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  • 🌄✨ 🙏🙏आबू राजा – माउंट आबू का विस्तृत 3D मानचित्र
    राजस्थान की अरावली पर्वतमाला की गोद में बसा माउंट आबू राज्य का एकमात्र हिल स्टेशन है। हरियाली, झीलों, मंदिरों और पहाड़ी दृश्यों से सुसज्जित यह स्थान प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक शांति का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है।🙏🙏
    🏔️👉 गुरु शिखर (1722 मीटर)
    अरावली पर्वतमाला की सर्वोच्च चोटी गुरु शिखर यहाँ का प्रमुख आकर्षण है, जहाँ से चारों ओर का विहंगम दृश्य मन मोह लेता है।👈
    🏞️ 👉नक्की झील
    शहर के हृदय में स्थित नक्की झील शांत वातावरण और नौकायन के लिए प्रसिद्ध है। इसके आसपास बसा बाजार और पहाड़ी दृश्य इसे और आकर्षक बनाते हैं।
    🛕 👉आध्यात्मिक धरोहरें
    • दिलवाड़ा जैन मंदिर – संगमरमर की बारीक नक्काशी का विश्वप्रसिद्ध उदाहरण।
    • अर्बुदा देवी मंदिर – पहाड़ी पर स्थित आस्था का केंद्र।
    • अचलेश्वर महादेव मंदिर – धार्मिक महत्व का प्राचीन स्थल।
    🌅 👉प्राकृतिक व्यू पॉइंट्स
    • हनीमून पॉइंट
    • सनसेट पॉइंट
    • टोड रॉक
    🌳👉 वन्यजीव और हरियाली
    माउंट आबू वन्यजीव अभयारण्य घने जंगलों, दुर्लभ वनस्पतियों और वन्यजीवों का संरक्षण करता है, जो इस क्षेत्र को मरुस्थलीय राजस्थान से अलग पहचान देता है।
    📍👉 स्थान:
    सिरोही जिला, राजस्थान
    औसत ऊँचाई: लगभग 1220 मीटर
    माउंट आबू केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि प्रकृति, आध्यात्म और शांति का अद्वितीय संगम है। 🌿
    🌄✨ 🙏🙏आबू राजा – माउंट आबू का विस्तृत 3D मानचित्र राजस्थान की अरावली पर्वतमाला की गोद में बसा माउंट आबू राज्य का एकमात्र हिल स्टेशन है। हरियाली, झीलों, मंदिरों और पहाड़ी दृश्यों से सुसज्जित यह स्थान प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक शांति का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है।🙏🙏 🏔️👉 गुरु शिखर (1722 मीटर) अरावली पर्वतमाला की सर्वोच्च चोटी गुरु शिखर यहाँ का प्रमुख आकर्षण है, जहाँ से चारों ओर का विहंगम दृश्य मन मोह लेता है।👈 🏞️ 👉नक्की झील शहर के हृदय में स्थित नक्की झील शांत वातावरण और नौकायन के लिए प्रसिद्ध है। इसके आसपास बसा बाजार और पहाड़ी दृश्य इसे और आकर्षक बनाते हैं। 🛕 👉आध्यात्मिक धरोहरें • दिलवाड़ा जैन मंदिर – संगमरमर की बारीक नक्काशी का विश्वप्रसिद्ध उदाहरण। • अर्बुदा देवी मंदिर – पहाड़ी पर स्थित आस्था का केंद्र। • अचलेश्वर महादेव मंदिर – धार्मिक महत्व का प्राचीन स्थल। 🌅 👉प्राकृतिक व्यू पॉइंट्स • हनीमून पॉइंट • सनसेट पॉइंट • टोड रॉक 🌳👉 वन्यजीव और हरियाली माउंट आबू वन्यजीव अभयारण्य घने जंगलों, दुर्लभ वनस्पतियों और वन्यजीवों का संरक्षण करता है, जो इस क्षेत्र को मरुस्थलीय राजस्थान से अलग पहचान देता है। 📍👉 स्थान: सिरोही जिला, राजस्थान औसत ऊँचाई: लगभग 1220 मीटर माउंट आबू केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि प्रकृति, आध्यात्म और शांति का अद्वितीय संगम है। 🌿
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  • जिन लोगो कि शरीर पर तिलों की संख्या ज्यादा होती है वह औसतन कम तिल वाले लोगो से ज्यादा जीते हैं.
    जिन लोगो कि शरीर पर तिलों की संख्या ज्यादा होती है वह औसतन कम तिल वाले लोगो से ज्यादा जीते हैं.
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    ·78 Visualizações ·0 Anterior
  • महिलाएं हर रोज औसतन 20,000 शब्द बोलती हैं, जो पुरुषों के औसत से एक हज़ार-दो हज़ार नहीं 13000 शब्द ज्यादा है.
    महिलाएं हर रोज औसतन 20,000 शब्द बोलती हैं, जो पुरुषों के औसत से एक हज़ार-दो हज़ार नहीं 13000 शब्द ज्यादा है.
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  • रोचक तथ्य
    Righted-handed लोग औसतन left-handed लोगों से 9 साल ज्यादा जीते हैं.

    रोचक तथ्य Righted-handed लोग औसतन left-handed लोगों से 9 साल ज्यादा जीते हैं.
    ·77 Visualizações ·0 Anterior
  • रोचक तथ्य
    बादल का वजन: एक औसत आकार के बादल का वजन लगभग 80 हाथियों (करीब 10 लाख टन) के बराबर हो सकता है।
    रोचक तथ्य बादल का वजन: एक औसत आकार के बादल का वजन लगभग 80 हाथियों (करीब 10 लाख टन) के बराबर हो सकता है।
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    ·125 Visualizações ·0 Anterior
  • **बस एक फोटो…**

    वो सड़क और वो फुटपाथ कब से उसका घर बन गए थे, ये उसे खुद भी याद नहीं था। दुनिया उसे “कालू” कहती थी। किसी ने कभी उसका असली नाम नहीं पूछा, शायद उसे खुद भी याद नहीं था।

    उम्र करीब दस साल थी, लेकिन आँखों में बहुत समझ थी। भूख और हालात ने उसे जल्दी बड़ा कर दिया था। सुबह ठंडी ज़मीन उसे जगा देती। आसमान उसकी छत था और सड़क उसकी दुनिया।

    दिन भर लोग आते-जाते रहते। कोई मोबाइल में खोया रहता, कोई हँसता, कोई ग़ुस्से में। वो सबको चुपचाप देखता। उसे समझ आ गया था कि इस दुनिया से उम्मीद रखना बेकार है।

    लेकिन उस दिन उसके मन में एक छोटी-सी ख्वाहिश जागी।

    वो चौराहे पर बैठा था। लोग सेल्फी ले रहे थे, वीडियो बना रहे थे। वो सबको देखता रहा। उसने कभी खुद को ठीक से नहीं देखा था। दुकानों के काँच में उसका चेहरा धुंधला दिखता था।

    उसके मन में बस एक सवाल था—

    “मैं फोटो में कैसा लगता हूँ?”

    हिम्मत करके उसने एक आदमी से कहा,
    “भैया, मेरी एक फोटो ले दोगे?”

    “हट जा, काम है,” आदमी बोला।

    फिर एक महिला से पूछा।
    “दूर रहो,” उसने फोन बचाते हुए कहा।

    एक लड़का हँसा, “पहले कपड़े बदल के आ।”

    हर जवाब उसके दिल को तोड़ रहा था।

    वो फुटपाथ पर बैठ गया। सिर झुका लिया। शायद उसकी ख्वाहिश ही गलत थी।

    तभी किसी ने पूछा,
    “बेटे, उदास क्यों हो?”

    सामने एक सज्जन खड़े थे, आँखों में अपनापन था।

    “फोटो चाहिए?” उन्होंने पूछा।

    वो धीरे से बोला, “बस देखना था… मैं कैसा लगता हूँ।”

    उन्होंने मोबाइल निकाला।
    “इधर खड़े हो जाओ।”

    क्लिक।

    “देखो।”

    स्क्रीन पर वही चेहरा था। लेकिन पहली बार उसे लगा कि वो भी किसी से कम नहीं है।

    थोड़ी देर बाद सज्जन एक छपी हुई फोटो लेकर आए।

    “ये लो।”

    उसने कांपते हाथों से पकड़ी। अपनी पहली तस्वीर।

    आँखें भर आईं।
    “धन्यवाद…”

    वो खुशी-खुशी लौट गया।

    उस रात वो फोटो सीने से लगाकर सोया।

    उसके लिए वही उसकी सबसे बड़ी दौलत थी।

    **मुझे ज़माने की दौलत नहीं चाहिए,
    मेरी तस्वीर ही काफी है।**
    **बस एक फोटो…** वो सड़क और वो फुटपाथ कब से उसका घर बन गए थे, ये उसे खुद भी याद नहीं था। दुनिया उसे “कालू” कहती थी। किसी ने कभी उसका असली नाम नहीं पूछा, शायद उसे खुद भी याद नहीं था। उम्र करीब दस साल थी, लेकिन आँखों में बहुत समझ थी। भूख और हालात ने उसे जल्दी बड़ा कर दिया था। सुबह ठंडी ज़मीन उसे जगा देती। आसमान उसकी छत था और सड़क उसकी दुनिया। दिन भर लोग आते-जाते रहते। कोई मोबाइल में खोया रहता, कोई हँसता, कोई ग़ुस्से में। वो सबको चुपचाप देखता। उसे समझ आ गया था कि इस दुनिया से उम्मीद रखना बेकार है। लेकिन उस दिन उसके मन में एक छोटी-सी ख्वाहिश जागी। वो चौराहे पर बैठा था। लोग सेल्फी ले रहे थे, वीडियो बना रहे थे। वो सबको देखता रहा। उसने कभी खुद को ठीक से नहीं देखा था। दुकानों के काँच में उसका चेहरा धुंधला दिखता था। उसके मन में बस एक सवाल था— “मैं फोटो में कैसा लगता हूँ?” हिम्मत करके उसने एक आदमी से कहा, “भैया, मेरी एक फोटो ले दोगे?” “हट जा, काम है,” आदमी बोला। फिर एक महिला से पूछा। “दूर रहो,” उसने फोन बचाते हुए कहा। एक लड़का हँसा, “पहले कपड़े बदल के आ।” हर जवाब उसके दिल को तोड़ रहा था। वो फुटपाथ पर बैठ गया। सिर झुका लिया। शायद उसकी ख्वाहिश ही गलत थी। तभी किसी ने पूछा, “बेटे, उदास क्यों हो?” सामने एक सज्जन खड़े थे, आँखों में अपनापन था। “फोटो चाहिए?” उन्होंने पूछा। वो धीरे से बोला, “बस देखना था… मैं कैसा लगता हूँ।” उन्होंने मोबाइल निकाला। “इधर खड़े हो जाओ।” क्लिक। “देखो।” स्क्रीन पर वही चेहरा था। लेकिन पहली बार उसे लगा कि वो भी किसी से कम नहीं है। थोड़ी देर बाद सज्जन एक छपी हुई फोटो लेकर आए। “ये लो।” उसने कांपते हाथों से पकड़ी। अपनी पहली तस्वीर। आँखें भर आईं। “धन्यवाद…” वो खुशी-खुशी लौट गया। उस रात वो फोटो सीने से लगाकर सोया। उसके लिए वही उसकी सबसे बड़ी दौलत थी। **मुझे ज़माने की दौलत नहीं चाहिए, मेरी तस्वीर ही काफी है।**
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  • ## राज्य में अंधों की संख्या – अकबर बीरबल की कहानी

    एक दिन सम्राट अकबर ने राज्य के सभी अंधों को दान देने का निश्चय किया। उन्होंने आदेश दिया कि पूरे राज्य में दृष्टिहीन लोगों की सूची तैयार की जाए ताकि कोई भी वंचित न रहे।

    सूची तैयार होकर दरबार में प्रस्तुत हुई। अकबर ने वह सूची बीरबल को देकर दान बाँटने की व्यवस्था करने को कहा।

    सूची देखते ही बीरबल बोले, “महाराज, इसमें जितने नाम हैं, उनसे कहीं अधिक अंधे हमारे राज्य में हैं। सच तो यह है कि देखने वालों से ज़्यादा अंधे हैं।”

    अकबर चौंक गए। “यह कैसे संभव है? इसे सिद्ध करो,” उन्होंने चुनौती दी।

    अगले दिन बीरबल एक पुराने पलंग का ढांचा लेकर मुख्य चौराहे पर बैठ गए और उसकी रस्सी बुनने लगे। पास में एक सेवक कागज़-कलम लेकर खड़ा था।

    लोग आते, आश्चर्य से पूछते, “बीरबल, आप क्या कर रहे हैं?”
    बीरबल कुछ न कहते, बस सेवक को संकेत करते और सेवक कागज़ पर एक नाम लिख लेता।

    देखते ही देखते भीड़ जमा हो गई। हर कोई वही सवाल दोहराता रहा—“आप क्या कर रहे हैं?”

    शाम तक यह खबर अकबर तक पहुँची। वे स्वयं वहाँ आए और बोले, “बीरबल, यह क्या कर रहे हो?”

    सेवक ने फिर कागज़ पर एक नाम लिख लिया। तब बीरबल खड़े हुए और बोले, “महाराज, मैं अंधों की सूची बना रहा था।”

    उन्होंने वह सूची अकबर को थमा दी। अंत में अपना नाम देखकर अकबर हैरान रह गए।
    “मेरा नाम क्यों?” उन्होंने पूछा।

    बीरबल मुस्कुराए, “महाराज, आप स्पष्ट देख सकते थे कि मैं पलंग बुन रहा हूँ, फिर भी आपने पूछा कि मैं क्या कर रहा हूँ। जो सामने दिख रहा हो, उसे न देख पाना भी तो अंधापन ही है।”

    अकबर हँस पड़े और बोले, “तुम सही कहते हो, बीरबल। हमारे राज्य में आँखों से देखने वालों से ज़्यादा मन से अंधे लोग हैं।”

    सीख:
    सच्चा अंधापन आँखों का नहीं, समझ का होता है। जो स्पष्ट सत्य को भी न देख पाए, वही असली अंधा है।
    ## राज्य में अंधों की संख्या – अकबर बीरबल की कहानी एक दिन सम्राट अकबर ने राज्य के सभी अंधों को दान देने का निश्चय किया। उन्होंने आदेश दिया कि पूरे राज्य में दृष्टिहीन लोगों की सूची तैयार की जाए ताकि कोई भी वंचित न रहे। सूची तैयार होकर दरबार में प्रस्तुत हुई। अकबर ने वह सूची बीरबल को देकर दान बाँटने की व्यवस्था करने को कहा। सूची देखते ही बीरबल बोले, “महाराज, इसमें जितने नाम हैं, उनसे कहीं अधिक अंधे हमारे राज्य में हैं। सच तो यह है कि देखने वालों से ज़्यादा अंधे हैं।” अकबर चौंक गए। “यह कैसे संभव है? इसे सिद्ध करो,” उन्होंने चुनौती दी। अगले दिन बीरबल एक पुराने पलंग का ढांचा लेकर मुख्य चौराहे पर बैठ गए और उसकी रस्सी बुनने लगे। पास में एक सेवक कागज़-कलम लेकर खड़ा था। लोग आते, आश्चर्य से पूछते, “बीरबल, आप क्या कर रहे हैं?” बीरबल कुछ न कहते, बस सेवक को संकेत करते और सेवक कागज़ पर एक नाम लिख लेता। देखते ही देखते भीड़ जमा हो गई। हर कोई वही सवाल दोहराता रहा—“आप क्या कर रहे हैं?” शाम तक यह खबर अकबर तक पहुँची। वे स्वयं वहाँ आए और बोले, “बीरबल, यह क्या कर रहे हो?” सेवक ने फिर कागज़ पर एक नाम लिख लिया। तब बीरबल खड़े हुए और बोले, “महाराज, मैं अंधों की सूची बना रहा था।” उन्होंने वह सूची अकबर को थमा दी। अंत में अपना नाम देखकर अकबर हैरान रह गए। “मेरा नाम क्यों?” उन्होंने पूछा। बीरबल मुस्कुराए, “महाराज, आप स्पष्ट देख सकते थे कि मैं पलंग बुन रहा हूँ, फिर भी आपने पूछा कि मैं क्या कर रहा हूँ। जो सामने दिख रहा हो, उसे न देख पाना भी तो अंधापन ही है।” अकबर हँस पड़े और बोले, “तुम सही कहते हो, बीरबल। हमारे राज्य में आँखों से देखने वालों से ज़्यादा मन से अंधे लोग हैं।” सीख: सच्चा अंधापन आँखों का नहीं, समझ का होता है। जो स्पष्ट सत्य को भी न देख पाए, वही असली अंधा है।
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  • कहानी- पांच कटोरी खीर…

    "ओह तू खाने का कितना शौकीन था रे. याद है मां कहा करती थी कि बबुआ तो जैसे खाने के लिए ही जीता है. पर तू खीर तो खा इसमें तो घी-तेल नहीं." भैया ने खीर की तीसरी कटोरी ख़त्म करते हुए कहा.
    "अरे बबुआ दाल में घी ले न और ये क्या रोटी भी सूखी खा रहा है. बचपन में तो जब तक रोटी से घी नहीं टपकता था तेरे गले से रोटी नीचे नहीं उतरती थी." भैया ने अपनी दाल में दो चम्मच घी डालते हुए कहा.
    "वो भैया बीपी हाई रहता है तो तेल-घी खाना मना है." बबुआ अर्थात मल्टीनेशनल कंपनी के सीईओ ने जवाब दिया.
    "ओह तू खाने का कितना शौकीन था रे. याद है मां कहा करती थी कि बबुआ तो जैसे खाने के लिए ही जीता है. पर तू खीर तो खा इसमें तो घी-तेल नहीं." भैया ने खीर की तीसरी कटोरी ख़त्म करते हुए कहा.
    "नहीं भैया, पिछले साल से डायबिटीज़ हो गया है. मीठा तो एकदम बंद है." रवि ने खीर से नज़रें चुराते हुए कहा.
    "ओह! खैर कोई बात नहीं. आलीशान मकान, बड़ी-बड़ी गाडियां, नौकर-चाकर, इतना रौबदाब. अच्छा हुआ तू पढ़-लिख गया. कितना सुखी है अब. काश बाबा की बात मानकर मैं भी..." भैया ने रवि के वैभव पर हसरत भरी नज़र डालते हुए कहा. कहां गांव की वो दिनभर तपती धूप में झुलसती रूखी हाड़तोड़ मेहनत भरी ज़िंदगी कहां चौबीसों घंटे एसी की ठंडक.
    उधर भैया को खीर की पांचवीं कटोरी भरते देख रवि मन ही मन बोला, 'कितने सुखी हैं भैया, न महंगे बोर्डिंग स्कूलों की मोटी फीस की चिंता, न स्टेटस मेंटेन करने का तनाव. उस पर गांव की ताज़ी शुद्ध हवा. आठ साल बड़े होकर भी न बीपी, न शुगर, न इम्सोमनिया, न और कोई लाइफस्टाइल बीमारी. छक कर मलाई वाली मीठी चाय पीते हैं, तर घी के हलवे का नाश्ता. शुद्ध घी के पराठे और...
    काश मैं भी पढ़ाई छोड़ देता तो आज पांच कटोरी मेवे डली खीर खा रहा होता.'
    कहानी- पांच कटोरी खीर… "ओह तू खाने का कितना शौकीन था रे. याद है मां कहा करती थी कि बबुआ तो जैसे खाने के लिए ही जीता है. पर तू खीर तो खा इसमें तो घी-तेल नहीं." भैया ने खीर की तीसरी कटोरी ख़त्म करते हुए कहा. "अरे बबुआ दाल में घी ले न और ये क्या रोटी भी सूखी खा रहा है. बचपन में तो जब तक रोटी से घी नहीं टपकता था तेरे गले से रोटी नीचे नहीं उतरती थी." भैया ने अपनी दाल में दो चम्मच घी डालते हुए कहा. "वो भैया बीपी हाई रहता है तो तेल-घी खाना मना है." बबुआ अर्थात मल्टीनेशनल कंपनी के सीईओ ने जवाब दिया. "ओह तू खाने का कितना शौकीन था रे. याद है मां कहा करती थी कि बबुआ तो जैसे खाने के लिए ही जीता है. पर तू खीर तो खा इसमें तो घी-तेल नहीं." भैया ने खीर की तीसरी कटोरी ख़त्म करते हुए कहा. "नहीं भैया, पिछले साल से डायबिटीज़ हो गया है. मीठा तो एकदम बंद है." रवि ने खीर से नज़रें चुराते हुए कहा. "ओह! खैर कोई बात नहीं. आलीशान मकान, बड़ी-बड़ी गाडियां, नौकर-चाकर, इतना रौबदाब. अच्छा हुआ तू पढ़-लिख गया. कितना सुखी है अब. काश बाबा की बात मानकर मैं भी..." भैया ने रवि के वैभव पर हसरत भरी नज़र डालते हुए कहा. कहां गांव की वो दिनभर तपती धूप में झुलसती रूखी हाड़तोड़ मेहनत भरी ज़िंदगी कहां चौबीसों घंटे एसी की ठंडक. उधर भैया को खीर की पांचवीं कटोरी भरते देख रवि मन ही मन बोला, 'कितने सुखी हैं भैया, न महंगे बोर्डिंग स्कूलों की मोटी फीस की चिंता, न स्टेटस मेंटेन करने का तनाव. उस पर गांव की ताज़ी शुद्ध हवा. आठ साल बड़े होकर भी न बीपी, न शुगर, न इम्सोमनिया, न और कोई लाइफस्टाइल बीमारी. छक कर मलाई वाली मीठी चाय पीते हैं, तर घी के हलवे का नाश्ता. शुद्ध घी के पराठे और... काश मैं भी पढ़ाई छोड़ देता तो आज पांच कटोरी मेवे डली खीर खा रहा होता.'
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  • 👉👉जयपुर स्थित हवामहल का रियासतकालीन दृश्य, जब जनसंख्या कम व शांति ज्यादा हुआ करती थी👈👈
    👉👉जयपुर स्थित हवामहल का रियासतकालीन दृश्य, जब जनसंख्या कम व शांति ज्यादा हुआ करती थी👈👈
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  • 👉👉जोधपुर के मेहरानगढ़ दुर्ग पर सुसज्जित तोपें जो रियासतकाल में पूरे जोधपुर शहर को कवर करती थी👈👈
    👉👉जोधपुर के मेहरानगढ़ दुर्ग पर सुसज्जित तोपें जो रियासतकाल में पूरे जोधपुर शहर को कवर करती थी👈👈
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  • राजस्थान सरकार स्टेट टेस्टिंग एजेंसी की स्थापना करने जा रही है। RPSC के घोटालों की लड़ी लगी हुई है। ना जाने कितने घोटाले किए वो सब अब सामने आ रहे है। सबसे पुरानी व मजबूत आयोग RPSC में ही घोटाले हो रहे है, यही पेपर लीक नहीं रोक पाई, रोकना तो छोड़े इस कमीशन में बैठे लोग ही पेपर लीक करने में लग गए। ऐसे में सवाल यह है कि क्या स्टेट टेस्टिंग एजेंसी पेपर लीक रोक पायेगी, क्या इस एजेंसी में घोटाले नहीं होंगे। RPSC के कारनामे देखते हुए सवाल तो जायज है। सत्ताधारी लोग RPSC पर ही कड़े प्रतिबंध नहीं लगा पाए, तो क्या ये एंजेसी कारगर हो पायेगी।
    सच में सुदृढ़ व्यवस्था बनानी है तो नियम कठोर करने होंगे। किसी को बक्सा ना जाए चाहे फिर मगरमच्छ हो या मछली। RPSC हो या कर्मचारी चयन बोर्ड या कोई भी प्रतियोगी परीक्षा कराने वाला बोर्ड या एजेंसी उनमें किसी भी सेवानिवृत्त व्यक्ति, राजनीतिक व्यक्ति को चेयरमैन एवं सदस्य पद पर नहीं लगाकर, ऑन सर्विस किसी IAS या किसी सीनियर प्रोफेसर या इस लेवल के किसी व्यक्ति को लगाना होगा तब जाकर व्यवस्था सुदृढ़ होगी और तभी ही पेपर लीक, घोटाले रुक सकते है। वरना एजेंसियां बनाने से घोटाले, पेपर लीक नहीं रुकते बस दरवाजे बदल जाते है मतलब तरीके बदल जाते है।
    राजस्थान सरकार स्टेट टेस्टिंग एजेंसी की स्थापना करने जा रही है। RPSC के घोटालों की लड़ी लगी हुई है। ना जाने कितने घोटाले किए वो सब अब सामने आ रहे है। सबसे पुरानी व मजबूत आयोग RPSC में ही घोटाले हो रहे है, यही पेपर लीक नहीं रोक पाई, रोकना तो छोड़े इस कमीशन में बैठे लोग ही पेपर लीक करने में लग गए। ऐसे में सवाल यह है कि क्या स्टेट टेस्टिंग एजेंसी पेपर लीक रोक पायेगी, क्या इस एजेंसी में घोटाले नहीं होंगे। RPSC के कारनामे देखते हुए सवाल तो जायज है। सत्ताधारी लोग RPSC पर ही कड़े प्रतिबंध नहीं लगा पाए, तो क्या ये एंजेसी कारगर हो पायेगी। सच में सुदृढ़ व्यवस्था बनानी है तो नियम कठोर करने होंगे। किसी को बक्सा ना जाए चाहे फिर मगरमच्छ हो या मछली। RPSC हो या कर्मचारी चयन बोर्ड या कोई भी प्रतियोगी परीक्षा कराने वाला बोर्ड या एजेंसी उनमें किसी भी सेवानिवृत्त व्यक्ति, राजनीतिक व्यक्ति को चेयरमैन एवं सदस्य पद पर नहीं लगाकर, ऑन सर्विस किसी IAS या किसी सीनियर प्रोफेसर या इस लेवल के किसी व्यक्ति को लगाना होगा तब जाकर व्यवस्था सुदृढ़ होगी और तभी ही पेपर लीक, घोटाले रुक सकते है। वरना एजेंसियां बनाने से घोटाले, पेपर लीक नहीं रुकते बस दरवाजे बदल जाते है मतलब तरीके बदल जाते है।
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  • आज के दिन शुरू हुई पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना ने देश के लाखों घरों में रोशनी ही नहीं, बल्कि ऊर्जा आत्मनिर्भरता भी प्रदान की है।
    यह दूरदर्शी और महत्वाकांक्षी पहल न केवल बिजली के बिल में राहत दे रही है, बल्कि देश को स्वच्छ एवं सतत ऊर्जा की दिशा में सशक्त बना रही है।
    आप भी, सौर ऊर्जा अपनाकर उज्ज्वल भविष्य की ओर कदम बढ़ाएं।

    #PMSuryaGhar #RoofTopSolar
    #EnergyForFuture
    आज के दिन शुरू हुई पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना ने देश के लाखों घरों में रोशनी ही नहीं, बल्कि ऊर्जा आत्मनिर्भरता भी प्रदान की है। यह दूरदर्शी और महत्वाकांक्षी पहल न केवल बिजली के बिल में राहत दे रही है, बल्कि देश को स्वच्छ एवं सतत ऊर्जा की दिशा में सशक्त बना रही है। आप भी, सौर ऊर्जा अपनाकर उज्ज्वल भविष्य की ओर कदम बढ़ाएं। #PMSuryaGhar #RoofTopSolar #EnergyForFuture
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