चीन और पाकिस्तान के बीच रक्षा सहयोग एक नए और खतरनाक स्तर पर पहुँच सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन अपना अत्याधुनिक J-35 (FC-31) फाइटर जेट पाकिस्तान को देने की तैयारी कर रहा है।
आइये समझते हैं कि यह भारत के लिए खतरे की घंटी क्यों है:-
अगर पाकिस्तान को J-35 मिल जाता है, तो तकनीकी तौर पर उसके पास दक्षिण एशिया का पहला 5वीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर होगा। भारत का 'राफेल' 4.5 पीढ़ी का है, जबकि J-35 5वीं पीढ़ी का है। स्टील्थ तकनीक के कारण J-35 रडार की पकड़ में आसानी से नहीं आता, जिससे पाकिस्तान को शुरुआती बढ़त मिल सकती है। वैसे भारत का एयर डिफेंस सिस्टम (जैसे S-400) बेहद मजबूत है, लेकिन एक स्टील्थ फाइटर को दूर से डिटेक्ट करना हमेशा एक चुनौती होती है। अगर यह पाकिस्तान को मिल जाता हैं तो वह भारतीय सीमा में घुसकर हमला करने और वापस लौटने की क्षमता दे सकता है। इससे भारत के मौजूदा 'एयर डोमिनेंस' (हवाई दबदबे) का संतुलन बिगड़ सकता है।
Two-Front War:
सबसे बड़ी चिंता यह है कि चीन (J-20/J-35) और पाकिस्तान (J-35) दोनों एक ही तरह के प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करेंगे।
• युद्ध की स्थिति में दोनों देशों के बीच डेटा शेयरिंग और तालमेल बहुत आसान हो जाएगा।
• यह भारत के लिए दो मोर्चों पर एक साथ लड़ना और मुश्किल बना देगा।
भारत की तैयारी क्या है?
भारत के पास भी इससे निपटने के विकल्प हैं:
•S-400: इसे विशेष रूप से स्टील्थ जेट्स को ट्रैक करने और मार गिराने के लिए ही बनाया गया है।
• AMCA: भारत अपना खुद का 5वीं पीढ़ी का फाइटर जेट (AMCA) बना रहा है, हालांकि इसमें अभी समय लगेगा।
• 🇫🇷 मेगा डील: खतरे को देखते हुए भारत फ्रांस के साथ 114 फाइटर जेट्स (MRFA) की डील कर रहा है, जिसमें सुपर राफेल F-5 शामिल हो सकते हैं।
पाकिस्तान को J-35 मिलना 'शक्ति संतुलन' (Balance of Power) को अस्थाई रूप से बिगाड़ सकता है, लेकिन भारतीय वायुसेना अपनी क्षमताओं को तेजी से अपग्रेड कर रही है।
आपको क्या लगता है?
क्या भारत को अपने AMCA प्रोजेक्ट में और तेजी लानी चाहिए या तुरंत राफेल की संख्या बढ़ानी चाहिए? कमेंट में अपनी राय दें!
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#PMModi #EmmanuelMacron #DefenseDeal
आइये समझते हैं कि यह भारत के लिए खतरे की घंटी क्यों है:-
अगर पाकिस्तान को J-35 मिल जाता है, तो तकनीकी तौर पर उसके पास दक्षिण एशिया का पहला 5वीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर होगा। भारत का 'राफेल' 4.5 पीढ़ी का है, जबकि J-35 5वीं पीढ़ी का है। स्टील्थ तकनीक के कारण J-35 रडार की पकड़ में आसानी से नहीं आता, जिससे पाकिस्तान को शुरुआती बढ़त मिल सकती है। वैसे भारत का एयर डिफेंस सिस्टम (जैसे S-400) बेहद मजबूत है, लेकिन एक स्टील्थ फाइटर को दूर से डिटेक्ट करना हमेशा एक चुनौती होती है। अगर यह पाकिस्तान को मिल जाता हैं तो वह भारतीय सीमा में घुसकर हमला करने और वापस लौटने की क्षमता दे सकता है। इससे भारत के मौजूदा 'एयर डोमिनेंस' (हवाई दबदबे) का संतुलन बिगड़ सकता है।
Two-Front War:
सबसे बड़ी चिंता यह है कि चीन (J-20/J-35) और पाकिस्तान (J-35) दोनों एक ही तरह के प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करेंगे।
• युद्ध की स्थिति में दोनों देशों के बीच डेटा शेयरिंग और तालमेल बहुत आसान हो जाएगा।
• यह भारत के लिए दो मोर्चों पर एक साथ लड़ना और मुश्किल बना देगा।
भारत की तैयारी क्या है?
भारत के पास भी इससे निपटने के विकल्प हैं:
•S-400: इसे विशेष रूप से स्टील्थ जेट्स को ट्रैक करने और मार गिराने के लिए ही बनाया गया है।
• AMCA: भारत अपना खुद का 5वीं पीढ़ी का फाइटर जेट (AMCA) बना रहा है, हालांकि इसमें अभी समय लगेगा।
• 🇫🇷 मेगा डील: खतरे को देखते हुए भारत फ्रांस के साथ 114 फाइटर जेट्स (MRFA) की डील कर रहा है, जिसमें सुपर राफेल F-5 शामिल हो सकते हैं।
पाकिस्तान को J-35 मिलना 'शक्ति संतुलन' (Balance of Power) को अस्थाई रूप से बिगाड़ सकता है, लेकिन भारतीय वायुसेना अपनी क्षमताओं को तेजी से अपग्रेड कर रही है।
आपको क्या लगता है?
क्या भारत को अपने AMCA प्रोजेक्ट में और तेजी लानी चाहिए या तुरंत राफेल की संख्या बढ़ानी चाहिए? कमेंट में अपनी राय दें!
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चीन और पाकिस्तान के बीच रक्षा सहयोग एक नए और खतरनाक स्तर पर पहुँच सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन अपना अत्याधुनिक J-35 (FC-31) फाइटर जेट पाकिस्तान को देने की तैयारी कर रहा है।
आइये समझते हैं कि यह भारत के लिए खतरे की घंटी क्यों है:-
अगर पाकिस्तान को J-35 मिल जाता है, तो तकनीकी तौर पर उसके पास दक्षिण एशिया का पहला 5वीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर होगा। भारत का 'राफेल' 4.5 पीढ़ी का है, जबकि J-35 5वीं पीढ़ी का है। स्टील्थ तकनीक के कारण J-35 रडार की पकड़ में आसानी से नहीं आता, जिससे पाकिस्तान को शुरुआती बढ़त मिल सकती है। वैसे भारत का एयर डिफेंस सिस्टम (जैसे S-400) बेहद मजबूत है, लेकिन एक स्टील्थ फाइटर को दूर से डिटेक्ट करना हमेशा एक चुनौती होती है। अगर यह पाकिस्तान को मिल जाता हैं तो वह भारतीय सीमा में घुसकर हमला करने और वापस लौटने की क्षमता दे सकता है। इससे भारत के मौजूदा 'एयर डोमिनेंस' (हवाई दबदबे) का संतुलन बिगड़ सकता है।
Two-Front War:
सबसे बड़ी चिंता यह है कि चीन (J-20/J-35) और पाकिस्तान (J-35) दोनों एक ही तरह के प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करेंगे।
• युद्ध की स्थिति में दोनों देशों के बीच डेटा शेयरिंग और तालमेल बहुत आसान हो जाएगा।
• यह भारत के लिए दो मोर्चों पर एक साथ लड़ना और मुश्किल बना देगा।
भारत की तैयारी क्या है?
भारत के पास भी इससे निपटने के विकल्प हैं:
•S-400: इसे विशेष रूप से स्टील्थ जेट्स को ट्रैक करने और मार गिराने के लिए ही बनाया गया है।
• AMCA: भारत अपना खुद का 5वीं पीढ़ी का फाइटर जेट (AMCA) बना रहा है, हालांकि इसमें अभी समय लगेगा।
• 🇫🇷 मेगा डील: खतरे को देखते हुए भारत फ्रांस के साथ 114 फाइटर जेट्स (MRFA) की डील कर रहा है, जिसमें सुपर राफेल F-5 शामिल हो सकते हैं।
पाकिस्तान को J-35 मिलना 'शक्ति संतुलन' (Balance of Power) को अस्थाई रूप से बिगाड़ सकता है, लेकिन भारतीय वायुसेना अपनी क्षमताओं को तेजी से अपग्रेड कर रही है।
आपको क्या लगता है?
क्या भारत को अपने AMCA प्रोजेक्ट में और तेजी लानी चाहिए या तुरंत राफेल की संख्या बढ़ानी चाहिए? कमेंट में अपनी राय दें!
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