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  • रुई का चोर

    सूत कातने के लिए रुई अकबर बाहर से मँगवाते थे कई लोगों की आजीविका उससे चलती थी।

    शुरू में तो सब अच्छा चला पर फिर रुई की चोर बाज़ारी होने लगी।

    चोर बाज़ारी कौन कर रहा था, पता ही नहीं चल रहा था।

    अकबर ने और अधिक रुई मँगवाई जिससे जुलाहों को नुकसान न हो और उनकी आजीविका चलती रहे।

    पर कोई लाभ न हुआ। चोर बाज़ारी के कारण रुई का अभाव ही रहा।

    क्रोधित होकर बादशाह ने रुई मँगवाना ही बंद कर दिया।

    बेचारे जुलाहे परेशान हो गए। वे बीरबल के पास सहायता लेने गए।

    बीरबल ने उन्हें आश्वासन देकर लौटा दिया। बीरबल ने अकबर से कहा, “महाराज! आप

    रुई का आयात न रोकें। रुई के चोरों को मैं पकडूंगा।”

    बीरबल को पता था कि बिचौलिया ही रुई को दबा कर अधिक दामों में बेचते हैं।

    उसने रुई के आढ़तियों को बुलाकर कहा, “जितनी रुई मँगवाई गई वह कातने वालों तक नहीं पहुँची।

    कुछ चोर रुई को अपनी पगड़ी में छिपा लेते हैं।

    मैं जानता हूँ चोर यहीं हैं पगड़ी स्वयं ही मुझे चोर का पता बता देगी।"

    दोषी आढ़तियों ने एक-दूसरे को देखा।

    एक आदमी डर के मारे अपनी पगड़ी ठीक करने लगा कि कहीं पगड़ी पर रुई तो नहीं लगी है...

    बीरबल की नज़रों ने तुरंत ताड़ लिया। बस फिर क्या था... चोर पकड़ा गया।

    उसके गोदाम से रुई की गाठें बरामद की गईं।

    रुई का काम फिर से प्रारम्भ हो गया और गरीबों को आजीविका मिलने लगी।
    रुई का चोर सूत कातने के लिए रुई अकबर बाहर से मँगवाते थे कई लोगों की आजीविका उससे चलती थी। शुरू में तो सब अच्छा चला पर फिर रुई की चोर बाज़ारी होने लगी। चोर बाज़ारी कौन कर रहा था, पता ही नहीं चल रहा था। अकबर ने और अधिक रुई मँगवाई जिससे जुलाहों को नुकसान न हो और उनकी आजीविका चलती रहे। पर कोई लाभ न हुआ। चोर बाज़ारी के कारण रुई का अभाव ही रहा। क्रोधित होकर बादशाह ने रुई मँगवाना ही बंद कर दिया। बेचारे जुलाहे परेशान हो गए। वे बीरबल के पास सहायता लेने गए। बीरबल ने उन्हें आश्वासन देकर लौटा दिया। बीरबल ने अकबर से कहा, “महाराज! आप रुई का आयात न रोकें। रुई के चोरों को मैं पकडूंगा।” बीरबल को पता था कि बिचौलिया ही रुई को दबा कर अधिक दामों में बेचते हैं। उसने रुई के आढ़तियों को बुलाकर कहा, “जितनी रुई मँगवाई गई वह कातने वालों तक नहीं पहुँची। कुछ चोर रुई को अपनी पगड़ी में छिपा लेते हैं। मैं जानता हूँ चोर यहीं हैं पगड़ी स्वयं ही मुझे चोर का पता बता देगी।" दोषी आढ़तियों ने एक-दूसरे को देखा। एक आदमी डर के मारे अपनी पगड़ी ठीक करने लगा कि कहीं पगड़ी पर रुई तो नहीं लगी है... बीरबल की नज़रों ने तुरंत ताड़ लिया। बस फिर क्या था... चोर पकड़ा गया। उसके गोदाम से रुई की गाठें बरामद की गईं। रुई का काम फिर से प्रारम्भ हो गया और गरीबों को आजीविका मिलने लगी।
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  • सबसे अच्छा कौन?

    एक बार बादशाह अकबर ने अपने दरबारियों से तीन प्रश्न पूछेः-

    1. किसका पुत्र सबसे अच्छा है?

    2. किसका दाँत सबसे अच्छा है?

    3. कौन-सा गुण सबसे अच्छा है?

    कुछ देर सोचने के बाद दरबारियों ने उत्तर दिया, “हुजूर, एक राजा का पुत्र अच्छा है,

    हाथी का दाँत अच्छा है, ज्ञान होना अच्छा गुण है।"

    पर बादशाह इस उत्तर से संतुष्ट नहीं हुए। जब बीरबल

    आया तब उन्होंने यही सवाल बीरबल से किया।

    कुछ पल विचारकर बीरबल

    ने कहा, “बादशाह हुजूर, गाय का बछड़ा सबसे अच्छा है।

    वह खेत जोतता है और उसके गोबर से खाद बनता है।

    जब फ़सल तैयार होती है तब सभी को भोजन मिलता है।"

    "दूसरे प्रश्न के उत्तर के रूप में हल का दाँत (हल का अगला भाग) सबसे अच्छा है।

    वह धरती को जोतता है, मिट्टी को उपजाऊ बनाता है और अन्न उपजाता है।

    अंततः साहस सबसे अच्छा गुण है।

    बुद्धिमान होने पर भी साहस के अभाव में व्यक्ति कुछ नहीं कर सकता है...' बीरबल ने अपनी बात पूरी की।

    अकबर और दरबारी बीरबल के उत्तर से प्रसन्न हो गए और उन्होंने बीरबल की खूब प्रशंसा की।
    सबसे अच्छा कौन? एक बार बादशाह अकबर ने अपने दरबारियों से तीन प्रश्न पूछेः- 1. किसका पुत्र सबसे अच्छा है? 2. किसका दाँत सबसे अच्छा है? 3. कौन-सा गुण सबसे अच्छा है? कुछ देर सोचने के बाद दरबारियों ने उत्तर दिया, “हुजूर, एक राजा का पुत्र अच्छा है, हाथी का दाँत अच्छा है, ज्ञान होना अच्छा गुण है।" पर बादशाह इस उत्तर से संतुष्ट नहीं हुए। जब बीरबल आया तब उन्होंने यही सवाल बीरबल से किया। कुछ पल विचारकर बीरबल ने कहा, “बादशाह हुजूर, गाय का बछड़ा सबसे अच्छा है। वह खेत जोतता है और उसके गोबर से खाद बनता है। जब फ़सल तैयार होती है तब सभी को भोजन मिलता है।" "दूसरे प्रश्न के उत्तर के रूप में हल का दाँत (हल का अगला भाग) सबसे अच्छा है। वह धरती को जोतता है, मिट्टी को उपजाऊ बनाता है और अन्न उपजाता है। अंततः साहस सबसे अच्छा गुण है। बुद्धिमान होने पर भी साहस के अभाव में व्यक्ति कुछ नहीं कर सकता है...' बीरबल ने अपनी बात पूरी की। अकबर और दरबारी बीरबल के उत्तर से प्रसन्न हो गए और उन्होंने बीरबल की खूब प्रशंसा की।
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  • बीरबल के गुरु

    एक दिन अकबर ने कहा, “बीरबल, मैं तुम्हारे गुरु से मिलना चाहता हूँ।”

    बीरबल का कोई गुरु था ही नहीं पर वह बादशाह को यह बताना नहीं चाहता था।

    उसने झूठ बोलते हुए कहा कि उसके गए हुए हैं।

    फिर भी अकबर गुरु से मिलने पर जोर देते रहे।

    बीरबल ने एक गरीब गड़रिए तीर्थाटन पर गुरु को अपना गुरु बनने का प्रशिक्षण दिया।

    इस कार्य को करने के लिए बीरबल

    ने उसे पचास स्वर्ण मुद्राएँ दीं।

    गड़रिए ने अपना रूप बदलकर एक साधु

    का रूप धर लिया। कई माह बाद बीरबल अकबर को अपने

    कहा,

    गुरु से मिलाने ले गया।

    अकबर ने गुरु का अभिनन्दन कर 'आपका अभिनन्दन है गुरु जी, मैं आपसे कुछ बातें करना चाहता हूँ।”

    गुरु मौन रहे। अकबर ने सोचा कि शायद उन्हें धन चाहिए... उन्होंने अशर्फ़ियों का कटोरा उनके सामने रखा।

    फिर भी गुरु जी ने कुछ नहीं कहा।

    रुष्ट होकर अकबर अपने महल लौट आए।

    उन्होंने बीरबल को बुलाकर पूछा, "एक मूर्ख से मिलने पर हमें क्या करना चाहिए?"

    छूटते ही बीरबल ने कहा, " शांत

    रहें।" अकबर को एक झटका लगा।

    उन्होंने सोचा... स्वर्ण मुद्राएँ देने के कारण अवश्य ही गुरु जी ने मुझे मूर्ख समझ लिया होगा इसीलिए वे शांत रहे।
    बीरबल के गुरु एक दिन अकबर ने कहा, “बीरबल, मैं तुम्हारे गुरु से मिलना चाहता हूँ।” बीरबल का कोई गुरु था ही नहीं पर वह बादशाह को यह बताना नहीं चाहता था। उसने झूठ बोलते हुए कहा कि उसके गए हुए हैं। फिर भी अकबर गुरु से मिलने पर जोर देते रहे। बीरबल ने एक गरीब गड़रिए तीर्थाटन पर गुरु को अपना गुरु बनने का प्रशिक्षण दिया। इस कार्य को करने के लिए बीरबल ने उसे पचास स्वर्ण मुद्राएँ दीं। गड़रिए ने अपना रूप बदलकर एक साधु का रूप धर लिया। कई माह बाद बीरबल अकबर को अपने कहा, गुरु से मिलाने ले गया। अकबर ने गुरु का अभिनन्दन कर 'आपका अभिनन्दन है गुरु जी, मैं आपसे कुछ बातें करना चाहता हूँ।” गुरु मौन रहे। अकबर ने सोचा कि शायद उन्हें धन चाहिए... उन्होंने अशर्फ़ियों का कटोरा उनके सामने रखा। फिर भी गुरु जी ने कुछ नहीं कहा। रुष्ट होकर अकबर अपने महल लौट आए। उन्होंने बीरबल को बुलाकर पूछा, "एक मूर्ख से मिलने पर हमें क्या करना चाहिए?" छूटते ही बीरबल ने कहा, " शांत रहें।" अकबर को एक झटका लगा। उन्होंने सोचा... स्वर्ण मुद्राएँ देने के कारण अवश्य ही गुरु जी ने मुझे मूर्ख समझ लिया होगा इसीलिए वे शांत रहे।
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  • बीरबल और चोर

    एक सुबह अकबर का दरबार सजा हुआ था, कार्यवाही चल रही थी।

    तभी एक समृद्ध व्यक्ति ने आकर कहा, “मेरे पैसों की चोरी हो गई है।

    मुझे मेरे सेवक पर शंका है पर किसने चोरी की है यह मैं नहीं बता सकता।

    कृपया मेरी सहायता करें।”

    बीरबल ने समृद्ध व्यक्ति के घर जाकर सेवकों से पूछा कि क्या उन्होंने चोरी की थी पर उन सब ने नकार दिया।

    कुछ पल सोचकर बीरबल ने सभी सेवक को एक-एक छड़ी देकर कहा, “यह जादुई छड़ी है।

    अभी यह सब एक बराबर हैं पर चोरी करने वाले की छड़ी कल सुबह तक दो इंच बढ़ जाएगी।

    तुम सब घर जाओ और कल सुबह छड़ी लेकर आना।"

    अगले दिन बीरबल ने ध्यानपूर्वक उन सबकी छड़ियों को देखा। उसे एक छड़ी दो इंच छोटी लगी। “ओ हो! तो तुमने ही चोरी की है... ये

    छड़ियाँ साभ्गरण छड़ियाँ ही हैं।

    इनमें कोई जादू नहीं है।

    तुम्हें मेरी बात पर भरोसा हो गया और तुमने अपनी छड़ी दो इंच छोटी कर दी।

    " फिर समृद्ध व्यक्ति से बीरबल ने कहा, “वही चोर है
    बीरबल और चोर एक सुबह अकबर का दरबार सजा हुआ था, कार्यवाही चल रही थी। तभी एक समृद्ध व्यक्ति ने आकर कहा, “मेरे पैसों की चोरी हो गई है। मुझे मेरे सेवक पर शंका है पर किसने चोरी की है यह मैं नहीं बता सकता। कृपया मेरी सहायता करें।” बीरबल ने समृद्ध व्यक्ति के घर जाकर सेवकों से पूछा कि क्या उन्होंने चोरी की थी पर उन सब ने नकार दिया। कुछ पल सोचकर बीरबल ने सभी सेवक को एक-एक छड़ी देकर कहा, “यह जादुई छड़ी है। अभी यह सब एक बराबर हैं पर चोरी करने वाले की छड़ी कल सुबह तक दो इंच बढ़ जाएगी। तुम सब घर जाओ और कल सुबह छड़ी लेकर आना।" अगले दिन बीरबल ने ध्यानपूर्वक उन सबकी छड़ियों को देखा। उसे एक छड़ी दो इंच छोटी लगी। “ओ हो! तो तुमने ही चोरी की है... ये छड़ियाँ साभ्गरण छड़ियाँ ही हैं। इनमें कोई जादू नहीं है। तुम्हें मेरी बात पर भरोसा हो गया और तुमने अपनी छड़ी दो इंच छोटी कर दी। " फिर समृद्ध व्यक्ति से बीरबल ने कहा, “वही चोर है
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  • बीरबल, हसन और लोहे की गरम सरिया

    एक दिन एक व्यक्ति ने अकबर के दरबार में जाकर कहा कि

    हसन नामक एक गरीब व्यक्ति ने उसका गले का हार चुरा लिया था।

    अकबर ने पूछा, “तुम्हें कैसे पता कि हसन ने चुराया है?” “मैंने हसन

    को हार चुराते देखा था।

    " किन्तु हसन ने बार-बार यही कहा, "नहीं श्रीमान्, मैंने हार नहीं

    चुराया।" उस व्यक्ति ने कहा, “यदि तुमने हार नहीं चुराया तो तुम्हें प्रमाण देना पड़ेगा।

    लोहे की गरम सरिया को तुम्हें अपने हाथों से पकड़ना होगा।

    यदि तुम्हारा हाथ नहीं जलेगा तो तुम्हें निर्दोष माना जाएगा और यदि तुम्हारा हाथ जलेगा तो चोरी तुमने ही की है।

    " हसन ने कहा, "कृपया मुझे एक दिन का समय दें, मैं हार फिर से ढूँढ़ता हूँ।"

    हसन भागा-भागा बीरबल के पास सलाह लेने गया।

    अगले दिन बीरबल की सलाह पर हसन ने कहा, “महाराज, मैं प्रमाणित करने के लिए तैयार हूँ पर पहले इन्हें यह परीक्षा देनी होगी।

    यदि इनकी बातों में सच्चाई है तो गर्म सरिए से इनके हाथ भी नहीं जलने चाहिए।

    " यह सुनकर वह व्यक्ति डर गया।

    उसने कहा, “एक बार मुझे फिर से देख लेने दीजिए।

    संभव है हार मेरे घर के किसी कोने में गिर गया हो।

    " यह कहकर महाराज का अभिवादन कर वह भाग खड़ा हुआ।
    बीरबल, हसन और लोहे की गरम सरिया एक दिन एक व्यक्ति ने अकबर के दरबार में जाकर कहा कि हसन नामक एक गरीब व्यक्ति ने उसका गले का हार चुरा लिया था। अकबर ने पूछा, “तुम्हें कैसे पता कि हसन ने चुराया है?” “मैंने हसन को हार चुराते देखा था। " किन्तु हसन ने बार-बार यही कहा, "नहीं श्रीमान्, मैंने हार नहीं चुराया।" उस व्यक्ति ने कहा, “यदि तुमने हार नहीं चुराया तो तुम्हें प्रमाण देना पड़ेगा। लोहे की गरम सरिया को तुम्हें अपने हाथों से पकड़ना होगा। यदि तुम्हारा हाथ नहीं जलेगा तो तुम्हें निर्दोष माना जाएगा और यदि तुम्हारा हाथ जलेगा तो चोरी तुमने ही की है। " हसन ने कहा, "कृपया मुझे एक दिन का समय दें, मैं हार फिर से ढूँढ़ता हूँ।" हसन भागा-भागा बीरबल के पास सलाह लेने गया। अगले दिन बीरबल की सलाह पर हसन ने कहा, “महाराज, मैं प्रमाणित करने के लिए तैयार हूँ पर पहले इन्हें यह परीक्षा देनी होगी। यदि इनकी बातों में सच्चाई है तो गर्म सरिए से इनके हाथ भी नहीं जलने चाहिए। " यह सुनकर वह व्यक्ति डर गया। उसने कहा, “एक बार मुझे फिर से देख लेने दीजिए। संभव है हार मेरे घर के किसी कोने में गिर गया हो। " यह कहकर महाराज का अभिवादन कर वह भाग खड़ा हुआ।
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  • " बराबरी की सोच भी मत रखना ऐ दोस्त,
    हम वो किरदार हैं जो वक़्त भी तराशे,
    जो दिखा है अभी वो बस एक झलक भर है,
    असली कहानी तो अभी इतिहास में लिखी जानी है। "

    =============== END ===============

    #ShayariLovers, #HindiShayari, #AttitudeShayari, #RoyalShayari, #UniqueShayari, #PremiumShayari, #UrduShayari, #PoetryCommunity, #PoetryGram, #InstaShayari, #ShayariStatus, #WordsOfPower, #BoldWords, #AlphaMindset, #SuccessQuotes, #MotivationDaily, #PowerfulLines, #EliteMindset, #LuxuryLifeMindset, #HighValueContent
    " बराबरी की सोच भी मत रखना ऐ दोस्त, हम वो किरदार हैं जो वक़्त भी तराशे, जो दिखा है अभी वो बस एक झलक भर है, असली कहानी तो अभी इतिहास में लिखी जानी है। " =============== END =============== #ShayariLovers, #HindiShayari, #AttitudeShayari, #RoyalShayari, #UniqueShayari, #PremiumShayari, #UrduShayari, #PoetryCommunity, #PoetryGram, #InstaShayari, #ShayariStatus, #WordsOfPower, #BoldWords, #AlphaMindset, #SuccessQuotes, #MotivationDaily, #PowerfulLines, #EliteMindset, #LuxuryLifeMindset, #HighValueContent
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  • कर्ज वाली बहु

    एक 15 साल का भाई अपने पापा से कहा "पापा पापा दीदी के होने वाले ससुर और सास कल आ रहे है" अभी जीजाजी ने फोन पर बताया।

    दीदी मतलब उसकी बड़ी बहन की सगाई कुछ दिन पहले एक अच्छे घर में तय हुई थी।

    दीनदयाल जी पहले से ही उदास बैठे थे धीरे से बोले हां बेटा, उनका कल ही फोन आया था कि वो एक दो दिन में दहेज की बात करने आ रहे हैं ।

    बोले- दहेज के बारे में आप से ज़रूरी बात करनी है ।

    बड़ी मुश्किल से यह अच्छा लड़का मिला था, कल को उनकी दहेज की मांग इतनी ज़्यादा हो कि मैं पूरी नही कर पाया तो ?

    कहते कहते उनकी आँखें भर आयीं ।

    घर के प्रत्येक सदस्य के मन व चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई दे रही थी ।

    लड़की भी उदास हो गयी ।

    खैर, अगले दिन समधी समधिन आए.. उनकी खूब आवभगत की गयी ।

    कुछ देर बैठने के बाद लड़के के पिता ने लड़की के पिता से कहा" दीनदयाल जी अब काम की बात हो जाए ।

    दीनदयाल जी की धड़कन बढ़ गयी, बोले.. हां हां.. समधी जी.. जो आप हुकुम करें ।

    लड़के के पिताजी ने धीरे से अपनी कुर्सी दीनदयाल जी और खिसकाई ओर धीरे से उनके कान में बोले. दीनदयाल जी मुझे दहेज के बारे बात करनी है!

    दीनदयाल जी हाथ जोड़ते हुये आँखों में पानी लिए हुए बोले बताईए समधी जी....जो आप को उचित लगे.. मैं पूरी कोशिश करूंगा ।

    समधी जी ने धीरे से दीनदयाल जी का हाथ अपने हाथों से दबाते हुये बस इतना ही कहा ।

    आप कन्यादान में कुछ भी देगें या ना भी देंगे... थोड़ा देंगे या ज़्यादा देंगे.. मुझे सब स्वीकार है ।

    पर कर्ज लेकर आप एक रुपया भी दहेज मत देना.. वो मुझे स्वीकार नहीं ।

    क्योकि जो बेटी अपने बाप को कर्ज में डुबो दे वैसी "कर्ज वाली लक्ष्मी" मुझे स्वीकार नही ।

    मुझे बिना कर्ज वाली बहू ही चाहिए.. जो मेरे यहाँ आकर मेरी सम्पति को दो गुना कर देगी ।

    दीनदयाल जी हैरान हो गए.. उनसे गले मिलकर बोले.. समधी जी बिल्कुल ऐसा ही होगा ।

    शिक्षा- * कर्ज वाली लक्ष्मी ना कोई विदा करें नही कोई स्वीकार करे *
    कर्ज वाली बहु एक 15 साल का भाई अपने पापा से कहा "पापा पापा दीदी के होने वाले ससुर और सास कल आ रहे है" अभी जीजाजी ने फोन पर बताया। दीदी मतलब उसकी बड़ी बहन की सगाई कुछ दिन पहले एक अच्छे घर में तय हुई थी। दीनदयाल जी पहले से ही उदास बैठे थे धीरे से बोले हां बेटा, उनका कल ही फोन आया था कि वो एक दो दिन में दहेज की बात करने आ रहे हैं । बोले- दहेज के बारे में आप से ज़रूरी बात करनी है । बड़ी मुश्किल से यह अच्छा लड़का मिला था, कल को उनकी दहेज की मांग इतनी ज़्यादा हो कि मैं पूरी नही कर पाया तो ? कहते कहते उनकी आँखें भर आयीं । घर के प्रत्येक सदस्य के मन व चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई दे रही थी । लड़की भी उदास हो गयी । खैर, अगले दिन समधी समधिन आए.. उनकी खूब आवभगत की गयी । कुछ देर बैठने के बाद लड़के के पिता ने लड़की के पिता से कहा" दीनदयाल जी अब काम की बात हो जाए । दीनदयाल जी की धड़कन बढ़ गयी, बोले.. हां हां.. समधी जी.. जो आप हुकुम करें । लड़के के पिताजी ने धीरे से अपनी कुर्सी दीनदयाल जी और खिसकाई ओर धीरे से उनके कान में बोले. दीनदयाल जी मुझे दहेज के बारे बात करनी है! दीनदयाल जी हाथ जोड़ते हुये आँखों में पानी लिए हुए बोले बताईए समधी जी....जो आप को उचित लगे.. मैं पूरी कोशिश करूंगा । समधी जी ने धीरे से दीनदयाल जी का हाथ अपने हाथों से दबाते हुये बस इतना ही कहा । आप कन्यादान में कुछ भी देगें या ना भी देंगे... थोड़ा देंगे या ज़्यादा देंगे.. मुझे सब स्वीकार है । पर कर्ज लेकर आप एक रुपया भी दहेज मत देना.. वो मुझे स्वीकार नहीं । क्योकि जो बेटी अपने बाप को कर्ज में डुबो दे वैसी "कर्ज वाली लक्ष्मी" मुझे स्वीकार नही । मुझे बिना कर्ज वाली बहू ही चाहिए.. जो मेरे यहाँ आकर मेरी सम्पति को दो गुना कर देगी । दीनदयाल जी हैरान हो गए.. उनसे गले मिलकर बोले.. समधी जी बिल्कुल ऐसा ही होगा । शिक्षा- * कर्ज वाली लक्ष्मी ना कोई विदा करें नही कोई स्वीकार करे *
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  • माँ दुर्गा नें जब नष्ट किया देवगण का अभिमान

    देवताओं और राक्षसों के बीच एक बार अत्यंत भीषण युद्ध हुआ। रक्त से सराबोर इस लड़ाई में अंततः देवगण विजयी हुए। जीत के मद में देव गण अभिमान और घमंड से भर गए। तथा स्वयं को सर्वोत्तम मानने लगे। देवताओं के इस मिथ्या अभिमान को नष्ट करने हेतु माँ दुर्गा नें तेजपुंज का रूप धारण किया और फिर देवताओं के समक्ष प्रकट हुईं। तेजपुंज विराट स्वरूप देख कर समस्त देवगण भयभीत हो उठे। और तब सभी देवताओं के राजा इन्द्र नें वरुण देव को तेजपुंज का रहस्य जानने के लिए आगे भेजा।

    तेजपुंज के सामने जा कर वरुण देव अपनी शक्तियों का बखान करने लगे। और तेजपुंज से उसका परिचय मांगने लगे। तब तेजपुंज नें वरुण देव के सामने एक अदना सा, छोटा सा तिनका रखा और उन्हे कहा की तुम वास्तव में इतने बलशाली हो जितना तुम खुद का बखान कर रहे हो तो इस तिनके को उड़ा कर दिखाओ।

    वरुण देव नें एड़ी-चोटी का बल लगा दिया पर उनसे वह तिनका रत्ती भर भी हिल नहीं पाया और उनका घमंड चूर-चूर हो गया। अंत में वह वापस लौटे और उन्होने वह वास्तविकता इन्द्र देव से कही ।

    इन्द्र देव नें फिर अग्नि देव को भेजा। तेजपुंज नें अग्नि देव से कहा की अपने बल और पराक्रम से इस तिनके को भस्म कर के बताइये।

    अग्नि देव नें भी इस कार्य को पार लगाने में अपनी समस्त शक्ति झोंक दी। पर कुछ भी नहीं कर पाये। अंत में वह भी सिर झुकाये इन्द्र देव के पास लौट आए। इस तरह एक एक-कर के समस्त देवता तेजपुंज की चुनौती से परास्त हुए तब अंत में देव राज इन्द्र खुद मैदान में आए पर उन्हे भी सफलता प्राप्त ना हुई।

    अंत में समस्त देव गण नें तेजपुंज से हार मान कर वहाँ उनकी आराधना करना शुरू कर दिया। तब तेजपुंज रूप में आई माँ दुर्गा में अपना वास्तविक रूप दिखाया और देवताओं को यह ज्ञान दिया की माँ शक्ति के आशीष से आप सब नें दानवों को परास्त किया है। तब देवताओं नें भी अपनी गलती के लिए क्षमा मांगी और अपना मिथ्या अभिमान त्याग दिया।
    माँ दुर्गा नें जब नष्ट किया देवगण का अभिमान देवताओं और राक्षसों के बीच एक बार अत्यंत भीषण युद्ध हुआ। रक्त से सराबोर इस लड़ाई में अंततः देवगण विजयी हुए। जीत के मद में देव गण अभिमान और घमंड से भर गए। तथा स्वयं को सर्वोत्तम मानने लगे। देवताओं के इस मिथ्या अभिमान को नष्ट करने हेतु माँ दुर्गा नें तेजपुंज का रूप धारण किया और फिर देवताओं के समक्ष प्रकट हुईं। तेजपुंज विराट स्वरूप देख कर समस्त देवगण भयभीत हो उठे। और तब सभी देवताओं के राजा इन्द्र नें वरुण देव को तेजपुंज का रहस्य जानने के लिए आगे भेजा। तेजपुंज के सामने जा कर वरुण देव अपनी शक्तियों का बखान करने लगे। और तेजपुंज से उसका परिचय मांगने लगे। तब तेजपुंज नें वरुण देव के सामने एक अदना सा, छोटा सा तिनका रखा और उन्हे कहा की तुम वास्तव में इतने बलशाली हो जितना तुम खुद का बखान कर रहे हो तो इस तिनके को उड़ा कर दिखाओ। वरुण देव नें एड़ी-चोटी का बल लगा दिया पर उनसे वह तिनका रत्ती भर भी हिल नहीं पाया और उनका घमंड चूर-चूर हो गया। अंत में वह वापस लौटे और उन्होने वह वास्तविकता इन्द्र देव से कही । इन्द्र देव नें फिर अग्नि देव को भेजा। तेजपुंज नें अग्नि देव से कहा की अपने बल और पराक्रम से इस तिनके को भस्म कर के बताइये। अग्नि देव नें भी इस कार्य को पार लगाने में अपनी समस्त शक्ति झोंक दी। पर कुछ भी नहीं कर पाये। अंत में वह भी सिर झुकाये इन्द्र देव के पास लौट आए। इस तरह एक एक-कर के समस्त देवता तेजपुंज की चुनौती से परास्त हुए तब अंत में देव राज इन्द्र खुद मैदान में आए पर उन्हे भी सफलता प्राप्त ना हुई। अंत में समस्त देव गण नें तेजपुंज से हार मान कर वहाँ उनकी आराधना करना शुरू कर दिया। तब तेजपुंज रूप में आई माँ दुर्गा में अपना वास्तविक रूप दिखाया और देवताओं को यह ज्ञान दिया की माँ शक्ति के आशीष से आप सब नें दानवों को परास्त किया है। तब देवताओं नें भी अपनी गलती के लिए क्षमा मांगी और अपना मिथ्या अभिमान त्याग दिया।
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  • " सपनों की राह में थक कर रुकना मत,
    अभी हौसलों की उड़ान बाकी है।
    जो दिख रहा है बस शुरुआत है,
    मंज़िल से पहले पूरा आसमान बाकी है। " 🤍

    =============== END ===============

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    " सपनों की राह में थक कर रुकना मत, अभी हौसलों की उड़ान बाकी है। जो दिख रहा है बस शुरुआत है, मंज़िल से पहले पूरा आसमान बाकी है। " 🤍 =============== END =============== #shayari, #hindishayari, #motivationalshayari, #inspirationalshayari, #shayarioftheday, #hindipoetry, #poetrylovers, #poetrycommunity, #writerscommunity, #writersofinstagram, #motivation, #inspiration, #lifequotes, #positivevibes, #dreambig, #successmindset, #selfmotivation, #hindiquotes, #poetrywriting, #dailyshayari
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  • " न पूछो मेरी राहों का किस्सा अभी,
    मैंने मंज़िल से पहले हौसला चुना है।
    ठोकरें लाख आयें सफ़र की राहों में,
    मैंने गिरकर भी फिर उठना ही सुना है।
    ये वादा किसी और से नहीं मेरा,
    मैंने खुद से जीतने का जुनून बुना है। "💛

    =============== END ===============

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    " न पूछो मेरी राहों का किस्सा अभी, मैंने मंज़िल से पहले हौसला चुना है। ठोकरें लाख आयें सफ़र की राहों में, मैंने गिरकर भी फिर उठना ही सुना है। ये वादा किसी और से नहीं मेरा, मैंने खुद से जीतने का जुनून बुना है। "💛 =============== END =============== #shayari, #hindishayari, #motivationalshayari, #inspirationallines, #selfmotivation, #poetrylovers, #hindipoetry, #shayariquotes, #positivevibes, #lifequotes, #inspirationalpoetry, #writersofinstagram, #shayariwriting, #motivationalquotes, #hindiquotes, #poetrycommunity, #shayarioftheday, #hearttouchingshayari, #deepthoughts, #poetrygram
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  • 🌄✨ 🙏🙏आबू राजा – माउंट आबू का विस्तृत 3D मानचित्र
    राजस्थान की अरावली पर्वतमाला की गोद में बसा माउंट आबू राज्य का एकमात्र हिल स्टेशन है। हरियाली, झीलों, मंदिरों और पहाड़ी दृश्यों से सुसज्जित यह स्थान प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक शांति का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है।🙏🙏
    🏔️👉 गुरु शिखर (1722 मीटर)
    अरावली पर्वतमाला की सर्वोच्च चोटी गुरु शिखर यहाँ का प्रमुख आकर्षण है, जहाँ से चारों ओर का विहंगम दृश्य मन मोह लेता है।👈
    🏞️ 👉नक्की झील
    शहर के हृदय में स्थित नक्की झील शांत वातावरण और नौकायन के लिए प्रसिद्ध है। इसके आसपास बसा बाजार और पहाड़ी दृश्य इसे और आकर्षक बनाते हैं।
    🛕 👉आध्यात्मिक धरोहरें
    • दिलवाड़ा जैन मंदिर – संगमरमर की बारीक नक्काशी का विश्वप्रसिद्ध उदाहरण।
    • अर्बुदा देवी मंदिर – पहाड़ी पर स्थित आस्था का केंद्र।
    • अचलेश्वर महादेव मंदिर – धार्मिक महत्व का प्राचीन स्थल।
    🌅 👉प्राकृतिक व्यू पॉइंट्स
    • हनीमून पॉइंट
    • सनसेट पॉइंट
    • टोड रॉक
    🌳👉 वन्यजीव और हरियाली
    माउंट आबू वन्यजीव अभयारण्य घने जंगलों, दुर्लभ वनस्पतियों और वन्यजीवों का संरक्षण करता है, जो इस क्षेत्र को मरुस्थलीय राजस्थान से अलग पहचान देता है।
    📍👉 स्थान:
    सिरोही जिला, राजस्थान
    औसत ऊँचाई: लगभग 1220 मीटर
    माउंट आबू केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि प्रकृति, आध्यात्म और शांति का अद्वितीय संगम है। 🌿
    🌄✨ 🙏🙏आबू राजा – माउंट आबू का विस्तृत 3D मानचित्र राजस्थान की अरावली पर्वतमाला की गोद में बसा माउंट आबू राज्य का एकमात्र हिल स्टेशन है। हरियाली, झीलों, मंदिरों और पहाड़ी दृश्यों से सुसज्जित यह स्थान प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक शांति का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है।🙏🙏 🏔️👉 गुरु शिखर (1722 मीटर) अरावली पर्वतमाला की सर्वोच्च चोटी गुरु शिखर यहाँ का प्रमुख आकर्षण है, जहाँ से चारों ओर का विहंगम दृश्य मन मोह लेता है।👈 🏞️ 👉नक्की झील शहर के हृदय में स्थित नक्की झील शांत वातावरण और नौकायन के लिए प्रसिद्ध है। इसके आसपास बसा बाजार और पहाड़ी दृश्य इसे और आकर्षक बनाते हैं। 🛕 👉आध्यात्मिक धरोहरें • दिलवाड़ा जैन मंदिर – संगमरमर की बारीक नक्काशी का विश्वप्रसिद्ध उदाहरण। • अर्बुदा देवी मंदिर – पहाड़ी पर स्थित आस्था का केंद्र। • अचलेश्वर महादेव मंदिर – धार्मिक महत्व का प्राचीन स्थल। 🌅 👉प्राकृतिक व्यू पॉइंट्स • हनीमून पॉइंट • सनसेट पॉइंट • टोड रॉक 🌳👉 वन्यजीव और हरियाली माउंट आबू वन्यजीव अभयारण्य घने जंगलों, दुर्लभ वनस्पतियों और वन्यजीवों का संरक्षण करता है, जो इस क्षेत्र को मरुस्थलीय राजस्थान से अलग पहचान देता है। 📍👉 स्थान: सिरोही जिला, राजस्थान औसत ऊँचाई: लगभग 1220 मीटर माउंट आबू केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि प्रकृति, आध्यात्म और शांति का अद्वितीय संगम है। 🌿
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  • छोटी -छोटी बातें बड़ा फर्क डालती हैं

    एक आदमी सुबह को समुद्र के किनारे टहल रहा था ।

    उसने देखा कि लहरों के साथ सैकड़ों स्टार मछलियाँ तट पर आ जाती हैं, जब लहरे पीछे जाती हैं तो मछलियाँ किनारे पर ही जाती हैं और धूप से मर जाती हैं ।

    लहरें उसी समय लौटी थी और स्टार मछलियाँ अभी जीवित थी ।

    वह आदमी कुछ कदम आगे बढ़ा, उसने एक मछली उठाई और पानी में फेंक दी ।

    वह ऐसा बार-बार करता रहा ।

    उस आदमी के ठीक पीछे एक और आदमी था, जो यह नहीं समझ पा रहा था कि वह क्या कर रहा है ।

    वह उसके पास आया और पूछा तुम क्या कर रहे हो ?

    यहाँ तो सैकड़ों स्टार मछलियाँ हैं । तुम कितनें को बचा सकोगे ?

    तुम्हारे ऐसा करने से क्या फर्क पड़ेगा ?

    उस आदमी ने कोई जवाब नहीं दिया, दो कदम आगे बढ़कर उसने एक और मछली को उठाकर पानी में फेंक दिया और बोला, इससे इस एक मछली को तो फर्क पड़ता है ।

    हम कौन-सा फर्क डाल रहे हैं ? बड़ा या छोटा, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता ।

    अगर सब थोड़ा-थोड़ा फर्क लाएँ तो बहुत बड़ा फर्क पड़ेगा ।
    छोटी -छोटी बातें बड़ा फर्क डालती हैं एक आदमी सुबह को समुद्र के किनारे टहल रहा था । उसने देखा कि लहरों के साथ सैकड़ों स्टार मछलियाँ तट पर आ जाती हैं, जब लहरे पीछे जाती हैं तो मछलियाँ किनारे पर ही जाती हैं और धूप से मर जाती हैं । लहरें उसी समय लौटी थी और स्टार मछलियाँ अभी जीवित थी । वह आदमी कुछ कदम आगे बढ़ा, उसने एक मछली उठाई और पानी में फेंक दी । वह ऐसा बार-बार करता रहा । उस आदमी के ठीक पीछे एक और आदमी था, जो यह नहीं समझ पा रहा था कि वह क्या कर रहा है । वह उसके पास आया और पूछा तुम क्या कर रहे हो ? यहाँ तो सैकड़ों स्टार मछलियाँ हैं । तुम कितनें को बचा सकोगे ? तुम्हारे ऐसा करने से क्या फर्क पड़ेगा ? उस आदमी ने कोई जवाब नहीं दिया, दो कदम आगे बढ़कर उसने एक और मछली को उठाकर पानी में फेंक दिया और बोला, इससे इस एक मछली को तो फर्क पड़ता है । हम कौन-सा फर्क डाल रहे हैं ? बड़ा या छोटा, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता । अगर सब थोड़ा-थोड़ा फर्क लाएँ तो बहुत बड़ा फर्क पड़ेगा ।
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