बूढ़ा पेड़
एक गाँव में बहुत पुराना पेड़ था। उसने सालों तक लोगों को छाया दी, बच्चों को खेलने की जगह दी और पक्षियों को घर दिया।
लेकिन समय के साथ वह बूढ़ा हो गया। अब उस पर पहले जितने फल नहीं आते थे।
कुछ लोगों ने कहा कि इसे काट देना चाहिए क्योंकि अब इसका कोई फायदा नहीं।
गाँव के एक बुज़ुर्ग ने कहा,
“जिस पेड़ ने हमें इतने सालों तक आराम दिया, क्या हम उसे उसके बूढ़े होने पर छोड़ देंगे?”
सब लोग चुप हो गए।
उस दिन उन्होंने पेड़ को नहीं काटा। बल्कि उसकी देखभाल करने लगे।
यह कहानी याद दिलाती है कि कृतज्ञता और सम्मान भी इंसान की सबसे बड़ी पहचान है।
एक गाँव में बहुत पुराना पेड़ था। उसने सालों तक लोगों को छाया दी, बच्चों को खेलने की जगह दी और पक्षियों को घर दिया।
लेकिन समय के साथ वह बूढ़ा हो गया। अब उस पर पहले जितने फल नहीं आते थे।
कुछ लोगों ने कहा कि इसे काट देना चाहिए क्योंकि अब इसका कोई फायदा नहीं।
गाँव के एक बुज़ुर्ग ने कहा,
“जिस पेड़ ने हमें इतने सालों तक आराम दिया, क्या हम उसे उसके बूढ़े होने पर छोड़ देंगे?”
सब लोग चुप हो गए।
उस दिन उन्होंने पेड़ को नहीं काटा। बल्कि उसकी देखभाल करने लगे।
यह कहानी याद दिलाती है कि कृतज्ञता और सम्मान भी इंसान की सबसे बड़ी पहचान है।
बूढ़ा पेड़
एक गाँव में बहुत पुराना पेड़ था। उसने सालों तक लोगों को छाया दी, बच्चों को खेलने की जगह दी और पक्षियों को घर दिया।
लेकिन समय के साथ वह बूढ़ा हो गया। अब उस पर पहले जितने फल नहीं आते थे।
कुछ लोगों ने कहा कि इसे काट देना चाहिए क्योंकि अब इसका कोई फायदा नहीं।
गाँव के एक बुज़ुर्ग ने कहा,
“जिस पेड़ ने हमें इतने सालों तक आराम दिया, क्या हम उसे उसके बूढ़े होने पर छोड़ देंगे?”
सब लोग चुप हो गए।
उस दिन उन्होंने पेड़ को नहीं काटा। बल्कि उसकी देखभाल करने लगे।
यह कहानी याद दिलाती है कि कृतज्ञता और सम्मान भी इंसान की सबसे बड़ी पहचान है।
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