ترقية الحساب

  • बूढ़ा पेड़

    एक गाँव में बहुत पुराना पेड़ था। उसने सालों तक लोगों को छाया दी, बच्चों को खेलने की जगह दी और पक्षियों को घर दिया।

    लेकिन समय के साथ वह बूढ़ा हो गया। अब उस पर पहले जितने फल नहीं आते थे।

    कुछ लोगों ने कहा कि इसे काट देना चाहिए क्योंकि अब इसका कोई फायदा नहीं।

    गाँव के एक बुज़ुर्ग ने कहा,
    “जिस पेड़ ने हमें इतने सालों तक आराम दिया, क्या हम उसे उसके बूढ़े होने पर छोड़ देंगे?”

    सब लोग चुप हो गए।

    उस दिन उन्होंने पेड़ को नहीं काटा। बल्कि उसकी देखभाल करने लगे।

    यह कहानी याद दिलाती है कि कृतज्ञता और सम्मान भी इंसान की सबसे बड़ी पहचान है।
    बूढ़ा पेड़ एक गाँव में बहुत पुराना पेड़ था। उसने सालों तक लोगों को छाया दी, बच्चों को खेलने की जगह दी और पक्षियों को घर दिया। लेकिन समय के साथ वह बूढ़ा हो गया। अब उस पर पहले जितने फल नहीं आते थे। कुछ लोगों ने कहा कि इसे काट देना चाहिए क्योंकि अब इसका कोई फायदा नहीं। गाँव के एक बुज़ुर्ग ने कहा, “जिस पेड़ ने हमें इतने सालों तक आराम दिया, क्या हम उसे उसके बूढ़े होने पर छोड़ देंगे?” सब लोग चुप हो गए। उस दिन उन्होंने पेड़ को नहीं काटा। बल्कि उसकी देखभाल करने लगे। यह कहानी याद दिलाती है कि कृतज्ञता और सम्मान भी इंसान की सबसे बड़ी पहचान है।
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  • छोटी शुरुआत

    रवि एक छोटे गाँव से था। उसके पास ज्यादा साधन नहीं थे, लेकिन उसके सपने बड़े थे। वह एक अच्छा उद्यमी बनना चाहता था।

    उसने सिर्फ 500 रुपये से एक छोटा काम शुरू किया। शुरुआत में लोग उसका मजाक उड़ाते थे। वे कहते, “इतने छोटे काम से क्या होगा?”

    लेकिन रवि रोज थोड़ा-थोड़ा आगे बढ़ता रहा। उसने हार नहीं मानी।

    धीरे-धीरे उसका काम बढ़ने लगा। कुछ साल बाद वही छोटा काम एक बड़ी कंपनी बन गया।

    जब लोगों ने उससे सफलता का राज पूछा, तो उसने मुस्कुराकर कहा,
    “मैंने बड़ा बनने के बारे में नहीं सोचा, मैंने सिर्फ रोज थोड़ा बेहतर बनने के बारे में सोचा।”

    उसकी कहानी सिखाती है कि हर बड़ी सफलता की शुरुआत बहुत छोटी होती है।
    छोटी शुरुआत रवि एक छोटे गाँव से था। उसके पास ज्यादा साधन नहीं थे, लेकिन उसके सपने बड़े थे। वह एक अच्छा उद्यमी बनना चाहता था। उसने सिर्फ 500 रुपये से एक छोटा काम शुरू किया। शुरुआत में लोग उसका मजाक उड़ाते थे। वे कहते, “इतने छोटे काम से क्या होगा?” लेकिन रवि रोज थोड़ा-थोड़ा आगे बढ़ता रहा। उसने हार नहीं मानी। धीरे-धीरे उसका काम बढ़ने लगा। कुछ साल बाद वही छोटा काम एक बड़ी कंपनी बन गया। जब लोगों ने उससे सफलता का राज पूछा, तो उसने मुस्कुराकर कहा, “मैंने बड़ा बनने के बारे में नहीं सोचा, मैंने सिर्फ रोज थोड़ा बेहतर बनने के बारे में सोचा।” उसकी कहानी सिखाती है कि हर बड़ी सफलता की शुरुआत बहुत छोटी होती है।
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  • टूटा हुआ सपना

    नेहा बचपन से डॉक्टर बनना चाहती थी। उसने बहुत मेहनत की, लेकिन मेडिकल प्रवेश परीक्षा में उसका चयन नहीं हुआ।

    उसके लिए यह बहुत बड़ा झटका था। उसे लगा कि उसकी सारी मेहनत बेकार हो गई। कई दिनों तक वह उदास रही।

    एक दिन उसकी टीचर उससे मिलने आईं। उन्होंने कहा,
    “कभी-कभी जिंदगी हमें वही नहीं देती जो हम चाहते हैं, लेकिन वह हमें कुछ और बेहतर देने की तैयारी कर रही होती है।”

    नेहा ने फिर से सोचना शुरू किया। उसे एहसास हुआ कि उसे लोगों की मदद करना पसंद है। उसने मनोविज्ञान की पढ़ाई शुरू की।

    कुछ साल बाद वह एक सफल काउंसलर बन गई और हजारों लोगों की मदद करने लगी।

    तब उसे समझ आया कि सपना टूटना हमेशा अंत नहीं होता, कभी-कभी वही नई शुरुआत होता है।
    टूटा हुआ सपना नेहा बचपन से डॉक्टर बनना चाहती थी। उसने बहुत मेहनत की, लेकिन मेडिकल प्रवेश परीक्षा में उसका चयन नहीं हुआ। उसके लिए यह बहुत बड़ा झटका था। उसे लगा कि उसकी सारी मेहनत बेकार हो गई। कई दिनों तक वह उदास रही। एक दिन उसकी टीचर उससे मिलने आईं। उन्होंने कहा, “कभी-कभी जिंदगी हमें वही नहीं देती जो हम चाहते हैं, लेकिन वह हमें कुछ और बेहतर देने की तैयारी कर रही होती है।” नेहा ने फिर से सोचना शुरू किया। उसे एहसास हुआ कि उसे लोगों की मदद करना पसंद है। उसने मनोविज्ञान की पढ़ाई शुरू की। कुछ साल बाद वह एक सफल काउंसलर बन गई और हजारों लोगों की मदद करने लगी। तब उसे समझ आया कि सपना टूटना हमेशा अंत नहीं होता, कभी-कभी वही नई शुरुआत होता है।
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  • पिता की खामोशी

    अमन हमेशा सोचता था कि उसके पिता उससे ज्यादा प्यार नहीं करते। उसके दोस्त अपने पिता के साथ घूमने जाते थे, बातें करते थे, लेकिन अमन के पिता ज्यादा चुप रहते थे।

    वे सुबह जल्दी काम पर चले जाते और देर रात लौटते। अमन को लगता कि उन्हें उसकी परवाह नहीं है।

    एक दिन रात को अमन पानी लेने उठा। उसने देखा कि उसके पिता मेज पर बैठे हिसाब कर रहे थे। उनकी आँखों में थकान थी, लेकिन चेहरे पर चिंता भी।

    अमन ने सुना कि वे माँ से कह रहे थे,
    “अमन की कॉलेज फीस ज्यादा है, लेकिन उसकी पढ़ाई नहीं रुकनी चाहिए। मैं कुछ और काम कर लूंगा।”

    उस पल अमन की आँखों में आँसू आ गए। उसे समझ आया कि उसके पिता की खामोशी में भी बहुत सारा प्यार छिपा था।

    उस दिन से अमन ने शिकायत करना बंद कर दिया। उसे समझ आ गया कि कुछ लोग प्यार शब्दों से नहीं, अपने त्याग से दिखाते हैं।
    पिता की खामोशी अमन हमेशा सोचता था कि उसके पिता उससे ज्यादा प्यार नहीं करते। उसके दोस्त अपने पिता के साथ घूमने जाते थे, बातें करते थे, लेकिन अमन के पिता ज्यादा चुप रहते थे। वे सुबह जल्दी काम पर चले जाते और देर रात लौटते। अमन को लगता कि उन्हें उसकी परवाह नहीं है। एक दिन रात को अमन पानी लेने उठा। उसने देखा कि उसके पिता मेज पर बैठे हिसाब कर रहे थे। उनकी आँखों में थकान थी, लेकिन चेहरे पर चिंता भी। अमन ने सुना कि वे माँ से कह रहे थे, “अमन की कॉलेज फीस ज्यादा है, लेकिन उसकी पढ़ाई नहीं रुकनी चाहिए। मैं कुछ और काम कर लूंगा।” उस पल अमन की आँखों में आँसू आ गए। उसे समझ आया कि उसके पिता की खामोशी में भी बहुत सारा प्यार छिपा था। उस दिन से अमन ने शिकायत करना बंद कर दिया। उसे समझ आ गया कि कुछ लोग प्यार शब्दों से नहीं, अपने त्याग से दिखाते हैं।
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  • पिता की चुप्पी
    अमन को लगता था कि उसके पिता उससे प्यार नहीं करते क्योंकि वे कम बोलते थे। एक दिन उसने देखा कि पिता देर रात तक काम कर रहे थे ताकि उसकी पढ़ाई का खर्च उठा सकें। उस दिन अमन समझ गया—कुछ प्यार शब्दों से नहीं, जिम्मेदारियों से दिखता है।
    पिता की चुप्पी अमन को लगता था कि उसके पिता उससे प्यार नहीं करते क्योंकि वे कम बोलते थे। एक दिन उसने देखा कि पिता देर रात तक काम कर रहे थे ताकि उसकी पढ़ाई का खर्च उठा सकें। उस दिन अमन समझ गया—कुछ प्यार शब्दों से नहीं, जिम्मेदारियों से दिखता है।
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  • आख़िरी कदम
    राहुल कई बार परीक्षा में असफल हुआ। लोग उसका मज़ाक उड़ाने लगे। एक दिन उसने सोचा कि अब छोड़ देना चाहिए। लेकिन माँ ने कहा, “बस एक बार और कोशिश कर।” राहुल ने हिम्मत जुटाई और पूरी मेहनत से पढ़ाई की। इस बार वह पास हो गया। उसे समझ आया—कभी-कभी जीत बस एक कदम दूर होती है।
    आख़िरी कदम राहुल कई बार परीक्षा में असफल हुआ। लोग उसका मज़ाक उड़ाने लगे। एक दिन उसने सोचा कि अब छोड़ देना चाहिए। लेकिन माँ ने कहा, “बस एक बार और कोशिश कर।” राहुल ने हिम्मत जुटाई और पूरी मेहनत से पढ़ाई की। इस बार वह पास हो गया। उसे समझ आया—कभी-कभी जीत बस एक कदम दूर होती है।
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  • 🌄✨ 🙏🙏आबू राजा – माउंट आबू का विस्तृत 3D मानचित्र
    राजस्थान की अरावली पर्वतमाला की गोद में बसा माउंट आबू राज्य का एकमात्र हिल स्टेशन है। हरियाली, झीलों, मंदिरों और पहाड़ी दृश्यों से सुसज्जित यह स्थान प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक शांति का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है।🙏🙏
    🏔️👉 गुरु शिखर (1722 मीटर)
    अरावली पर्वतमाला की सर्वोच्च चोटी गुरु शिखर यहाँ का प्रमुख आकर्षण है, जहाँ से चारों ओर का विहंगम दृश्य मन मोह लेता है।👈
    🏞️ 👉नक्की झील
    शहर के हृदय में स्थित नक्की झील शांत वातावरण और नौकायन के लिए प्रसिद्ध है। इसके आसपास बसा बाजार और पहाड़ी दृश्य इसे और आकर्षक बनाते हैं।
    🛕 👉आध्यात्मिक धरोहरें
    • दिलवाड़ा जैन मंदिर – संगमरमर की बारीक नक्काशी का विश्वप्रसिद्ध उदाहरण।
    • अर्बुदा देवी मंदिर – पहाड़ी पर स्थित आस्था का केंद्र।
    • अचलेश्वर महादेव मंदिर – धार्मिक महत्व का प्राचीन स्थल।
    🌅 👉प्राकृतिक व्यू पॉइंट्स
    • हनीमून पॉइंट
    • सनसेट पॉइंट
    • टोड रॉक
    🌳👉 वन्यजीव और हरियाली
    माउंट आबू वन्यजीव अभयारण्य घने जंगलों, दुर्लभ वनस्पतियों और वन्यजीवों का संरक्षण करता है, जो इस क्षेत्र को मरुस्थलीय राजस्थान से अलग पहचान देता है।
    📍👉 स्थान:
    सिरोही जिला, राजस्थान
    औसत ऊँचाई: लगभग 1220 मीटर
    माउंट आबू केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि प्रकृति, आध्यात्म और शांति का अद्वितीय संगम है। 🌿
    🌄✨ 🙏🙏आबू राजा – माउंट आबू का विस्तृत 3D मानचित्र राजस्थान की अरावली पर्वतमाला की गोद में बसा माउंट आबू राज्य का एकमात्र हिल स्टेशन है। हरियाली, झीलों, मंदिरों और पहाड़ी दृश्यों से सुसज्जित यह स्थान प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक शांति का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है।🙏🙏 🏔️👉 गुरु शिखर (1722 मीटर) अरावली पर्वतमाला की सर्वोच्च चोटी गुरु शिखर यहाँ का प्रमुख आकर्षण है, जहाँ से चारों ओर का विहंगम दृश्य मन मोह लेता है।👈 🏞️ 👉नक्की झील शहर के हृदय में स्थित नक्की झील शांत वातावरण और नौकायन के लिए प्रसिद्ध है। इसके आसपास बसा बाजार और पहाड़ी दृश्य इसे और आकर्षक बनाते हैं। 🛕 👉आध्यात्मिक धरोहरें • दिलवाड़ा जैन मंदिर – संगमरमर की बारीक नक्काशी का विश्वप्रसिद्ध उदाहरण। • अर्बुदा देवी मंदिर – पहाड़ी पर स्थित आस्था का केंद्र। • अचलेश्वर महादेव मंदिर – धार्मिक महत्व का प्राचीन स्थल। 🌅 👉प्राकृतिक व्यू पॉइंट्स • हनीमून पॉइंट • सनसेट पॉइंट • टोड रॉक 🌳👉 वन्यजीव और हरियाली माउंट आबू वन्यजीव अभयारण्य घने जंगलों, दुर्लभ वनस्पतियों और वन्यजीवों का संरक्षण करता है, जो इस क्षेत्र को मरुस्थलीय राजस्थान से अलग पहचान देता है। 📍👉 स्थान: सिरोही जिला, राजस्थान औसत ऊँचाई: लगभग 1220 मीटर माउंट आबू केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि प्रकृति, आध्यात्म और शांति का अद्वितीय संगम है। 🌿
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  • छोटी -छोटी बातें बड़ा फर्क डालती हैं

    एक आदमी सुबह को समुद्र के किनारे टहल रहा था ।

    उसने देखा कि लहरों के साथ सैकड़ों स्टार मछलियाँ तट पर आ जाती हैं, जब लहरे पीछे जाती हैं तो मछलियाँ किनारे पर ही जाती हैं और धूप से मर जाती हैं ।

    लहरें उसी समय लौटी थी और स्टार मछलियाँ अभी जीवित थी ।

    वह आदमी कुछ कदम आगे बढ़ा, उसने एक मछली उठाई और पानी में फेंक दी ।

    वह ऐसा बार-बार करता रहा ।

    उस आदमी के ठीक पीछे एक और आदमी था, जो यह नहीं समझ पा रहा था कि वह क्या कर रहा है ।

    वह उसके पास आया और पूछा तुम क्या कर रहे हो ?

    यहाँ तो सैकड़ों स्टार मछलियाँ हैं । तुम कितनें को बचा सकोगे ?

    तुम्हारे ऐसा करने से क्या फर्क पड़ेगा ?

    उस आदमी ने कोई जवाब नहीं दिया, दो कदम आगे बढ़कर उसने एक और मछली को उठाकर पानी में फेंक दिया और बोला, इससे इस एक मछली को तो फर्क पड़ता है ।

    हम कौन-सा फर्क डाल रहे हैं ? बड़ा या छोटा, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता ।

    अगर सब थोड़ा-थोड़ा फर्क लाएँ तो बहुत बड़ा फर्क पड़ेगा ।
    छोटी -छोटी बातें बड़ा फर्क डालती हैं एक आदमी सुबह को समुद्र के किनारे टहल रहा था । उसने देखा कि लहरों के साथ सैकड़ों स्टार मछलियाँ तट पर आ जाती हैं, जब लहरे पीछे जाती हैं तो मछलियाँ किनारे पर ही जाती हैं और धूप से मर जाती हैं । लहरें उसी समय लौटी थी और स्टार मछलियाँ अभी जीवित थी । वह आदमी कुछ कदम आगे बढ़ा, उसने एक मछली उठाई और पानी में फेंक दी । वह ऐसा बार-बार करता रहा । उस आदमी के ठीक पीछे एक और आदमी था, जो यह नहीं समझ पा रहा था कि वह क्या कर रहा है । वह उसके पास आया और पूछा तुम क्या कर रहे हो ? यहाँ तो सैकड़ों स्टार मछलियाँ हैं । तुम कितनें को बचा सकोगे ? तुम्हारे ऐसा करने से क्या फर्क पड़ेगा ? उस आदमी ने कोई जवाब नहीं दिया, दो कदम आगे बढ़कर उसने एक और मछली को उठाकर पानी में फेंक दिया और बोला, इससे इस एक मछली को तो फर्क पड़ता है । हम कौन-सा फर्क डाल रहे हैं ? बड़ा या छोटा, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता । अगर सब थोड़ा-थोड़ा फर्क लाएँ तो बहुत बड़ा फर्क पड़ेगा ।
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  • बीरबल और चोर

    एक सुबह अकबर का दरबार सजा हुआ था, कार्यवाही चल रही थी।

    तभी एक समृद्ध व्यक्ति ने आकर कहा, “मेरे पैसों की चोरी हो गई है।

    मुझे मेरे सेवक पर शंका है पर किसने चोरी की है यह मैं नहीं बता सकता।

    कृपया मेरी सहायता करें।”

    बीरबल ने समृद्ध व्यक्ति के घर जाकर सेवकों से पूछा कि क्या उन्होंने चोरी की थी पर उन सब ने नकार दिया।

    कुछ पल सोचकर बीरबल ने सभी सेवक को एक-एक छड़ी देकर कहा, “यह जादुई छड़ी है।

    अभी यह सब एक बराबर हैं पर चोरी करने वाले की छड़ी कल सुबह तक दो इंच बढ़ जाएगी।

    तुम सब घर जाओ और कल सुबह छड़ी लेकर आना।"

    अगले दिन बीरबल ने ध्यानपूर्वक उन सबकी छड़ियों को देखा। उसे एक छड़ी दो इंच छोटी लगी। “ओ हो! तो तुमने ही चोरी की है... ये

    छड़ियाँ साभ्गरण छड़ियाँ ही हैं।

    इनमें कोई जादू नहीं है।

    तुम्हें मेरी बात पर भरोसा हो गया और तुमने अपनी छड़ी दो इंच छोटी कर दी।

    " फिर समृद्ध व्यक्ति से बीरबल ने कहा, “वही चोर है।”

    सजा के रूप में चोर को जेल भेज दिया गया।
    बीरबल और चोर एक सुबह अकबर का दरबार सजा हुआ था, कार्यवाही चल रही थी। तभी एक समृद्ध व्यक्ति ने आकर कहा, “मेरे पैसों की चोरी हो गई है। मुझे मेरे सेवक पर शंका है पर किसने चोरी की है यह मैं नहीं बता सकता। कृपया मेरी सहायता करें।” बीरबल ने समृद्ध व्यक्ति के घर जाकर सेवकों से पूछा कि क्या उन्होंने चोरी की थी पर उन सब ने नकार दिया। कुछ पल सोचकर बीरबल ने सभी सेवक को एक-एक छड़ी देकर कहा, “यह जादुई छड़ी है। अभी यह सब एक बराबर हैं पर चोरी करने वाले की छड़ी कल सुबह तक दो इंच बढ़ जाएगी। तुम सब घर जाओ और कल सुबह छड़ी लेकर आना।" अगले दिन बीरबल ने ध्यानपूर्वक उन सबकी छड़ियों को देखा। उसे एक छड़ी दो इंच छोटी लगी। “ओ हो! तो तुमने ही चोरी की है... ये छड़ियाँ साभ्गरण छड़ियाँ ही हैं। इनमें कोई जादू नहीं है। तुम्हें मेरी बात पर भरोसा हो गया और तुमने अपनी छड़ी दो इंच छोटी कर दी। " फिर समृद्ध व्यक्ति से बीरबल ने कहा, “वही चोर है।” सजा के रूप में चोर को जेल भेज दिया गया।
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  • बीरबल और चोर

    एक सुबह अकबर का दरबार सजा हुआ था, कार्यवाही चल रही थी।

    तभी एक समृद्ध व्यक्ति ने आकर कहा, “मेरे पैसों की चोरी हो गई है।

    मुझे मेरे सेवक पर शंका है पर किसने चोरी की है यह मैं नहीं बता सकता।

    कृपया मेरी सहायता करें।”

    बीरबल ने समृद्ध व्यक्ति के घर जाकर सेवकों से पूछा कि क्या उन्होंने चोरी की थी पर उन सब ने नकार दिया।

    कुछ पल सोचकर बीरबल ने सभी सेवक को एक-एक छड़ी देकर कहा, “यह जादुई छड़ी है।

    अभी यह सब एक बराबर हैं पर चोरी करने वाले की छड़ी कल सुबह तक दो इंच बढ़ जाएगी।

    तुम सब घर जाओ और कल सुबह छड़ी लेकर आना।"

    अगले दिन बीरबल ने ध्यानपूर्वक उन सबकी छड़ियों को देखा। उसे एक छड़ी दो इंच छोटी लगी। “ओ हो! तो तुमने ही चोरी की है... ये

    छड़ियाँ साभ्गरण छड़ियाँ ही हैं।

    इनमें कोई जादू नहीं है।

    तुम्हें मेरी बात पर भरोसा हो गया और तुमने अपनी छड़ी दो इंच छोटी कर दी।

    " फिर समृद्ध व्यक्ति से बीरबल ने कहा, “वही चोर है।”

    सजा के रूप में चोर को जेल भेज दिया गया।
    बीरबल और चोर एक सुबह अकबर का दरबार सजा हुआ था, कार्यवाही चल रही थी। तभी एक समृद्ध व्यक्ति ने आकर कहा, “मेरे पैसों की चोरी हो गई है। मुझे मेरे सेवक पर शंका है पर किसने चोरी की है यह मैं नहीं बता सकता। कृपया मेरी सहायता करें।” बीरबल ने समृद्ध व्यक्ति के घर जाकर सेवकों से पूछा कि क्या उन्होंने चोरी की थी पर उन सब ने नकार दिया। कुछ पल सोचकर बीरबल ने सभी सेवक को एक-एक छड़ी देकर कहा, “यह जादुई छड़ी है। अभी यह सब एक बराबर हैं पर चोरी करने वाले की छड़ी कल सुबह तक दो इंच बढ़ जाएगी। तुम सब घर जाओ और कल सुबह छड़ी लेकर आना।" अगले दिन बीरबल ने ध्यानपूर्वक उन सबकी छड़ियों को देखा। उसे एक छड़ी दो इंच छोटी लगी। “ओ हो! तो तुमने ही चोरी की है... ये छड़ियाँ साभ्गरण छड़ियाँ ही हैं। इनमें कोई जादू नहीं है। तुम्हें मेरी बात पर भरोसा हो गया और तुमने अपनी छड़ी दो इंच छोटी कर दी। " फिर समृद्ध व्यक्ति से बीरबल ने कहा, “वही चोर है।” सजा के रूप में चोर को जेल भेज दिया गया।
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  • बीरबल और चोर

    एक सुबह अकबर का दरबार सजा हुआ था, कार्यवाही चल रही थी।

    तभी एक समृद्ध व्यक्ति ने आकर कहा, “मेरे पैसों की चोरी हो गई है।

    मुझे मेरे सेवक पर शंका है पर किसने चोरी की है यह मैं नहीं बता सकता।

    कृपया मेरी सहायता करें।”

    बीरबल ने समृद्ध व्यक्ति के घर जाकर सेवकों से पूछा कि क्या उन्होंने चोरी की थी पर उन सब ने नकार दिया।

    कुछ पल सोचकर बीरबल ने सभी सेवक को एक-एक छड़ी देकर कहा, “यह जादुई छड़ी है।

    अभी यह सब एक बराबर हैं पर चोरी करने वाले की छड़ी कल सुबह तक दो इंच बढ़ जाएगी।

    तुम सब घर जाओ और कल सुबह छड़ी लेकर आना।"

    अगले दिन बीरबल ने ध्यानपूर्वक उन सबकी छड़ियों को देखा। उसे एक छड़ी दो इंच छोटी लगी। “ओ हो! तो तुमने ही चोरी की है... ये

    छड़ियाँ साभ्गरण छड़ियाँ ही हैं।

    इनमें कोई जादू नहीं है।

    तुम्हें मेरी बात पर भरोसा हो गया और तुमने अपनी छड़ी दो इंच छोटी कर दी।

    " फिर समृद्ध व्यक्ति से बीरबल ने कहा, “वही चोर है।”

    सजा के रूप में चोर को जेल भेज दिया गया।
    बीरबल और चोर एक सुबह अकबर का दरबार सजा हुआ था, कार्यवाही चल रही थी। तभी एक समृद्ध व्यक्ति ने आकर कहा, “मेरे पैसों की चोरी हो गई है। मुझे मेरे सेवक पर शंका है पर किसने चोरी की है यह मैं नहीं बता सकता। कृपया मेरी सहायता करें।” बीरबल ने समृद्ध व्यक्ति के घर जाकर सेवकों से पूछा कि क्या उन्होंने चोरी की थी पर उन सब ने नकार दिया। कुछ पल सोचकर बीरबल ने सभी सेवक को एक-एक छड़ी देकर कहा, “यह जादुई छड़ी है। अभी यह सब एक बराबर हैं पर चोरी करने वाले की छड़ी कल सुबह तक दो इंच बढ़ जाएगी। तुम सब घर जाओ और कल सुबह छड़ी लेकर आना।" अगले दिन बीरबल ने ध्यानपूर्वक उन सबकी छड़ियों को देखा। उसे एक छड़ी दो इंच छोटी लगी। “ओ हो! तो तुमने ही चोरी की है... ये छड़ियाँ साभ्गरण छड़ियाँ ही हैं। इनमें कोई जादू नहीं है। तुम्हें मेरी बात पर भरोसा हो गया और तुमने अपनी छड़ी दो इंच छोटी कर दी। " फिर समृद्ध व्यक्ति से बीरबल ने कहा, “वही चोर है।” सजा के रूप में चोर को जेल भेज दिया गया।
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  • फटी साड़ी और अफसर बेटा

    गाँव के एक छोटे से घर में कमला नाम की एक बूढ़ी माँ रहती थी। उसका पति बहुत पहले गुजर गया था। उसने मेहनत-मजदूरी करके, कई बार भूखे पेट रहकर, फटे कपड़े पहनकर अपने इकलौते बेटे, राहुल, को शहर पढ़ने भेजा। माँ का सपना था कि बेटा बड़ा होकर शहर में अफसर बने।
    वर्षों की मेहनत रंग लाई। राहुल अफसर बन गया। शहर में उसकी शादी हुई और वह अपनी दुनिया में व्यस्त हो गया। शुरुआत में जो बेटा हर दिन फोन करता था, अब महीनों तक माँ की खबर नहीं लेता। माँ हर दिन गाँव के डाकिया को देखती, पर राहुल का कोई पत्र या फोन नहीं आता।
    एक दिन, माँ ने राहुल से मिलने का फैसला किया। वह अपनी सबसे अच्छी, पर पुरानी हो चुकी साड़ी पहनकर शहर पहुंची। वह राहुल के आलीशान बंगले के सामने खड़ी थी। गेट पर जब राहुल ने अपनी फटेहाल माँ को देखा, तो वह शर्मिंदा हो गया।
    राहुल की पत्नी ने पूछा, "ये कौन हैं?"
    राहुल ने कहा, "शायद गाँव से आई कोई गरीब औरत है, कुछ माँगने आई होगी।"
    यह सुनकर माँ का दिल टूट गया। वह अपने बेटे की आँखों में अपने लिए प्यार नहीं, सिर्फ नफरत और शर्मिंदगी देख पाई। वह कुछ नहीं बोली। उसने अपनी फटी साड़ी के पल्लू से अपनी आँखों के आंसू पोंछे और बिना एक शब्द बोले, वापस गाँव के लिए चल दी।


    सीख: बेटा बड़ा होकर अफसर बन गया, लेकिन इंसान बनना भूल गया। माँ का निस्वार्थ प्रेम कभी फटी साड़ी के पल्लू में नहीं छिपता, लेकिन बेटा उसे अपनी पहचान में शर्मिंदगी मान बैठा।
    फटी साड़ी और अफसर बेटा गाँव के एक छोटे से घर में कमला नाम की एक बूढ़ी माँ रहती थी। उसका पति बहुत पहले गुजर गया था। उसने मेहनत-मजदूरी करके, कई बार भूखे पेट रहकर, फटे कपड़े पहनकर अपने इकलौते बेटे, राहुल, को शहर पढ़ने भेजा। माँ का सपना था कि बेटा बड़ा होकर शहर में अफसर बने। वर्षों की मेहनत रंग लाई। राहुल अफसर बन गया। शहर में उसकी शादी हुई और वह अपनी दुनिया में व्यस्त हो गया। शुरुआत में जो बेटा हर दिन फोन करता था, अब महीनों तक माँ की खबर नहीं लेता। माँ हर दिन गाँव के डाकिया को देखती, पर राहुल का कोई पत्र या फोन नहीं आता। एक दिन, माँ ने राहुल से मिलने का फैसला किया। वह अपनी सबसे अच्छी, पर पुरानी हो चुकी साड़ी पहनकर शहर पहुंची। वह राहुल के आलीशान बंगले के सामने खड़ी थी। गेट पर जब राहुल ने अपनी फटेहाल माँ को देखा, तो वह शर्मिंदा हो गया। राहुल की पत्नी ने पूछा, "ये कौन हैं?" राहुल ने कहा, "शायद गाँव से आई कोई गरीब औरत है, कुछ माँगने आई होगी।" यह सुनकर माँ का दिल टूट गया। वह अपने बेटे की आँखों में अपने लिए प्यार नहीं, सिर्फ नफरत और शर्मिंदगी देख पाई। वह कुछ नहीं बोली। उसने अपनी फटी साड़ी के पल्लू से अपनी आँखों के आंसू पोंछे और बिना एक शब्द बोले, वापस गाँव के लिए चल दी। सीख: बेटा बड़ा होकर अफसर बन गया, लेकिन इंसान बनना भूल गया। माँ का निस्वार्थ प्रेम कभी फटी साड़ी के पल्लू में नहीं छिपता, लेकिन बेटा उसे अपनी पहचान में शर्मिंदगी मान बैठा।
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