अज्ञानी होना उतनी शर्म की ब्बत नहीं है जितनी कि किसी काम को सही ढंग से सीखने की इच्छा न होना। जानकारी का भ्रम होना शिक्षा नहीं बल्कि अज्ञानता है। बेवकूफ लोगों के पास एक अजीब तरीके का आत्मविश्वास(Confidence) होता है, जो सिर्फ अज्ञानता से ही आता है। अज्ञानी होना बुरी बात नहीं है, लेकिन अज्ञानता को अपना कैरियर बना लेना यकीनन बेवकूफी है।

कुछ लोग अज्ञान जमा कर लेते हैं और फिर उसी को शिक्षा मानने की भूल कर बैठते हैं। अज्ञानता वरदान नहीं हैं। यह तो आभाव, दुःख, गरीबी और बीमारी का दूसरा नाम है। अगर अज्ञानता कोई नियामत है, तो बहुत-सी अज्ञानता छोटापन (Pettiness),

डर, कट्टरपन, अहंकार और पक्षपात की तरफ ले जाता है। समझदारी अज्ञानता के

अहंकार को मिटाने को कहते हैं। हम सूचना-युग में जी रहे हैं। एक अंदाज के मुताबिक सूचना की मात्रा हर साल दूनी होती जा रही है। सूचनाओं के इतनी सरलता से उपलब्ध होने के कारण इस दिनों अज्ञानता को मिटाना आसान है। लेकिन दुःख की बात यह है कि हमें जरूरी चीजों के अलावा बाकी हर चीज सिखाई जाती है। हमें लिखना-पढ़ना सिखाया जाता है, पर ऐसी बौद्धिक शिक्षा किस काम की, जो

इंसान को दूसरों की इज्जत करना और हमदर्दी से पेश आना न सिखाए।


हमारे स्कूल ज्ञान के झरने हैं। कुछ छात्र वहां अपनी प्यास मिटाने, कुछ

चुस्की भरने और कुछ केवल कुल्ला करने जाते हैं।

अज्ञानी होना उतनी शर्म की ब्बत नहीं है जितनी कि किसी काम को सही ढंग से सीखने की इच्छा न होना। जानकारी का भ्रम होना शिक्षा नहीं बल्कि अज्ञानता है। बेवकूफ लोगों के पास एक अजीब तरीके का आत्मविश्वास(Confidence) होता है, जो सिर्फ अज्ञानता से ही आता है। अज्ञानी होना बुरी बात नहीं है, लेकिन अज्ञानता को अपना कैरियर बना लेना यकीनन बेवकूफी है। कुछ लोग अज्ञान जमा कर लेते हैं और फिर उसी को शिक्षा मानने की भूल कर बैठते हैं। अज्ञानता वरदान नहीं हैं। यह तो आभाव, दुःख, गरीबी और बीमारी का दूसरा नाम है। अगर अज्ञानता कोई नियामत है, तो बहुत-सी अज्ञानता छोटापन (Pettiness), डर, कट्टरपन, अहंकार और पक्षपात की तरफ ले जाता है। समझदारी अज्ञानता के अहंकार को मिटाने को कहते हैं। हम सूचना-युग में जी रहे हैं। एक अंदाज के मुताबिक सूचना की मात्रा हर साल दूनी होती जा रही है। सूचनाओं के इतनी सरलता से उपलब्ध होने के कारण इस दिनों अज्ञानता को मिटाना आसान है। लेकिन दुःख की बात यह है कि हमें जरूरी चीजों के अलावा बाकी हर चीज सिखाई जाती है। हमें लिखना-पढ़ना सिखाया जाता है, पर ऐसी बौद्धिक शिक्षा किस काम की, जो इंसान को दूसरों की इज्जत करना और हमदर्दी से पेश आना न सिखाए। हमारे स्कूल ज्ञान के झरने हैं। कुछ छात्र वहां अपनी प्यास मिटाने, कुछ चुस्की भरने और कुछ केवल कुल्ला करने जाते हैं।
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