*देश में एस आई आर बना मजाक और परेशान करने की वजह*

देश में एस आई आर के नाम पर किस तरह का मज़ाक़ चल रहा है, लोगों को दौडा़या जा रहा है। लोग अपनी रोजी रोटी छोडकर नाम जुडवाने के लिए कागज लिए घूम रहे हैं। कई जगहों से नाम काटने के लिए बी एल ओ के ऊपर दबाव बनाने की भी खबरें आयी हैं। लगता है कि यह लोगो को बेवजह परेशान करने का हथियार बन चुका है। ऐसा नहीं है कि इससे गरीब और अशिक्षित लोग ही परेशान हैं। इससे देश का हर वर्ग परेशान हैं।

ऐसा कहा जा रहा है कि मांगे गए कागजात को जमा कर देने के बाद भी लोगों के नाम कटवाने वाले कुछ गिरोहों द्वारा फार्म भरकर बीएलओ के पास देने से नाम काटने का खेल चल रहा है।

हैरान कर देने वाला ताजा मामला हवलदार अब्दुल मुख्तार का आया है। तीन पीढ़ियां सेना में अपनी सेवाएं दे चुकी है। फिर भी उन्हें अपनी पहचान साबित करनी पड़ी रही है।

सवाल यह है कि क्या बिना देश की नागरिकता के उनके परिवार की तीन पीढ़ियों को सेना में भर्ती किया गया था?

क्या सेना में भर्ती होने के बाद पुलिस वेरीफिकेशन नहीं किया गया ?

क्या कोई भी व्यक्ति किसी का नाम काटने का आवेदन कर सकता है? और बी एल ओ नाम काट सकता है?

क्या यह देश की अपनी ही व्यवस्था का मज़ाक़ नहीं है? एक विभाग द्वारा बेरीफाइड को अनबेरीफाइड मानना,उस विभाग पर प्रश्न चिन्ह नहीं है ?
*देश में एस आई आर बना मजाक और परेशान करने की वजह* देश में एस आई आर के नाम पर किस तरह का मज़ाक़ चल रहा है, लोगों को दौडा़या जा रहा है। लोग अपनी रोजी रोटी छोडकर नाम जुडवाने के लिए कागज लिए घूम रहे हैं। कई जगहों से नाम काटने के लिए बी एल ओ के ऊपर दबाव बनाने की भी खबरें आयी हैं। लगता है कि यह लोगो को बेवजह परेशान करने का हथियार बन चुका है। ऐसा नहीं है कि इससे गरीब और अशिक्षित लोग ही परेशान हैं। इससे देश का हर वर्ग परेशान हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि मांगे गए कागजात को जमा कर देने के बाद भी लोगों के नाम कटवाने वाले कुछ गिरोहों द्वारा फार्म भरकर बीएलओ के पास देने से नाम काटने का खेल चल रहा है। हैरान कर देने वाला ताजा मामला हवलदार अब्दुल मुख्तार का आया है। तीन पीढ़ियां सेना में अपनी सेवाएं दे चुकी है। फिर भी उन्हें अपनी पहचान साबित करनी पड़ी रही है। सवाल यह है कि क्या बिना देश की नागरिकता के उनके परिवार की तीन पीढ़ियों को सेना में भर्ती किया गया था? क्या सेना में भर्ती होने के बाद पुलिस वेरीफिकेशन नहीं किया गया ? क्या कोई भी व्यक्ति किसी का नाम काटने का आवेदन कर सकता है? और बी एल ओ नाम काट सकता है? क्या यह देश की अपनी ही व्यवस्था का मज़ाक़ नहीं है? एक विभाग द्वारा बेरीफाइड को अनबेरीफाइड मानना,उस विभाग पर प्रश्न चिन्ह नहीं है ?
Like
Love
2
1 Reacties 0 aandelen 382 Views 0 voorbeeld
bericht
Talkfever - Growing worldwide https://talkfever.com/