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यह भारत की एक अत्यंत महत्वाकांक्षी और रणनीतिक परियोजना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने 14 फरवरी 2026 को असम में ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे देश की पहली और दुनिया की दूसरी रोड-कम-रेल टनल (Underwater Road-cum-Rail Tunnel) को मंजूरी दे दी है।
इस परियोजना की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
मार्ग और कनेक्टिविटी: यह NH-15 पर गोहपुर (Gohpur) और NH-715 पर नुमालीगढ़ (Numaligarh) के बीच एक 4-लेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर होगा।
दूरी और समय में बचत: वर्तमान में इन दोनों स्थानों के बीच की दूरी लगभग 240 किमी है, जिसे तय करने में 6 घंटे लगते हैं। इस सुरंग के बनने के बाद यह दूरी घटकर मात्र 33.7 किमी रह जाएगी और यात्रा का समय घटकर सिर्फ 20 से 30 मिनट रह जाएगा।
सुरंग की लंबाई और डिजाइन: कुल 33.7 किमी लंबे इस कॉरिडोर में 15.79 किमी लंबी ट्विन-ट्यूब सुरंग (Twin-tube Tunnel) शामिल होगी। यह नदी के तल से लगभग 32 मीटर नीचे बनाई जाएगी。
सुविधाएं: सुरंग की एक ट्यूब में रेल लाइन (एकल विद्युतीकृत ट्रैक) और दूसरी में सड़क वाहनों के लिए दो लेन होंगे।
लागत: इस परियोजना पर कुल ₹18,662.02 करोड़ खर्च होने का अनुमान है।
कार्यान्वयन मॉडल: इसे इंजीनियरिंग-प्रोक्योरमेंट-कंस्ट्रक्शन (EPC) मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा।
रणनीतिक महत्व: यह सुरंग न केवल असम बल्कि अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड जैसे राज्यों के लिए भी महत्वपूर्ण है। यह सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य साजो-सामान और कर्मियों की तेजी से तैनाती में मदद करेगी।
यह परियोजना पीएम गति शक्ति (PM Gati Shakti) पहल का हिस्सा है और इससे उत्तर-पूर्व भारत में व्यापार, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे
यह भारत की एक अत्यंत महत्वाकांक्षी और रणनीतिक परियोजना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने 14 फरवरी 2026 को असम में ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे देश की पहली और दुनिया की दूसरी रोड-कम-रेल टनल (Underwater Road-cum-Rail Tunnel) को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं: मार्ग और कनेक्टिविटी: यह NH-15 पर गोहपुर (Gohpur) और NH-715 पर नुमालीगढ़ (Numaligarh) के बीच एक 4-लेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर होगा। दूरी और समय में बचत: वर्तमान में इन दोनों स्थानों के बीच की दूरी लगभग 240 किमी है, जिसे तय करने में 6 घंटे लगते हैं। इस सुरंग के बनने के बाद यह दूरी घटकर मात्र 33.7 किमी रह जाएगी और यात्रा का समय घटकर सिर्फ 20 से 30 मिनट रह जाएगा। सुरंग की लंबाई और डिजाइन: कुल 33.7 किमी लंबे इस कॉरिडोर में 15.79 किमी लंबी ट्विन-ट्यूब सुरंग (Twin-tube Tunnel) शामिल होगी। यह नदी के तल से लगभग 32 मीटर नीचे बनाई जाएगी。 सुविधाएं: सुरंग की एक ट्यूब में रेल लाइन (एकल विद्युतीकृत ट्रैक) और दूसरी में सड़क वाहनों के लिए दो लेन होंगे। लागत: इस परियोजना पर कुल ₹18,662.02 करोड़ खर्च होने का अनुमान है। कार्यान्वयन मॉडल: इसे इंजीनियरिंग-प्रोक्योरमेंट-कंस्ट्रक्शन (EPC) मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा। रणनीतिक महत्व: यह सुरंग न केवल असम बल्कि अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड जैसे राज्यों के लिए भी महत्वपूर्ण है। यह सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य साजो-सामान और कर्मियों की तेजी से तैनाती में मदद करेगी। यह परियोजना पीएम गति शक्ति (PM Gati Shakti) पहल का हिस्सा है और इससे उत्तर-पूर्व भारत में व्यापार, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे
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