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अगर आपको लग रहा है कि आपका वजन बढ़ गया है और डाइटिंग काम नहीं कर रही, तो टेंशन मत लीजिए। खुशखबरी यह है कि आप मोटे नहीं हैं, आप बस गलत ग्रह पर रह रहे हैं! विज्ञान कहता है कि समस्या आपके खाने में नहीं, बल्कि पृथ्वी की 'चिपकू' आदत यानी गुरुत्वाकर्षण (Gravity) में है।

असल में, आपका शरीर (Mass) तो वही रहता है, लेकिन ग्रह की खींचने की ताकत बदल जाती है। जैसे, अगर आप बृहस्पति (Jupiter) पर चले गए, तो वहां की ग्रेविटी आपको इतना जोर से खींचेगी कि आप 60 किलो से सीधे 142 किलो के हो जाएंगे—बिना एक्स्ट्रा पिज्जा खाए! लेकिन अगर आपको बिना जिम जाए और बिना पसीना बहाए 'स्लिम-ट्रिम' होना है, तो बस मंगल (Mars) या बुध (Mercury) का टिकट कटवा लीजिए।

वहां आप जादू से सिर्फ 23 किलो के रह जाएंगे। तो अगली बार कोई आपको वजन कम करने की सलाह दे, तो उनसे कह देना—"भाई, मुझे जिम की नहीं, बस एक रॉकेट की जरूरत है!"

अगर आपको लग रहा है कि आपका वजन बढ़ गया है और डाइटिंग काम नहीं कर रही, तो टेंशन मत लीजिए। खुशखबरी यह है कि आप मोटे नहीं हैं, आप बस गलत ग्रह पर रह रहे हैं! विज्ञान कहता है कि समस्या आपके खाने में नहीं, बल्कि पृथ्वी की 'चिपकू' आदत यानी गुरुत्वाकर्षण (Gravity) में है। असल में, आपका शरीर (Mass) तो वही रहता है, लेकिन ग्रह की खींचने की ताकत बदल जाती है। जैसे, अगर आप बृहस्पति (Jupiter) पर चले गए, तो वहां की ग्रेविटी आपको इतना जोर से खींचेगी कि आप 60 किलो से सीधे 142 किलो के हो जाएंगे—बिना एक्स्ट्रा पिज्जा खाए! लेकिन अगर आपको बिना जिम जाए और बिना पसीना बहाए 'स्लिम-ट्रिम' होना है, तो बस मंगल (Mars) या बुध (Mercury) का टिकट कटवा लीजिए। वहां आप जादू से सिर्फ 23 किलो के रह जाएंगे। तो अगली बार कोई आपको वजन कम करने की सलाह दे, तो उनसे कह देना—"भाई, मुझे जिम की नहीं, बस एक रॉकेट की जरूरत है!"
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