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पुराने समय में 'रहत' (Persian Wheel) खेती के लिए सिंचाई का सबसे शानदार और मुख्य साधन हुआ करता था। यह पूरी तरह से पशु शक्ति और इंजीनियरिंग का एक बेहतरीन तालमेल था।
​इसे समझने के लिए आप इसे तीन हिस्सों में देख सकते हैं:
​1. मुख्य पहिया और बाल्टियाँ (The Wheel)
​कुएं के ठीक ऊपर एक बहुत बड़ा ऊर्ध्वाधर (vertical) पहिया लगा होता था। इस पहिये पर एक लंबी चेन या रस्सी बंधी होती थी, जिसमें बहुत सारी छोटी-छोटी मिट्टी या लोहे की बाल्टियाँ (टिंड) एक के बाद एक लगी होती थीं।
​जब पहिया घूमता, तो खाली बाल्टियाँ कुएं के पानी में डूबतीं।
​ऊपर आते समय वे पानी से भर जातीं और सबसे ऊपरी बिंदु पर पहुँचकर एक नाली (channel) में पानी उलट देती थीं।
​2. जानवरों का उपयोग (The Animal Power)
​कुएं से थोड़ी दूर एक दूसरा क्षैतिज (horizontal) पहिया होता था, जिसे एक लंबी लकड़ी (बीम) से जोड़ दिया जाता था।
​इस लकड़ी को बैल, ऊंट या भैंसे के गले से बांध दिया जाता था।
​जैसे-जैसे जानवर गोल-गोल घूमता, वह लकड़ी उस पहिये को घुमाती थी।
​3. गियर सिस्टम (The Gear)
​यही रहत की असली जादूगरी थी। जमीन के अंदर एक गियर सिस्टम लगा होता था।
​जब बैल वाला पहिया (जो जमीन के समानांतर घूम रहा है) घूमता, तो वह गियर के जरिए कुएं वाले पहिये (जो खड़ा घूम रहा है) को घुमाता था।
​यानी जानवरों की क्षैतिज शक्ति को ऊर्ध्वाधर शक्ति (Vertical power) में बदला जाता था।
​रहत के फायदे:
​लगातार पानी: चड़स (मोठ) के मुकाबले इसमें पानी का बहाव लगातार बना रहता था।
​कम मेहनत: किसान को खुद कुएं से पानी नहीं खींचना पड़ता था, बस जानवरों को हांकना होता था।
​गहराई: यह काफी गहरे कुओं से भी आसानी से पानी निकाल सकता था।
​आजकल तो बिजली की मोटर और पंप आ गए हैं, इसलिए रहत अब केवल संग्रहालयों या बहुत ही पिछड़े ग्रामीण इलाकों में देखने को मिलते हैं।
पुराने समय में 'रहत' (Persian Wheel) खेती के लिए सिंचाई का सबसे शानदार और मुख्य साधन हुआ करता था। यह पूरी तरह से पशु शक्ति और इंजीनियरिंग का एक बेहतरीन तालमेल था। ​इसे समझने के लिए आप इसे तीन हिस्सों में देख सकते हैं: ​1. मुख्य पहिया और बाल्टियाँ (The Wheel) ​कुएं के ठीक ऊपर एक बहुत बड़ा ऊर्ध्वाधर (vertical) पहिया लगा होता था। इस पहिये पर एक लंबी चेन या रस्सी बंधी होती थी, जिसमें बहुत सारी छोटी-छोटी मिट्टी या लोहे की बाल्टियाँ (टिंड) एक के बाद एक लगी होती थीं। ​जब पहिया घूमता, तो खाली बाल्टियाँ कुएं के पानी में डूबतीं। ​ऊपर आते समय वे पानी से भर जातीं और सबसे ऊपरी बिंदु पर पहुँचकर एक नाली (channel) में पानी उलट देती थीं। ​2. जानवरों का उपयोग (The Animal Power) ​कुएं से थोड़ी दूर एक दूसरा क्षैतिज (horizontal) पहिया होता था, जिसे एक लंबी लकड़ी (बीम) से जोड़ दिया जाता था। ​इस लकड़ी को बैल, ऊंट या भैंसे के गले से बांध दिया जाता था। ​जैसे-जैसे जानवर गोल-गोल घूमता, वह लकड़ी उस पहिये को घुमाती थी। ​3. गियर सिस्टम (The Gear) ​यही रहत की असली जादूगरी थी। जमीन के अंदर एक गियर सिस्टम लगा होता था। ​जब बैल वाला पहिया (जो जमीन के समानांतर घूम रहा है) घूमता, तो वह गियर के जरिए कुएं वाले पहिये (जो खड़ा घूम रहा है) को घुमाता था। ​यानी जानवरों की क्षैतिज शक्ति को ऊर्ध्वाधर शक्ति (Vertical power) में बदला जाता था। ​रहत के फायदे: ​लगातार पानी: चड़स (मोठ) के मुकाबले इसमें पानी का बहाव लगातार बना रहता था। ​कम मेहनत: किसान को खुद कुएं से पानी नहीं खींचना पड़ता था, बस जानवरों को हांकना होता था। ​गहराई: यह काफी गहरे कुओं से भी आसानी से पानी निकाल सकता था। ​आजकल तो बिजली की मोटर और पंप आ गए हैं, इसलिए रहत अब केवल संग्रहालयों या बहुत ही पिछड़े ग्रामीण इलाकों में देखने को मिलते हैं।
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