे सौ सरल प्रश्न पूछूं या एक कठिन प्रश्न?”

    बीरबल ने उत्तर दिया, “कृपया आप एक कठिन प्रश्न पूछें।”

    विद्वान् ने पूछा, “पहले मुर्गी आई या अंडा?"

    बीरबल ने उत्तर दिया, “मुर्गी।”

    आश्चर्यचकित विद्वान् ने पूछा, “ओह! पर आपको इसका पता कैसे चला?"

    बीरबल ने कहा, “आपको एक

    प्रश्न पूछना था, आप दूसरा प्रश्न क्यों पूछ रहे हैं?

    " विद्वान् ने तुरंत समझ लिया कि बीरबल अत्यंत चतुर उसने अपनी हार स्वीकार कर ली।
    एक कठिन प्रश्न एक बार अकबर के दरबार में एक विद्वान् आया। उसकी इच्छा अपनी विद्वता सिद्ध कर राजा से पुरस्कार पाने की थी। उसने कहा, “मैंने बहुत ज्ञानार्जन किया है। यहाँ उपस्थित सभी लोगों से मैं अधिक ज्ञानी हूँ। आप मुझसे कुछ भी प्रश्न पूछ सकते हैं और मैं बदले में आपसे कुछ प्रश्न करूँगा। क्या किसी को मेरी चुनौती स्वीकार है?” अकबर ने पल भर कुछ सोचा। उस समय बीरबल दरबार में उपस्थित नहीं था। एक दूत भेजकर तुरंत अकबर ने बीरबल को बुलवाया। बीरबल के दरबार में आते ही अकबर ने उसे उस विद्वान् की बात बताई। बीरबल ने उसकी चुनौती स्वीकार कर ली। विद्वान् ने कहा, “मैं आपसे सौ सरल प्रश्न पूछूं या एक कठिन प्रश्न?” बीरबल ने उत्तर दिया, “कृपया आप एक कठिन प्रश्न पूछें।” विद्वान् ने पूछा, “पहले मुर्गी आई या अंडा?" बीरबल ने उत्तर दिया, “मुर्गी।” आश्चर्यचकित विद्वान् ने पूछा, “ओह! पर आपको इसका पता कैसे चला?" बीरबल ने कहा, “आपको एक प्रश्न पूछना था, आप दूसरा प्रश्न क्यों पूछ रहे हैं? " विद्वान् ने तुरंत समझ लिया कि बीरबल अत्यंत चतुर उसने अपनी हार स्वीकार कर ली।
    1
    ·129 Vue ·0 Aperçu
  • मूँगफली और उसके छिलके

    एक दिन एक किसान ने अपने खेत की मूँगफली बादशाह अकबर को लाकर दी।

    शाही रसोइए ने उन्हें छिलके सहित उबाला और शाही बगीचे में बैठे बादशाह और उनकी रानी को खाने के

    लिए दी। रानी अकबर से दिल्लगी करना चाहती थी।

    वह मूँगफली छीलकर दाना

    रखती जाती और छिलके अकबर की ओर डालती जाती।

    अकबर

    के सेवकों ने दूर से यह देखकर सोचा कि राजा ने सारी मूँगफली खाई है

    और रानी ने तो कुछ खाई ही नहीं है।

    इसी बीच बीरबल वहाँ आया।

    उसने राजा-रानी का अभिवादन किया।

    रानी ने बीरबल को भी मूँगफली खाने के लिए कहा।

    बीरबल के बैठते ही रानी ने कहा, “देखो, बीरबल, बादशाह ने कितनी सारी स्वादिष्ट मूँगफलियाँ खाई हैं...

    देखो, छिलकों का “हाँ, मुझे पहाड़ बन गया है।"

    बीरबल ने कहा, पता है कि वे अत्यंत सुस्वादु हैं।

    महारानी जी, वे इतनी स्वादिष्ट हैं कि आपने छिलके भी खा लिए ।

    " बीरबल के चतुरतापूर्ण उत्तर पर अकबर रानी के साथ ठहाका मारकर हँस पड़े।
    मूँगफली और उसके छिलके एक दिन एक किसान ने अपने खेत की मूँगफली बादशाह अकबर को लाकर दी। शाही रसोइए ने उन्हें छिलके सहित उबाला और शाही बगीचे में बैठे बादशाह और उनकी रानी को खाने के लिए दी। रानी अकबर से दिल्लगी करना चाहती थी। वह मूँगफली छीलकर दाना रखती जाती और छिलके अकबर की ओर डालती जाती। अकबर के सेवकों ने दूर से यह देखकर सोचा कि राजा ने सारी मूँगफली खाई है और रानी ने तो कुछ खाई ही नहीं है। इसी बीच बीरबल वहाँ आया। उसने राजा-रानी का अभिवादन किया। रानी ने बीरबल को भी मूँगफली खाने के लिए कहा। बीरबल के बैठते ही रानी ने कहा, “देखो, बीरबल, बादशाह ने कितनी सारी स्वादिष्ट मूँगफलियाँ खाई हैं... देखो, छिलकों का “हाँ, मुझे पहाड़ बन गया है।" बीरबल ने कहा, पता है कि वे अत्यंत सुस्वादु हैं। महारानी जी, वे इतनी स्वादिष्ट हैं कि आपने छिलके भी खा लिए । " बीरबल के चतुरतापूर्ण उत्तर पर अकबर रानी के साथ ठहाका मारकर हँस पड़े।
    1
    ·155 Vue ·0 Aperçu
  • Construct Your Own Scalable Cryptocurrency Exchange with a Binance Clone Script
    Binance is considered by many to be the ‘gold standard’ of the cryptocurrency exchange industry. By using the Binance clone script, you can quickly and affordably launch your own customized cryptocurrency exchange that looks and functions just like Binance with state-of-the-art security features. The binance clone script offers complete flexibility and provides a branded experience for each trader on your exchange via customization options. In addition to trading options such as spot, futures and margin, the script includes a built-in wallet system as well as support for two-factor authentication providing robust security features for all users.
    For more details:https://www.clarisco.com/binance-clone-script
    Construct Your Own Scalable Cryptocurrency Exchange with a Binance Clone Script Binance is considered by many to be the ‘gold standard’ of the cryptocurrency exchange industry. By using the Binance clone script, you can quickly and affordably launch your own customized cryptocurrency exchange that looks and functions just like Binance with state-of-the-art security features. The binance clone script offers complete flexibility and provides a branded experience for each trader on your exchange via customization options. In addition to trading options such as spot, futures and margin, the script includes a built-in wallet system as well as support for two-factor authentication providing robust security features for all users. For more details:https://www.clarisco.com/binance-clone-script
    ·310 Vue ·0 Aperçu
  • अशुभ चेहरा

    एक बार की बात है अकबर ने एक गरीब ब्राह्मण के विषय सुना।

    लोगों का विश्वास था कि सुबह-सुबह उसका चेहरा देख लेने से उनका दिन दुर्भाग्यपूर्ण हो जाता है।

    सच का पता लगाने के लिए अकबर ने ब्राह्मण को महल में रात बिताने के लिए बुलाया।

    सुबह-सुबह उठते ही अकबर के भोजन करते समय उसकी कुर्सी टूट गई और वह गिर पड़ा।

    तब अकबर को सुबह-सुबह ब्राह्मण का चेहरा देखना याद आया।

    अकबर ने तुरंत ब्राह्मण को फाँसी की सजा दे दी।

    बीरबल को इस बात का पता चला।

    उसने ब्राह्मण से कहा कि वह उसके सुझाए अनुसा

    र ही करे।

    फाँसी से पहले ब्राह्मण की अंतिम इच्छा पूछी गई।

    ब्राह्मण ने अकबर से बात करने की इच्छा जताई।

    अकबर आया। ब्राह्मण ने कहा, "हे महाराज!

    आपने मेरा चेहरा देखा तो आप का दोपहर का भोजन छूटा, किन्तु आपका चेहरा देखने से मेरा तो जीवन ही छूट रहा है।"

    अकबर को अपनी मूर्खता समझ

    में आ गई। उसने ब्राह्मण को बुलवाकर उससे क्षमा-याचना की तथा सिक्कों से भरा थैला उसे उपहार में दिया।
    अशुभ चेहरा एक बार की बात है अकबर ने एक गरीब ब्राह्मण के विषय सुना। लोगों का विश्वास था कि सुबह-सुबह उसका चेहरा देख लेने से उनका दिन दुर्भाग्यपूर्ण हो जाता है। सच का पता लगाने के लिए अकबर ने ब्राह्मण को महल में रात बिताने के लिए बुलाया। सुबह-सुबह उठते ही अकबर के भोजन करते समय उसकी कुर्सी टूट गई और वह गिर पड़ा। तब अकबर को सुबह-सुबह ब्राह्मण का चेहरा देखना याद आया। अकबर ने तुरंत ब्राह्मण को फाँसी की सजा दे दी। बीरबल को इस बात का पता चला। उसने ब्राह्मण से कहा कि वह उसके सुझाए अनुसा र ही करे। फाँसी से पहले ब्राह्मण की अंतिम इच्छा पूछी गई। ब्राह्मण ने अकबर से बात करने की इच्छा जताई। अकबर आया। ब्राह्मण ने कहा, "हे महाराज! आपने मेरा चेहरा देखा तो आप का दोपहर का भोजन छूटा, किन्तु आपका चेहरा देखने से मेरा तो जीवन ही छूट रहा है।" अकबर को अपनी मूर्खता समझ में आ गई। उसने ब्राह्मण को बुलवाकर उससे क्षमा-याचना की तथा सिक्कों से भरा थैला उसे उपहार में दिया।
    1
    ·141 Vue ·0 Aperçu
  • छद्म वेष में बादशाह

    अकबर अपने राज्य के गाँवों में अकसर रूप बदलकर घूमा करते थे।

    बीरबल ने कई बार उन्हें सचेत करते हुए अपने साथ सैनिक ले जाने के लिए कहा था पर अकबर अपनी जिद से अकेले ही जाया करते थे।

    एक बार इसी तरह एक साधारण ग्रामीण के रूप में अकबर घूम रहे थे।

    तभी एक दाढ़ी वाले आदमी ने आकर उन्हें रोका और कहा, “तुम कौन हो?

    हमारे गाँव में क्या कर रहे हो?"

    अकबर ने उत्तर दिया,

    'ओह! मैं एक बंजारा हूँ.. छोटे-मोटे काम करके पैसा कमाता हूँ। मुझे

    जहाँ भी चाहूँ रहने का अधिकार है।"

    उस व्यक्ति ने कहा, “अरे हाँ, तुम जहाँ चाहे रह सकते हो किन्तु तुम्हारे हाथ में यह राजा की अँगूठी कैसे और क्यों है?

    क्या तुमने चुराई है?"

    यह कहकर उस दाढ़ी वाले ने अकबर के हाथ से अँगूठी खींची और भाग खड़ा हुआ।

    अगले दिन अकबर ने अपने दरबारियों को उस दाढ़ी वाले के विषय में बताकर सारा किस्सा सुनाया।

    अँगूठी छीने जाने की बात भी बताई।

    तभी बीरबल ने खड़े होकर कहा, “क्षमा करें महाराज !

    मैं ही वह दाढ़ी वाला व्यक्ति था।

    सिपाहियों के बिना अकेले जाने से आने वाली परेशानियों से मैं आपको अवगत करवाना चाहता था।"

    उस दिन के बाद से अकबर ने बीरबल की सलाह माननी शुरू कर दी।
    छद्म वेष में बादशाह अकबर अपने राज्य के गाँवों में अकसर रूप बदलकर घूमा करते थे। बीरबल ने कई बार उन्हें सचेत करते हुए अपने साथ सैनिक ले जाने के लिए कहा था पर अकबर अपनी जिद से अकेले ही जाया करते थे। एक बार इसी तरह एक साधारण ग्रामीण के रूप में अकबर घूम रहे थे। तभी एक दाढ़ी वाले आदमी ने आकर उन्हें रोका और कहा, “तुम कौन हो? हमारे गाँव में क्या कर रहे हो?" अकबर ने उत्तर दिया, 'ओह! मैं एक बंजारा हूँ.. छोटे-मोटे काम करके पैसा कमाता हूँ। मुझे जहाँ भी चाहूँ रहने का अधिकार है।" उस व्यक्ति ने कहा, “अरे हाँ, तुम जहाँ चाहे रह सकते हो किन्तु तुम्हारे हाथ में यह राजा की अँगूठी कैसे और क्यों है? क्या तुमने चुराई है?" यह कहकर उस दाढ़ी वाले ने अकबर के हाथ से अँगूठी खींची और भाग खड़ा हुआ। अगले दिन अकबर ने अपने दरबारियों को उस दाढ़ी वाले के विषय में बताकर सारा किस्सा सुनाया। अँगूठी छीने जाने की बात भी बताई। तभी बीरबल ने खड़े होकर कहा, “क्षमा करें महाराज ! मैं ही वह दाढ़ी वाला व्यक्ति था। सिपाहियों के बिना अकेले जाने से आने वाली परेशानियों से मैं आपको अवगत करवाना चाहता था।" उस दिन के बाद से अकबर ने बीरबल की सलाह माननी शुरू कर दी।
    1
    ·124 Vue ·0 Aperçu
Talkfever - Growing worldwide https://talkfever.com