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👉हल्दीघाटी युद्ध से एक रात पूर्व मुगल फौज के सेनापति आमेर के राजा मानसिंह कछवाहा शिकार करते करते अनजाने में महाराणा प्रताप के शिविर के नज़दीक तक पहुंच गए।

👉महाराणा के गुप्तचरों ने उन्हें इस बात की सूचना दी तो सामंतों ने सलाह दी कि मानसिंह को इसी वक्त मार देना चाहिए, इस मौके को हाथ से नहीं जाने देना चाहिए।

👉तब बड़ी सादड़ी के राजराणा झाला मानसिंह ने कहा कि "धोखे से मानसिंह को मार दिया तो फिर अंतर ही क्या रह जाएगा हममें और मुगलों में"

👉झाला मानसिंह अगले दिन महाराणा प्रताप के जीवन की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए
👉हल्दीघाटी युद्ध से एक रात पूर्व मुगल फौज के सेनापति आमेर के राजा मानसिंह कछवाहा शिकार करते करते अनजाने में महाराणा प्रताप के शिविर के नज़दीक तक पहुंच गए। 👉महाराणा के गुप्तचरों ने उन्हें इस बात की सूचना दी तो सामंतों ने सलाह दी कि मानसिंह को इसी वक्त मार देना चाहिए, इस मौके को हाथ से नहीं जाने देना चाहिए। 👉तब बड़ी सादड़ी के राजराणा झाला मानसिंह ने कहा कि "धोखे से मानसिंह को मार दिया तो फिर अंतर ही क्या रह जाएगा हममें और मुगलों में" 👉झाला मानसिंह अगले दिन महाराणा प्रताप के जीवन की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए
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