वह युद्ध जिसने भारत का इतिहास हमेशा के लिए बदल दिया: बक्सर, 1764 ⚔️
अक्सर हम प्लासी की लड़ाई को याद करते हैं, लेकिन असल में 22 अक्टूबर 1764 को लड़े गए बक्सर के युद्ध ने ही भारत में ब्रिटिश शासन की असली नींव रखी थी।
यह विशेष इन्फोग्राफिक गंगा के मैदानी इलाकों में हुई उस रणनीतिक भिड़ंत को दर्शाता है:
🔹 गंगा नदी का सहारा: मैप में देखें कैसे ब्रिटिश सेना (नीले मार्कर्स) ने अपनी बाईं ओर गंगा नदी को सुरक्षित ढाल (Anchor) बनाया।
🔹 अनुशासन बनाम भीड़: एक तरफ 3 बड़े शासकों (मीर क़ासिम, शुजा-उद-दौला, शाह आलम II) की संयुक्त विशाल सेना थी, और दूसरी तरफ मेजर हेक्टर मुनरो की छोटी लेकिन अनुशासित ब्रिटिश पलटन।
🔹 निर्णायक मोड़: ब्रिटिश तोपखाने (Artillery) की सटीक मार ने कैसे भारी संख्या वाली सेना को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।
परिणाम? इसी युद्ध के बाद 1765 में अंग्रेजों को बंगाल, बिहार और उड़ीसा के 'दीवानी अधिकार' (Tax Rights) मिले, और मुगलों का सूर्य अस्त होने लगा।
🌲🌲एक गहरा ऐतिहासिक विश्लेषण,🌲🌲
वह युद्ध जिसने भारत का इतिहास हमेशा के लिए बदल दिया: बक्सर, 1764 ⚔️
अक्सर हम प्लासी की लड़ाई को याद करते हैं, लेकिन असल में 22 अक्टूबर 1764 को लड़े गए बक्सर के युद्ध ने ही भारत में ब्रिटिश शासन की असली नींव रखी थी।
यह विशेष इन्फोग्राफिक गंगा के मैदानी इलाकों में हुई उस रणनीतिक भिड़ंत को दर्शाता है:
🔹 गंगा नदी का सहारा: मैप में देखें कैसे ब्रिटिश सेना (नीले मार्कर्स) ने अपनी बाईं ओर गंगा नदी को सुरक्षित ढाल (Anchor) बनाया।
🔹 अनुशासन बनाम भीड़: एक तरफ 3 बड़े शासकों (मीर क़ासिम, शुजा-उद-दौला, शाह आलम II) की संयुक्त विशाल सेना थी, और दूसरी तरफ मेजर हेक्टर मुनरो की छोटी लेकिन अनुशासित ब्रिटिश पलटन।
🔹 निर्णायक मोड़: ब्रिटिश तोपखाने (Artillery) की सटीक मार ने कैसे भारी संख्या वाली सेना को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।
परिणाम? इसी युद्ध के बाद 1765 में अंग्रेजों को बंगाल, बिहार और उड़ीसा के 'दीवानी अधिकार' (Tax Rights) मिले, और मुगलों का सूर्य अस्त होने लगा।
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