उपेक्षा बहुत बड़े मुर्गे की आवाज से कांप उठता हूँ तो यह कौन सी अचरज की
बात है।
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उपेक्षा बहुत बड़े मुर्गे की आवाज से कांप उठता हूँ तो यह कौन सी अचरज की
बात है।
रहता और उसी दिन अपने घोड़े के पैरों में नई नाल बंधवा देता तो आज इस
विपात्त में क्यों फंसता।
माँ जी खैरियत है ? औरत बोली बेटा आपकी शक्ल मेरे मरहूम बेटे से बहुत ज्यादा मिलती जुलती है ।मैं ना चाहते हुए भी आपको अपना बेटा समझते हुए आपके पीछे चल पड़ी,
और आप ने मुझे माँ जी कहा तो मेरे दिल के जज़्बात और खुशी बयां करने लायक नही।
औरत ने यह कहा और उसकी आँखों से आँसू बहने शुरू हो गये। नौजवान कहता है कोई बात नहीं माँ जी आप मुझे अपना बेटा ही समझें।वह औरत बोली कि बेटा क्या आप मुझे एक बार फिर माँ जी कहोगे
नौजवान ने ऊँची आवाज़ से कहा, जी माँ जीपर उस औरत ने ऐसा बर्ताव किया जैसे उसने सुना ही ना हो,
नौजवान ने फिर ऊंची आवाज़ में कहा जी माँ जी.... ।औरत ने सुना और नौजवान के दोनों हाथ पकड़ कर चूमे ,
अपने आंखों से लगाऐ और रोते हुए वहां से रुखसत हो गई।नौजवान उस मंज़र को देख कर अपने आप पर काबू नहीं कर सका और उसकी आंखों से आंसू बहने लगे,वह अपनी खरीदारी पूरी करे बगैर ही वापस चल दिया।काउंटर पर पहुँचा तो कैशियर ने दस हज़ार का बिल थमा दिया....
नौजवान ने पूछा दस हज़ार कैसे ? कैशियर ने कहा आठ सौ का बिल आपका है ।और नौ हजार दो सौ का आपकी माँ के हैं,
जिन्हें आप अभी माँ जी माँ जी कह रहे थे।वह दिन और आज का दिन,
नौजवान अपनी असली मां को भी मौसी कहता है।
जाते-जाते पूछा-क्यों भाई गदहे! यह तू लंगड़ा-लंगड़ा कर क्यों चलता है ?गदहे ने उत्तर दिया-क्या कहें सरकार! दौड़ते समय पैर में एक बहुत लम्बा बहुत मोटा काटा चुभ गया है। उसी से पैर में बहुत कष्ट हो रहा है और मैं लंगड़ाकर चल रहा हूँ। बाघ ने पूछा -फिर ?गदहे ने कहा यदि खाने के विचार रखते हो तो पहले वह कांटा बाहर निकालो। कहीं ऐसा नहीं हो कि मुझे खाते समय वह कांटा गलती से तुम्हारे गले में अटक जाए और तुम्हें अपने प्राण खोने पड़े। बाघ को गदहे का कहना जँच गया। उसने गदहे का वह पैर उठाया और बड़े ध्यान से उसमें कांटा ढूँढना शुरू किया। गदहे ने यह मौका बहुत अच्छा समझा और कसकर दुलत्ती फटकारी तथा हवा के समान तेजी से भाग निकला। जो तड़ाक से दुलत्ती की चोट पड़ी तो बाघ का मुहं टेढ़ा हो गया उसके सामने वाले दांत झड़ गए और जबड़े खून से भर गए। बस वह लज्जित होकर कह उठा-उफ़। गदहे की बुद्धि के सामने बाघ का बल कुछ काम न आया।
किसान की स्त्री और एक खूबसूरत स्त्री को अपने साथ लिया और दरबार में
हाजिर हो गए । बीरबल, यह क्या तमाशा है ?हुजूर ये अप्सरा और चुड़ैल हैं । क्या बात करते हो ?यह साँवली स्त्री अप्सरा है और यह गोरी जो है वह चुड़ैल है । बीरबल की बात सुनकर बादशाह चौंक पड़े । उन्होंने कहा, बीरबल, तुम उलटी बात कह रहे हो । वह सुंदरी तो अप्सरा लगती है । नहीं हुजूर, बीरबल समझाने लगे, यह काली स्त्री साक्षात अप्सरा है, जो
अपने पति को सच्चे प्यार से आनंदित करती है और यह वेश्या चुड़ैल है, जो
जिस्मफरोशी करती है, लुटती है । इसका धंधा ही ऐसा है ।
बादशाह को बीरबल का उत्तर तर्क-संगत लगा ।
जेब में उसके शिक्षक का एक नोट रखा था, जिस पर लिखा था, आपका टॉमी इतना
मंदबुद्धि का है कि वह कुछ नहीं सीख सकता। उसे स्कूल से बाहर निकाल लीजिये। उसकी माँ ने वह नोट पढ़ कर जवाब दिया, मेरा टॉमी इतना मंदबुद्धि नहीं है कि कुछ सीख न सके। मैं उसे खुद पढ़ाऊंगी। और वही टॉमी एक दिन बड़ा होकर महान थॉमस एडीसन बना। वह स्कूल में केवल तीन महीने पढ़ सके थे।
सोचती हूँ - काश ! वह भाई मैं होती। यह सोचने का कितना सकारात्मक नजरिया
है।
बीरबल को आता देखकर पति-पत्नी ने लड़ाई का नाटक करने का फैसला किया ।
आदमी ने एक लकड़ी हाथ में ली और लड़ाई का नाटक शुरू कर दिया । बीरबल ने जब यह देखा तो वे समझ गए कि यह सब नाटक है । वह घर के चौबारे में छुपकर बैठ गए । अब उन्होंने देखा कि पति-पत्नी ने लड़ाई रोक दी और अपनी-अपनी होशियारी जताने लगी । पति ने कहा, देखा किस होशियारी से मैंने लकड़ी उठाकर चलाई लेकिन तुम्हें एक भी नहीं लगी । इस पर पत्नी, आपने देखा, मैं कितनी चतुराई से चिल्लाई लेकिन रोइ नहीं । यह सुनकर बीरबल से न रहा गया और वह बोले, तुम लोगों ने देखा, मैं किस तरह से चौबारे में छिप गया लेकिन मैं गया नहीं ।
सभी दरबारियों ने अपनी-अपनी तरह उत्तर दिए । किसी ने बताया खुदा, किसी ने भगवान तो किसी ने रूह ।
बादशाह, किसी के उत्तर से संतुष्ट नहीं हो सके । सभी के उत्तर गलत थे । अंत में बीरबल से पूछा गया । वह विनम्रता के साथ बोले, जिसे सूरज और चाँद नहीं देख सकते हैं वह चीज है, अंधकार । बादशाह प्रसन्नता से खिल उठे ।
उत्तर सही था ।
इसका उत्तर सिर्फ तीन शब्दों में बताओ । बीरबल तुरन्त उत्तर दिया, फेरा नहीं था । बादशाह, साफ-साफ बताओं ।
बीरबल बोले, जहाँपनाह ! पान न फेरने से सड़ जाता है । घोड़ा फेरे बिना अड़ियल हो जाता है । बिना दोहराए विद्या लॉप हो जाती है । अंगारों पर फेरे बिना रोटी जलकर राख हो जाती है ।
लहरे पीछे जाती हैं तो मछलियाँ किनारे पर ही जाती हैं और धूप से मर जाती
हैं । लहरें उसी समय लौटी थी और स्टार मछलियाँ अभी जीवित थी । वह आदमी कुछ कदम आगे बढ़ा, उसने एक मछली उठाई और पानी में फेंक दी । वह ऐसा बार-बार करता रहा । उस आदमी के ठीक पीछे एक और आदमी था, जो यह नहीं समझ पा रहा था कि वह क्या कर रहा है । वह उसके पास आया और पूछा तुम क्या कर रहे हो ? यहाँ तो सैकड़ों स्टार मछलियाँ हैं । तुम कितनें को बचा सकोगे ?तुम्हारे ऐसा करने से क्या फर्क पड़ेगा ? उस आदमी ने कोई जवाब नहीं दिया, दो कदम आगे बढ़कर उसने एक और मछली को
उठाकर पानी में फेंक दिया और बोला, इससे इस एक मछली को तो फर्क पड़ता है । हम कौन-सा फर्क डाल रहे हैं ? बड़ा या छोटा, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता । अगर सब थोड़ा-थोड़ा फर्क लाएँ तो बहुत बड़ा फर्क पड़ेगा ।
गिरकर संभलना ही इंसान की पहचान होता है।
थाम लो हौसले को जब भी लगे राह कठिन,
क्योंकि हर मुश्किल के बाद ही नया आसमान होता है…✨
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