🏞️🏞️🏰 कुंभलगढ़ का ऐतिहासिक घेराव (1576–1578): एक भौगोलिक और रणनीतिक ka विश्लेषण
मेवाड़ की आन-बान-शान और 'भारत की महान दीवार' (Great Wall of India) के रूप में प्रसिद्ध कुंभलगढ़ दुर्ग का यह 3D टोपोग्राफिक मानचित्र उस कठिन समय को दर्शाता है जब मुगलों ने इसे घेर लिया था।
🔍 इस मानचित्र में क्या खास है?
यह दृश्य 1578 ई. के उस मंज़र को पुनर्जीवित करता है जब मुगल सेनापति शाहबाज़ खान ने अरावली की दुर्गम पहाड़ियों में तोपखाने (Artillery) और घेराबंदी का जाल बिछाया था।
⚔️ इतिहास के पन्नों से:
हल्दीघाटी के युद्ध (1576) के बाद, महाराणा प्रताप ने कुंभलगढ़ को अपना केंद्र बनाया। अकबर ने किले पर कब्ज़ा करने के लिए शाहबाज़ खान को भेजा।
• अभेद्य सुरक्षा: 36 किलोमीटर लंबी दीवार और खड़ी चट्टानें इसे अभेद्य बनाती थीं।
• संघर्ष: मुगलों को भी इस किले को जीतने के लिए भीषण संघर्ष करना पड़ा। अंततः, किले के अंदर पीने के पानी के स्रोत में समस्या (या विश्वासघात) के कारण ही इसे एक बार के लिए जीता जा सका।
🗺️ भौगोलिक चुनौती:
नक्शे में देखें कि कैसे अरावली की ऊबड़-खाबड़ चोटियों ने एक प्राकृतिक रक्षा कवच का काम किया, लेकिन मुगल तोपखाने ने नीचे की घाटियों से ऊंचाई का लाभ उठाने की कोशिश की।
यह केवल एक किला नहीं, बल्कि राजपूताना शौर्य और वास्तुशिल्प का एक बेजोड़ नमूना है! ❤️🙏
👇 अपने विचार कमेंट में जरूर लिखें - क्या आप कभी कुंभलगढ़ गए हैं?
मेवाड़ की आन-बान-शान और 'भारत की महान दीवार' (Great Wall of India) के रूप में प्रसिद्ध कुंभलगढ़ दुर्ग का यह 3D टोपोग्राफिक मानचित्र उस कठिन समय को दर्शाता है जब मुगलों ने इसे घेर लिया था।
🔍 इस मानचित्र में क्या खास है?
यह दृश्य 1578 ई. के उस मंज़र को पुनर्जीवित करता है जब मुगल सेनापति शाहबाज़ खान ने अरावली की दुर्गम पहाड़ियों में तोपखाने (Artillery) और घेराबंदी का जाल बिछाया था।
⚔️ इतिहास के पन्नों से:
हल्दीघाटी के युद्ध (1576) के बाद, महाराणा प्रताप ने कुंभलगढ़ को अपना केंद्र बनाया। अकबर ने किले पर कब्ज़ा करने के लिए शाहबाज़ खान को भेजा।
• अभेद्य सुरक्षा: 36 किलोमीटर लंबी दीवार और खड़ी चट्टानें इसे अभेद्य बनाती थीं।
• संघर्ष: मुगलों को भी इस किले को जीतने के लिए भीषण संघर्ष करना पड़ा। अंततः, किले के अंदर पीने के पानी के स्रोत में समस्या (या विश्वासघात) के कारण ही इसे एक बार के लिए जीता जा सका।
🗺️ भौगोलिक चुनौती:
नक्शे में देखें कि कैसे अरावली की ऊबड़-खाबड़ चोटियों ने एक प्राकृतिक रक्षा कवच का काम किया, लेकिन मुगल तोपखाने ने नीचे की घाटियों से ऊंचाई का लाभ उठाने की कोशिश की।
यह केवल एक किला नहीं, बल्कि राजपूताना शौर्य और वास्तुशिल्प का एक बेजोड़ नमूना है! ❤️🙏
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मेवाड़ की आन-बान-शान और 'भारत की महान दीवार' (Great Wall of India) के रूप में प्रसिद्ध कुंभलगढ़ दुर्ग का यह 3D टोपोग्राफिक मानचित्र उस कठिन समय को दर्शाता है जब मुगलों ने इसे घेर लिया था।
🔍 इस मानचित्र में क्या खास है?
यह दृश्य 1578 ई. के उस मंज़र को पुनर्जीवित करता है जब मुगल सेनापति शाहबाज़ खान ने अरावली की दुर्गम पहाड़ियों में तोपखाने (Artillery) और घेराबंदी का जाल बिछाया था।
⚔️ इतिहास के पन्नों से:
हल्दीघाटी के युद्ध (1576) के बाद, महाराणा प्रताप ने कुंभलगढ़ को अपना केंद्र बनाया। अकबर ने किले पर कब्ज़ा करने के लिए शाहबाज़ खान को भेजा।
• अभेद्य सुरक्षा: 36 किलोमीटर लंबी दीवार और खड़ी चट्टानें इसे अभेद्य बनाती थीं।
• संघर्ष: मुगलों को भी इस किले को जीतने के लिए भीषण संघर्ष करना पड़ा। अंततः, किले के अंदर पीने के पानी के स्रोत में समस्या (या विश्वासघात) के कारण ही इसे एक बार के लिए जीता जा सका।
🗺️ भौगोलिक चुनौती:
नक्शे में देखें कि कैसे अरावली की ऊबड़-खाबड़ चोटियों ने एक प्राकृतिक रक्षा कवच का काम किया, लेकिन मुगल तोपखाने ने नीचे की घाटियों से ऊंचाई का लाभ उठाने की कोशिश की।
यह केवल एक किला नहीं, बल्कि राजपूताना शौर्य और वास्तुशिल्प का एक बेजोड़ नमूना है! ❤️🙏
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