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छोटी शुरुआत

रवि एक छोटे गाँव से था। उसके पास ज्यादा साधन नहीं थे, लेकिन उसके सपने बड़े थे। वह एक अच्छा उद्यमी बनना चाहता था।

उसने सिर्फ 500 रुपये से एक छोटा काम शुरू किया। शुरुआत में लोग उसका मजाक उड़ाते थे। वे कहते, “इतने छोटे काम से क्या होगा?”

लेकिन रवि रोज थोड़ा-थोड़ा आगे बढ़ता रहा। उसने हार नहीं मानी।

धीरे-धीरे उसका काम बढ़ने लगा। कुछ साल बाद वही छोटा काम एक बड़ी कंपनी बन गया।

जब लोगों ने उससे सफलता का राज पूछा, तो उसने मुस्कुराकर कहा,
“मैंने बड़ा बनने के बारे में नहीं सोचा, मैंने सिर्फ रोज थोड़ा बेहतर बनने के बारे में सोचा।”

उसकी कहानी सिखाती है कि हर बड़ी सफलता की शुरुआत बहुत छोटी होती है।
छोटी शुरुआत रवि एक छोटे गाँव से था। उसके पास ज्यादा साधन नहीं थे, लेकिन उसके सपने बड़े थे। वह एक अच्छा उद्यमी बनना चाहता था। उसने सिर्फ 500 रुपये से एक छोटा काम शुरू किया। शुरुआत में लोग उसका मजाक उड़ाते थे। वे कहते, “इतने छोटे काम से क्या होगा?” लेकिन रवि रोज थोड़ा-थोड़ा आगे बढ़ता रहा। उसने हार नहीं मानी। धीरे-धीरे उसका काम बढ़ने लगा। कुछ साल बाद वही छोटा काम एक बड़ी कंपनी बन गया। जब लोगों ने उससे सफलता का राज पूछा, तो उसने मुस्कुराकर कहा, “मैंने बड़ा बनने के बारे में नहीं सोचा, मैंने सिर्फ रोज थोड़ा बेहतर बनने के बारे में सोचा।” उसकी कहानी सिखाती है कि हर बड़ी सफलता की शुरुआत बहुत छोटी होती है।
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