तसà¥à¤µà¥€à¤° उस समय की है जब à¤à¤¾à¤°à¤¤ और अफ़ग़ानिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ के बीच सीधे वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤¾à¤° हà¥à¤† करता था, बीच में अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¤¼à¥‹à¤‚ का बनाया हà¥à¤† फ़रà¥à¤œà¤¼à¥€ देश पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ नहीं था। उस समय अफ़ग़ानिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ के ताजिर ऊà¤à¤Ÿ के क़ाफ़िले के साथ अपने सामान को लेकर à¤à¤¾à¤°à¤¤ के पेशावर आया करते थे। और फिर यहाठसे इनका समान अलग अलग रूट से à¤à¤¾à¤°à¤¤ के अलग अलग हिसà¥à¤¸à¥‡ में जाता था। à¤à¤¸à¥‡ ही à¤à¤• अफ़ग़ानी पर रवींदà¥à¤° नाथ ठाकà¥à¤° ने बहà¥à¤¤ ही मशहूर कहानी लिखी थी👉 “काबà¥à¤²à¥€à¤µà¤¾à¤²à¤¾” 👈जिस पर फ़िलà¥à¤® तक बन चà¥à¤•ी है।
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