#शादीशà¥à¤¦à¤¾ सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ अकà¥à¤¸à¤° कर बैठती है इशà¥à¤•
मांग में सिंदूर होने के बाबजूद
जà¥à¤¡à¤¼ जाती है किसी के अहसासो से
कह देती है उससे कà¥à¤› अनकही बाते
à¤à¤¸à¤¾ नहीं कि बो बदचलन है
या उसके चरितà¥à¤° पर दाग है..
तो फिर वो कà¥à¤¯à¤¾ है जो वो खोजती है
सोचा कà¤à¥€ सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ कà¥à¤¯à¤¾ सोचती है
तन से वो हो जाती है शादीशà¥à¤¦à¤¾
पर मन कà¥à¤‚वारा ही रह जाता है
किसी ने मन को छà¥à¤† ही नहीं
कोई मन तक पहà¥à¤‚चा ही नहीं
बस वो रीती सी रह जाती है
और जब कोई मिलता है उसके जैसा
जो उसके मन को पढ़ने लगता है
तो वो खà¥à¤²à¥€ किताब बन जाती है
खोल देती है अपनी सारी गिरहें
और नतमसà¥à¤¤à¤• हो जाती है उसके समà¥à¤®à¥à¤–
सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ अपना सबकà¥à¤› नà¥à¤¯à¥Œà¤›à¤¾à¤µà¤° कर देती है
जहां वो वोल सके खà¥à¤¦ की बोली
जी सके सà¥à¤– के दो पल
बता सकें बिना रोक टोक अपनी बातें
हंस सके à¤à¤• बेखौफ हंसी
हां लोग इसे ही इशà¥à¤• कहते हैं
पर सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ तो दूर करती है
अपने मन का
#कà¥à¤‚वारापन..!!
कà¥à¤› लोगो को पोसà¥à¤Ÿ अचà¥à¤›à¥€ नहीं लग सकती है लेकिन यही s
सचà¥à¤šà¤¾à¤ˆ है कोई सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ के मन को पॠनही पाता है .....
#शादीशà¥à¤¦à¤¾ सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ अकà¥à¤¸à¤° कर बैठती है इशà¥à¤•
मांग में सिंदूर होने के बाबजूद
जà¥à¤¡à¤¼ जाती है किसी के अहसासो से
कह देती है उससे कà¥à¤› अनकही बाते
à¤à¤¸à¤¾ नहीं कि बो बदचलन है
या उसके चरितà¥à¤° पर दाग है..
तो फिर वो कà¥à¤¯à¤¾ है जो वो खोजती है
सोचा कà¤à¥€ सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ कà¥à¤¯à¤¾ सोचती है
तन से वो हो जाती है शादीशà¥à¤¦à¤¾
पर मन कà¥à¤‚वारा ही रह जाता है
किसी ने मन को छà¥à¤† ही नहीं
कोई मन तक पहà¥à¤‚चा ही नहीं
बस वो रीती सी रह जाती है
और जब कोई मिलता है उसके जैसा
जो उसके मन को पढ़ने लगता है
तो वो खà¥à¤²à¥€ किताब बन जाती है
खोल देती है अपनी सारी गिरहें
और नतमसà¥à¤¤à¤• हो जाती है उसके समà¥à¤®à¥à¤–
सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ अपना सबकà¥à¤› नà¥à¤¯à¥Œà¤›à¤¾à¤µà¤° कर देती है
जहां वो वोल सके खà¥à¤¦ की बोली
जी सके सà¥à¤– के दो पल
बता सकें बिना रोक टोक अपनी बातें
हंस सके à¤à¤• बेखौफ हंसी
हां लोग इसे ही इशà¥à¤• कहते हैं
पर सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ तो दूर करती है
अपने मन का #कà¥à¤‚वारापन..!!
कà¥à¤› लोगो को पोसà¥à¤Ÿ अचà¥à¤›à¥€ नहीं लग सकती है लेकिन यही s
सचà¥à¤šà¤¾à¤ˆ है कोई सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ के मन को पॠनही पाता है .....