• हर रोज़ यही सवाल दिल में उठता है,
    मेरे कल की राहों का पता क्या होगा।

    न मैं ढला वक़्त के साँचे में अब तक,
    इन जमे हुए हालातों का फ़ैसला क्या होगा।

    सपनों की रोशनी में कटती रही रातें,
    हक़ीक़त की इस सहर का रंग क्या होगा।

    ऐ दौर-ए-नया, तू ही बता दे मुझको,
    तेरे सच का आख़िर सबब क्या होगा।

    न चापलूसी सीखी, न समझौते किए,
    मेरी सादगी का यहाँ मोल क्या होगा।

    यूँ ही सोचता हूँ तन्हा बैठा अक्सर,
    मेरी ज़िंदगी का आख़िरी सफ़ा क्या होगा।
    हर रोज़ यही सवाल दिल में उठता है, मेरे कल की राहों का पता क्या होगा। न मैं ढला वक़्त के साँचे में अब तक, इन जमे हुए हालातों का फ़ैसला क्या होगा। सपनों की रोशनी में कटती रही रातें, हक़ीक़त की इस सहर का रंग क्या होगा। ऐ दौर-ए-नया, तू ही बता दे मुझको, तेरे सच का आख़िर सबब क्या होगा। न चापलूसी सीखी, न समझौते किए, मेरी सादगी का यहाँ मोल क्या होगा। यूँ ही सोचता हूँ तन्हा बैठा अक्सर, मेरी ज़िंदगी का आख़िरी सफ़ा क्या होगा।
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  • हार से मत घबराना ऐ दोस्त,
    हर गिरना नई उड़ान देता है।
    जो चलता है अडिग अपने इरादों पर,
    वही मुक़द्दर को पहचान देता है।

    अंधेरों से क्या डरना तुम,
    दीया खुद बनकर जलना सीखो।
    जो मेहनत से रिश्ता जोड़ ले,
    वो किस्मत बदलना सीखो।

    रास्ते कठिन हों तो मुस्कुराओ,
    यही तुम्हारी पहचान बने।
    जो पसीने से सपने सींचे,
    वही एक दिन आसमान बने।

    थक जाओ तो थोड़ा ठहर जाना,
    पर कभी हिम्मत मत हारना।
    जीत तुम्हारे क़दम चूमेगी,
    बस खुद पर विश्वास रखना।
    हार से मत घबराना ऐ दोस्त, हर गिरना नई उड़ान देता है। जो चलता है अडिग अपने इरादों पर, वही मुक़द्दर को पहचान देता है। अंधेरों से क्या डरना तुम, दीया खुद बनकर जलना सीखो। जो मेहनत से रिश्ता जोड़ ले, वो किस्मत बदलना सीखो। रास्ते कठिन हों तो मुस्कुराओ, यही तुम्हारी पहचान बने। जो पसीने से सपने सींचे, वही एक दिन आसमान बने। थक जाओ तो थोड़ा ठहर जाना, पर कभी हिम्मत मत हारना। जीत तुम्हारे क़दम चूमेगी, बस खुद पर विश्वास रखना।
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  • भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वास्तव में हाल के वर्षों में अपनी स्वर्ण रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। मार्च 2023 से सितंबर 2025 के बीच, भारत ने बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) से लगभग 274 टन सोना सफलतापूर्वक वापस मंगा लिया है।
    इस ऐतिहासिक कदम से जुड़ी मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:
    हालिया स्थानांतरण: अकेले वित्त वर्ष 2025 की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर 2025) में ही RBI ने 64 टन सोना घरेलू तिजोरियों में स्थानांतरित किया है।
    कुल घरेलू भंडार: इस बदलाव के बाद, सितंबर 2025 के अंत तक भारत के कुल 880.8 टन स्वर्ण भंडार में से 575.8 टन सोना अब भारत की धरती पर सुरक्षित रखा गया है। यह कुल भंडार का लगभग 65-66% है।
    सुरक्षित स्थान: वापस लाया गया यह सोना मुख्य रूप से मुंबई (मिंट रोड) और नागपुर स्थित उच्च-सुरक्षा वाले वॉल्ट्स में रखा गया है।
    वापस लाने के कारण:
    भू-राजनीतिक जोखिम: रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों द्वारा विदेशी संपत्तियों को फ्रीज किए जाने की घटनाओं ने संप्रभु संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
    लागत में बचत: बैंक ऑफ इंग्लैंड को दिए जाने वाले भारी स्टोरेज शुल्क और बीमा खर्चों को कम करना।
    भंडारण विविधीकरण: लॉजिस्टिक दक्षता और जोखिम प्रबंधन के लिए भंडारण स्थानों में विविधता लाना।
    यह 1991 के आर्थिक संकट के बाद भारत का सबसे बड़ा स्वर्ण स्थानांतरण है, जो वर्तमान में देश की मजबूत आर्थिक स्थिति और आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।
    भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वास्तव में हाल के वर्षों में अपनी स्वर्ण रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। मार्च 2023 से सितंबर 2025 के बीच, भारत ने बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) से लगभग 274 टन सोना सफलतापूर्वक वापस मंगा लिया है। इस ऐतिहासिक कदम से जुड़ी मुख्य बातें नीचे दी गई हैं: हालिया स्थानांतरण: अकेले वित्त वर्ष 2025 की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर 2025) में ही RBI ने 64 टन सोना घरेलू तिजोरियों में स्थानांतरित किया है। कुल घरेलू भंडार: इस बदलाव के बाद, सितंबर 2025 के अंत तक भारत के कुल 880.8 टन स्वर्ण भंडार में से 575.8 टन सोना अब भारत की धरती पर सुरक्षित रखा गया है। यह कुल भंडार का लगभग 65-66% है। सुरक्षित स्थान: वापस लाया गया यह सोना मुख्य रूप से मुंबई (मिंट रोड) और नागपुर स्थित उच्च-सुरक्षा वाले वॉल्ट्स में रखा गया है। वापस लाने के कारण: भू-राजनीतिक जोखिम: रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों द्वारा विदेशी संपत्तियों को फ्रीज किए जाने की घटनाओं ने संप्रभु संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। लागत में बचत: बैंक ऑफ इंग्लैंड को दिए जाने वाले भारी स्टोरेज शुल्क और बीमा खर्चों को कम करना। भंडारण विविधीकरण: लॉजिस्टिक दक्षता और जोखिम प्रबंधन के लिए भंडारण स्थानों में विविधता लाना। यह 1991 के आर्थिक संकट के बाद भारत का सबसे बड़ा स्वर्ण स्थानांतरण है, जो वर्तमान में देश की मजबूत आर्थिक स्थिति और आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।
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  • यह भारत की एक अत्यंत महत्वाकांक्षी और रणनीतिक परियोजना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने 14 फरवरी 2026 को असम में ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे देश की पहली और दुनिया की दूसरी रोड-कम-रेल टनल (Underwater Road-cum-Rail Tunnel) को मंजूरी दे दी है।
    इस परियोजना की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
    मार्ग और कनेक्टिविटी: यह NH-15 पर गोहपुर (Gohpur) और NH-715 पर नुमालीगढ़ (Numaligarh) के बीच एक 4-लेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर होगा।
    दूरी और समय में बचत: वर्तमान में इन दोनों स्थानों के बीच की दूरी लगभग 240 किमी है, जिसे तय करने में 6 घंटे लगते हैं। इस सुरंग के बनने के बाद यह दूरी घटकर मात्र 33.7 किमी रह जाएगी और यात्रा का समय घटकर सिर्फ 20 से 30 मिनट रह जाएगा।
    सुरंग की लंबाई और डिजाइन: कुल 33.7 किमी लंबे इस कॉरिडोर में 15.79 किमी लंबी ट्विन-ट्यूब सुरंग (Twin-tube Tunnel) शामिल होगी। यह नदी के तल से लगभग 32 मीटर नीचे बनाई जाएगी。
    सुविधाएं: सुरंग की एक ट्यूब में रेल लाइन (एकल विद्युतीकृत ट्रैक) और दूसरी में सड़क वाहनों के लिए दो लेन होंगे।
    लागत: इस परियोजना पर कुल ₹18,662.02 करोड़ खर्च होने का अनुमान है।
    कार्यान्वयन मॉडल: इसे इंजीनियरिंग-प्रोक्योरमेंट-कंस्ट्रक्शन (EPC) मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा।
    रणनीतिक महत्व: यह सुरंग न केवल असम बल्कि अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड जैसे राज्यों के लिए भी महत्वपूर्ण है। यह सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य साजो-सामान और कर्मियों की तेजी से तैनाती में मदद करेगी।
    यह परियोजना पीएम गति शक्ति (PM Gati Shakti) पहल का हिस्सा है और इससे उत्तर-पूर्व भारत में व्यापार, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे
    यह भारत की एक अत्यंत महत्वाकांक्षी और रणनीतिक परियोजना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने 14 फरवरी 2026 को असम में ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे देश की पहली और दुनिया की दूसरी रोड-कम-रेल टनल (Underwater Road-cum-Rail Tunnel) को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं: मार्ग और कनेक्टिविटी: यह NH-15 पर गोहपुर (Gohpur) और NH-715 पर नुमालीगढ़ (Numaligarh) के बीच एक 4-लेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर होगा। दूरी और समय में बचत: वर्तमान में इन दोनों स्थानों के बीच की दूरी लगभग 240 किमी है, जिसे तय करने में 6 घंटे लगते हैं। इस सुरंग के बनने के बाद यह दूरी घटकर मात्र 33.7 किमी रह जाएगी और यात्रा का समय घटकर सिर्फ 20 से 30 मिनट रह जाएगा। सुरंग की लंबाई और डिजाइन: कुल 33.7 किमी लंबे इस कॉरिडोर में 15.79 किमी लंबी ट्विन-ट्यूब सुरंग (Twin-tube Tunnel) शामिल होगी। यह नदी के तल से लगभग 32 मीटर नीचे बनाई जाएगी。 सुविधाएं: सुरंग की एक ट्यूब में रेल लाइन (एकल विद्युतीकृत ट्रैक) और दूसरी में सड़क वाहनों के लिए दो लेन होंगे। लागत: इस परियोजना पर कुल ₹18,662.02 करोड़ खर्च होने का अनुमान है। कार्यान्वयन मॉडल: इसे इंजीनियरिंग-प्रोक्योरमेंट-कंस्ट्रक्शन (EPC) मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा। रणनीतिक महत्व: यह सुरंग न केवल असम बल्कि अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड जैसे राज्यों के लिए भी महत्वपूर्ण है। यह सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य साजो-सामान और कर्मियों की तेजी से तैनाती में मदद करेगी। यह परियोजना पीएम गति शक्ति (PM Gati Shakti) पहल का हिस्सा है और इससे उत्तर-पूर्व भारत में व्यापार, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे
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  • Your chai-samosa habit just became your gold habit. ☕✨

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