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अगर आप प्रकाश की गति से निकल पड़ो, तो ब्रह्मांड एक नक्शा नहीं बल्कि समय की सुरंग बन जाएगा। पृथ्वी से चंद्रमा की दूरी रोशनी सिर्फ 1.28 सेकंड में पार कर लेती है, मंगल तक पहुँचने में 12 मिनट, और सौर मंडल के आख़िरी छोर प्लूटो तक पहुँचने में भी केवल 5.5 घंटे लगते हैं। इतना तेज़ होने के बावजूद प्रकाश के लिए अंतरिक्ष “छोटा” नहीं पड़ता।

सौर मंडल से बाहर कदम रखते ही दिमाग चकरा जाता है। हमारे सबसे पास के तारे प्रॉक्सिमा सेंटॉरी की रोशनी को हम तक पहुँचने में 4.2 साल लगते हैं, यानी हम उसे आज नहीं, बल्कि 4.2 साल पुराना देख रहे हैं। हमारी आकाशगंगा के केंद्र तक यह सफ़र 26,000 प्रकाश वर्ष का है—यहाँ प्रकाश दूरी नहीं, इतिहास बन जाता है।

सबसे बड़ा झटका तब लगता है जब हम “दृश्य ब्रह्मांड” की सीमा देखते हैं—करीब 46 अरब प्रकाश वर्ष दूर। मतलब, दूरबीन से जो भी रोशनी हम देख रहे हैं, वह ब्रह्मांड के बचपन से चली आ रही है। इसलिए कहा जाता है: प्रकाश की गति से यात्रा करना, दरअसल समय के अतीत में झाँकना है।

अगर आप प्रकाश की गति से निकल पड़ो, तो ब्रह्मांड एक नक्शा नहीं बल्कि समय की सुरंग बन जाएगा। पृथ्वी से चंद्रमा की दूरी रोशनी सिर्फ 1.28 सेकंड में पार कर लेती है, मंगल तक पहुँचने में 12 मिनट, और सौर मंडल के आख़िरी छोर प्लूटो तक पहुँचने में भी केवल 5.5 घंटे लगते हैं। इतना तेज़ होने के बावजूद प्रकाश के लिए अंतरिक्ष “छोटा” नहीं पड़ता। सौर मंडल से बाहर कदम रखते ही दिमाग चकरा जाता है। हमारे सबसे पास के तारे प्रॉक्सिमा सेंटॉरी की रोशनी को हम तक पहुँचने में 4.2 साल लगते हैं, यानी हम उसे आज नहीं, बल्कि 4.2 साल पुराना देख रहे हैं। हमारी आकाशगंगा के केंद्र तक यह सफ़र 26,000 प्रकाश वर्ष का है—यहाँ प्रकाश दूरी नहीं, इतिहास बन जाता है। सबसे बड़ा झटका तब लगता है जब हम “दृश्य ब्रह्मांड” की सीमा देखते हैं—करीब 46 अरब प्रकाश वर्ष दूर। मतलब, दूरबीन से जो भी रोशनी हम देख रहे हैं, वह ब्रह्मांड के बचपन से चली आ रही है। इसलिए कहा जाता है: प्रकाश की गति से यात्रा करना, दरअसल समय के अतीत में झाँकना है।
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