🌲🌲🌲🌲🌲चम्बल नदी पर निर्मित बाँध 🌊📘🌲🌲🌲🌲
चम्बल नदी मध्य भारत की प्रमुख नदियों में से एक है, जो विंध्य और सतपुड़ा क्षेत्र से निकलकर अंततः यमुना नदी में मिलती है। इस नदी पर जलविद्युत उत्पादन और सिंचाई के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण बाँध बनाए गए हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से इन बाँधों का क्रम विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
उद्गम से नीचे की ओर बाँधों का क्रम इस प्रकार है—
1️⃣ गांधी सागर बाँध – यह चम्बल परियोजना का पहला प्रमुख बाँध है और इसकी स्थापित क्षमता लगभग 115 मेगावाट है।
2️⃣ राणा प्रताप सागर बाँध – यह दूसरा बाँध है, जिसकी विद्युत क्षमता लगभग 172 मेगावाट है।
3️⃣ जवाहर सागर बाँध – यह तीसरा बाँध है और इसकी क्षमता लगभग 99 मेगावाट है।
4️⃣ कोटा बैराज – यह मुख्यतः सिंचाई के लिए बनाया गया है और राजस्थान के कृषि क्षेत्रों को जल उपलब्ध कराता है।
इन बाँधों को सामूहिक रूप से चम्बल घाटी परियोजना के अंतर्गत विकसित किया गया था। यह परियोजना मध्य प्रदेश और राजस्थान के बीच संयुक्त प्रयास का उदाहरण है। जलविद्युत उत्पादन के साथ-साथ यह परियोजना कृषि सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे BPSC, UPPSC, SSC CGL आदि में नदियों और बाँधों से जुड़े तथ्य अक्सर पूछे जाते हैं। इसलिए बाँधों का क्रम और उनकी क्षमता याद रखना अत्यंत उपयोगी है।
चम्बल नदी मध्य भारत की प्रमुख नदियों में से एक है, जो विंध्य और सतपुड़ा क्षेत्र से निकलकर अंततः यमुना नदी में मिलती है। इस नदी पर जलविद्युत उत्पादन और सिंचाई के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण बाँध बनाए गए हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से इन बाँधों का क्रम विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
उद्गम से नीचे की ओर बाँधों का क्रम इस प्रकार है—
1️⃣ गांधी सागर बाँध – यह चम्बल परियोजना का पहला प्रमुख बाँध है और इसकी स्थापित क्षमता लगभग 115 मेगावाट है।
2️⃣ राणा प्रताप सागर बाँध – यह दूसरा बाँध है, जिसकी विद्युत क्षमता लगभग 172 मेगावाट है।
3️⃣ जवाहर सागर बाँध – यह तीसरा बाँध है और इसकी क्षमता लगभग 99 मेगावाट है।
4️⃣ कोटा बैराज – यह मुख्यतः सिंचाई के लिए बनाया गया है और राजस्थान के कृषि क्षेत्रों को जल उपलब्ध कराता है।
इन बाँधों को सामूहिक रूप से चम्बल घाटी परियोजना के अंतर्गत विकसित किया गया था। यह परियोजना मध्य प्रदेश और राजस्थान के बीच संयुक्त प्रयास का उदाहरण है। जलविद्युत उत्पादन के साथ-साथ यह परियोजना कृषि सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे BPSC, UPPSC, SSC CGL आदि में नदियों और बाँधों से जुड़े तथ्य अक्सर पूछे जाते हैं। इसलिए बाँधों का क्रम और उनकी क्षमता याद रखना अत्यंत उपयोगी है।
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चम्बल नदी मध्य भारत की प्रमुख नदियों में से एक है, जो विंध्य और सतपुड़ा क्षेत्र से निकलकर अंततः यमुना नदी में मिलती है। इस नदी पर जलविद्युत उत्पादन और सिंचाई के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण बाँध बनाए गए हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से इन बाँधों का क्रम विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
उद्गम से नीचे की ओर बाँधों का क्रम इस प्रकार है—
1️⃣ गांधी सागर बाँध – यह चम्बल परियोजना का पहला प्रमुख बाँध है और इसकी स्थापित क्षमता लगभग 115 मेगावाट है।
2️⃣ राणा प्रताप सागर बाँध – यह दूसरा बाँध है, जिसकी विद्युत क्षमता लगभग 172 मेगावाट है।
3️⃣ जवाहर सागर बाँध – यह तीसरा बाँध है और इसकी क्षमता लगभग 99 मेगावाट है।
4️⃣ कोटा बैराज – यह मुख्यतः सिंचाई के लिए बनाया गया है और राजस्थान के कृषि क्षेत्रों को जल उपलब्ध कराता है।
इन बाँधों को सामूहिक रूप से चम्बल घाटी परियोजना के अंतर्गत विकसित किया गया था। यह परियोजना मध्य प्रदेश और राजस्थान के बीच संयुक्त प्रयास का उदाहरण है। जलविद्युत उत्पादन के साथ-साथ यह परियोजना कृषि सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे BPSC, UPPSC, SSC CGL आदि में नदियों और बाँधों से जुड़े तथ्य अक्सर पूछे जाते हैं। इसलिए बाँधों का क्रम और उनकी क्षमता याद रखना अत्यंत उपयोगी है।
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