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तस्वीर उस समय की है जब भारत और अफ़ग़ानिस्तान के बीच सीधे व्यापार हुआ करता था, बीच में अंग्रेज़ों का बनाया हुआ फ़र्ज़ी देश पाकिस्तान नहीं था। उस समय अफ़ग़ानिस्तान के ताजिर ऊँट के क़ाफ़िले के साथ अपने सामान को लेकर भारत के पेशावर आया करते थे। और फिर यहाँ से इनका समान अलग अलग रूट से भारत के अलग अलग हिस्से में जाता था। ऐसे ही एक अफ़ग़ानी पर रवींद्र नाथ ठाकुर ने बहुत ही मशहूर कहानी लिखी थी👉 “काबुलीवाला” 👈जिस पर फ़िल्म तक बन चुकी है।

तस्वीर उस समय की है जब भारत और अफ़ग़ानिस्तान के बीच सीधे व्यापार हुआ करता था, बीच में अंग्रेज़ों का बनाया हुआ फ़र्ज़ी देश पाकिस्तान नहीं था। उस समय अफ़ग़ानिस्तान के ताजिर ऊँट के क़ाफ़िले के साथ अपने सामान को लेकर भारत के पेशावर आया करते थे। और फिर यहाँ से इनका समान अलग अलग रूट से भारत के अलग अलग हिस्से में जाता था। ऐसे ही एक अफ़ग़ानी पर रवींद्र नाथ ठाकुर ने बहुत ही मशहूर कहानी लिखी थी👉 “काबुलीवाला” 👈जिस पर फ़िल्म तक बन चुकी है।
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