4 फरवरी, 1670 ई. को छत्रपति शिवाजी महाराज के आदेश से तानाजी मालुसरे को 300 सिपाहियों के साथ कोंडाना दुर्ग पर आक्रमण करने भेजा गया। कोंडाना पर मुगलों की तरफ से उदयभान तैनात था। तानाजी के नेतृत्व में सिपाहियों ने रस्सी की सीढ़ी के सहारे किले पर चढ़कर किले के एक हिस्से पर कब्ज़ा कर लिया।

तानाजी मालुसरे वीरगति को प्राप्त हुए, तो उनकी जगह फौरन उनके भाई सूर्याजी ने ली और दुर्ग के द्वार खोलने में सफल रहे। दुर्ग के अन्दर हुई लड़ाई में मुगल पक्ष की तरफ से उदयभान सहित 1200 सैनिक मारे गए।

राजगढ़ में बैठे शिवाजी महाराज को विजय की खबर मिली, तो उन्होंने कहा कि "इस विजय के लिए तानाजी मालुसरे के रुप में हमें भारी कीमत चुकानी पड़ी"। शिवाजी महाराज ने तानाजी की याद में दुर्ग का नाम 'सिंहगढ़' रख दिया।

🌴भारत का गौरवशाली इतिहास 🌴
0 Σχόλια 0 Μοιράστηκε 344 Views 0 Προεπισκόπηση
δημοσίευση
Talkfever - Growing worldwide https://talkfever.com