ترقية الحساب

“मुझे बाहर मत निकालो…
मेरी दो बेटियाँ मेरा हाथ पकड़े हुए हैं।”

29 दिसंबर 1999।
बारिश रुकने का नाम नहीं ले रही थी।
पहाड़ टूट रहे थे।
मिट्टी, पत्थर और पानी ने सब कुछ निगल लिया।

वेनेज़ुएला की वर्गास त्रासदी में हजारों ज़िंदगियाँ खत्म हो गईं।
उसी मलबे के बीच एक पिता ज़िंदा मिला — सीने तक कीचड़ में दबा हुआ।

राहतकर्मी उसे बाहर खींचना चाहते थे।
लेकिन उसने मना कर दिया।

उसकी आवाज़ काँप रही थी,
लेकिन फैसला अडिग था —
“मेरी दो बेटियाँ… मेरा हाथ पकड़े हुए हैं।”

बेटियाँ अब इस दुनिया में नहीं थीं।
लेकिन एक पिता के लिए,
वो अब भी उसके साथ थीं।

वो चाहता तो बच सकता था।
लेकिन उसने अकेले जीना स्वीकार नहीं किया।
उसने आख़िरी सांस तक
अपने बच्चों का साथ चुना।

आपदा ने घर तोड़े, शहर तोड़े…
लेकिन उस दिन एक पिता ने साबित कर दिया —
मोहब्बत मौत से भी बड़ी होती है।

क्या आप सोच सकते हैं…
ऐसी स्थिति में आप क्या करते? 💔
“मुझे बाहर मत निकालो… मेरी दो बेटियाँ मेरा हाथ पकड़े हुए हैं।” 29 दिसंबर 1999। बारिश रुकने का नाम नहीं ले रही थी। पहाड़ टूट रहे थे। मिट्टी, पत्थर और पानी ने सब कुछ निगल लिया। वेनेज़ुएला की वर्गास त्रासदी में हजारों ज़िंदगियाँ खत्म हो गईं। उसी मलबे के बीच एक पिता ज़िंदा मिला — सीने तक कीचड़ में दबा हुआ। राहतकर्मी उसे बाहर खींचना चाहते थे। लेकिन उसने मना कर दिया। उसकी आवाज़ काँप रही थी, लेकिन फैसला अडिग था — “मेरी दो बेटियाँ… मेरा हाथ पकड़े हुए हैं।” बेटियाँ अब इस दुनिया में नहीं थीं। लेकिन एक पिता के लिए, वो अब भी उसके साथ थीं। वो चाहता तो बच सकता था। लेकिन उसने अकेले जीना स्वीकार नहीं किया। उसने आख़िरी सांस तक अपने बच्चों का साथ चुना। आपदा ने घर तोड़े, शहर तोड़े… लेकिन उस दिन एक पिता ने साबित कर दिया — मोहब्बत मौत से भी बड़ी होती है। क्या आप सोच सकते हैं… ऐसी स्थिति में आप क्या करते? 💔
1
·111 مشاهدة ·0 معاينة
Talkfever - Growing worldwide https://talkfever.com