फटी साड़ी और अफसर बेटा
गाँव के एक छोटे से घर में कमला नाम की एक बूढ़ी माँ रहती थी। उसका पति बहुत पहले गुजर गया था। उसने मेहनत-मजदूरी करके, कई बार भूखे पेट रहकर, फटे कपड़े पहनकर अपने इकलौते बेटे, राहुल, को शहर पढ़ने भेजा। माँ का सपना था कि बेटा बड़ा होकर शहर में अफसर बने।
वर्षों की मेहनत रंग लाई। राहुल अफसर बन गया। शहर में उसकी शादी हुई और वह अपनी दुनिया में व्यस्त हो गया। शुरुआत में जो बेटा हर दिन फोन करता था, अब महीनों तक माँ की खबर नहीं लेता। माँ हर दिन गाँव के डाकिया को देखती, पर राहुल का कोई पत्र या फोन नहीं आता।
एक दिन, माँ ने राहुल से मिलने का फैसला किया। वह अपनी सबसे अच्छी, पर पुरानी हो चुकी साड़ी पहनकर शहर पहुंची। वह राहुल के आलीशान बंगले के सामने खड़ी थी। गेट पर जब राहुल ने अपनी फटेहाल माँ को देखा, तो वह शर्मिंदा हो गया।
राहुल की पत्नी ने पूछा, "ये कौन हैं?"
राहुल ने कहा, "शायद गाँव से आई कोई गरीब औरत है, कुछ माँगने आई होगी।"
यह सुनकर माँ का दिल टूट गया। वह अपने बेटे की आँखों में अपने लिए प्यार नहीं, सिर्फ नफरत और शर्मिंदगी देख पाई। वह कुछ नहीं बोली। उसने अपनी फटी साड़ी के पल्लू से अपनी आँखों के आंसू पोंछे और बिना एक शब्द बोले, वापस गाँव के लिए चल दी।
सीख: बेटा बड़ा होकर अफसर बन गया, लेकिन इंसान बनना भूल गया। माँ का निस्वार्थ प्रेम कभी फटी साड़ी के पल्लू में नहीं छिपता, लेकिन बेटा उसे अपनी पहचान में शर्मिंदगी मान बैठा।
गाँव के एक छोटे से घर में कमला नाम की एक बूढ़ी माँ रहती थी। उसका पति बहुत पहले गुजर गया था। उसने मेहनत-मजदूरी करके, कई बार भूखे पेट रहकर, फटे कपड़े पहनकर अपने इकलौते बेटे, राहुल, को शहर पढ़ने भेजा। माँ का सपना था कि बेटा बड़ा होकर शहर में अफसर बने।
वर्षों की मेहनत रंग लाई। राहुल अफसर बन गया। शहर में उसकी शादी हुई और वह अपनी दुनिया में व्यस्त हो गया। शुरुआत में जो बेटा हर दिन फोन करता था, अब महीनों तक माँ की खबर नहीं लेता। माँ हर दिन गाँव के डाकिया को देखती, पर राहुल का कोई पत्र या फोन नहीं आता।
एक दिन, माँ ने राहुल से मिलने का फैसला किया। वह अपनी सबसे अच्छी, पर पुरानी हो चुकी साड़ी पहनकर शहर पहुंची। वह राहुल के आलीशान बंगले के सामने खड़ी थी। गेट पर जब राहुल ने अपनी फटेहाल माँ को देखा, तो वह शर्मिंदा हो गया।
राहुल की पत्नी ने पूछा, "ये कौन हैं?"
राहुल ने कहा, "शायद गाँव से आई कोई गरीब औरत है, कुछ माँगने आई होगी।"
यह सुनकर माँ का दिल टूट गया। वह अपने बेटे की आँखों में अपने लिए प्यार नहीं, सिर्फ नफरत और शर्मिंदगी देख पाई। वह कुछ नहीं बोली। उसने अपनी फटी साड़ी के पल्लू से अपनी आँखों के आंसू पोंछे और बिना एक शब्द बोले, वापस गाँव के लिए चल दी।
सीख: बेटा बड़ा होकर अफसर बन गया, लेकिन इंसान बनना भूल गया। माँ का निस्वार्थ प्रेम कभी फटी साड़ी के पल्लू में नहीं छिपता, लेकिन बेटा उसे अपनी पहचान में शर्मिंदगी मान बैठा।
फटी साड़ी और अफसर बेटा
गाँव के एक छोटे से घर में कमला नाम की एक बूढ़ी माँ रहती थी। उसका पति बहुत पहले गुजर गया था। उसने मेहनत-मजदूरी करके, कई बार भूखे पेट रहकर, फटे कपड़े पहनकर अपने इकलौते बेटे, राहुल, को शहर पढ़ने भेजा। माँ का सपना था कि बेटा बड़ा होकर शहर में अफसर बने।
वर्षों की मेहनत रंग लाई। राहुल अफसर बन गया। शहर में उसकी शादी हुई और वह अपनी दुनिया में व्यस्त हो गया। शुरुआत में जो बेटा हर दिन फोन करता था, अब महीनों तक माँ की खबर नहीं लेता। माँ हर दिन गाँव के डाकिया को देखती, पर राहुल का कोई पत्र या फोन नहीं आता।
एक दिन, माँ ने राहुल से मिलने का फैसला किया। वह अपनी सबसे अच्छी, पर पुरानी हो चुकी साड़ी पहनकर शहर पहुंची। वह राहुल के आलीशान बंगले के सामने खड़ी थी। गेट पर जब राहुल ने अपनी फटेहाल माँ को देखा, तो वह शर्मिंदा हो गया।
राहुल की पत्नी ने पूछा, "ये कौन हैं?"
राहुल ने कहा, "शायद गाँव से आई कोई गरीब औरत है, कुछ माँगने आई होगी।"
यह सुनकर माँ का दिल टूट गया। वह अपने बेटे की आँखों में अपने लिए प्यार नहीं, सिर्फ नफरत और शर्मिंदगी देख पाई। वह कुछ नहीं बोली। उसने अपनी फटी साड़ी के पल्लू से अपनी आँखों के आंसू पोंछे और बिना एक शब्द बोले, वापस गाँव के लिए चल दी।
सीख: बेटा बड़ा होकर अफसर बन गया, लेकिन इंसान बनना भूल गया। माँ का निस्वार्थ प्रेम कभी फटी साड़ी के पल्लू में नहीं छिपता, लेकिन बेटा उसे अपनी पहचान में शर्मिंदगी मान बैठा।
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