भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वास्तव में हाल के वर्षों में अपनी स्वर्ण रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। मार्च 2023 से सितंबर 2025 के बीच, भारत ने बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) से लगभग 274 टन सोना सफलतापूर्वक वापस मंगा लिया है।
इस ऐतिहासिक कदम से जुड़ी मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:
हालिया स्थानांतरण: अकेले वित्त वर्ष 2025 की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर 2025) में ही RBI ने 64 टन सोना घरेलू तिजोरियों में स्थानांतरित किया है।
कुल घरेलू भंडार: इस बदलाव के बाद, सितंबर 2025 के अंत तक भारत के कुल 880.8 टन स्वर्ण भंडार में से 575.8 टन सोना अब भारत की धरती पर सुरक्षित रखा गया है। यह कुल भंडार का लगभग 65-66% है।
सुरक्षित स्थान: वापस लाया गया यह सोना मुख्य रूप से मुंबई (मिंट रोड) और नागपुर स्थित उच्च-सुरक्षा वाले वॉल्ट्स में रखा गया है।
वापस लाने के कारण:
भू-राजनीतिक जोखिम: रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों द्वारा विदेशी संपत्तियों को फ्रीज किए जाने की घटनाओं ने संप्रभु संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
लागत में बचत: बैंक ऑफ इंग्लैंड को दिए जाने वाले भारी स्टोरेज शुल्क और बीमा खर्चों को कम करना।
भंडारण विविधीकरण: लॉजिस्टिक दक्षता और जोखिम प्रबंधन के लिए भंडारण स्थानों में विविधता लाना।
यह 1991 के आर्थिक संकट के बाद भारत का सबसे बड़ा स्वर्ण स्थानांतरण है, जो वर्तमान में देश की मजबूत आर्थिक स्थिति और आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।
इस ऐतिहासिक कदम से जुड़ी मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:
हालिया स्थानांतरण: अकेले वित्त वर्ष 2025 की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर 2025) में ही RBI ने 64 टन सोना घरेलू तिजोरियों में स्थानांतरित किया है।
कुल घरेलू भंडार: इस बदलाव के बाद, सितंबर 2025 के अंत तक भारत के कुल 880.8 टन स्वर्ण भंडार में से 575.8 टन सोना अब भारत की धरती पर सुरक्षित रखा गया है। यह कुल भंडार का लगभग 65-66% है।
सुरक्षित स्थान: वापस लाया गया यह सोना मुख्य रूप से मुंबई (मिंट रोड) और नागपुर स्थित उच्च-सुरक्षा वाले वॉल्ट्स में रखा गया है।
वापस लाने के कारण:
भू-राजनीतिक जोखिम: रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों द्वारा विदेशी संपत्तियों को फ्रीज किए जाने की घटनाओं ने संप्रभु संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
लागत में बचत: बैंक ऑफ इंग्लैंड को दिए जाने वाले भारी स्टोरेज शुल्क और बीमा खर्चों को कम करना।
भंडारण विविधीकरण: लॉजिस्टिक दक्षता और जोखिम प्रबंधन के लिए भंडारण स्थानों में विविधता लाना।
यह 1991 के आर्थिक संकट के बाद भारत का सबसे बड़ा स्वर्ण स्थानांतरण है, जो वर्तमान में देश की मजबूत आर्थिक स्थिति और आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वास्तव में हाल के वर्षों में अपनी स्वर्ण रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। मार्च 2023 से सितंबर 2025 के बीच, भारत ने बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) से लगभग 274 टन सोना सफलतापूर्वक वापस मंगा लिया है।
इस ऐतिहासिक कदम से जुड़ी मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:
हालिया स्थानांतरण: अकेले वित्त वर्ष 2025 की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर 2025) में ही RBI ने 64 टन सोना घरेलू तिजोरियों में स्थानांतरित किया है।
कुल घरेलू भंडार: इस बदलाव के बाद, सितंबर 2025 के अंत तक भारत के कुल 880.8 टन स्वर्ण भंडार में से 575.8 टन सोना अब भारत की धरती पर सुरक्षित रखा गया है। यह कुल भंडार का लगभग 65-66% है।
सुरक्षित स्थान: वापस लाया गया यह सोना मुख्य रूप से मुंबई (मिंट रोड) और नागपुर स्थित उच्च-सुरक्षा वाले वॉल्ट्स में रखा गया है।
वापस लाने के कारण:
भू-राजनीतिक जोखिम: रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों द्वारा विदेशी संपत्तियों को फ्रीज किए जाने की घटनाओं ने संप्रभु संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
लागत में बचत: बैंक ऑफ इंग्लैंड को दिए जाने वाले भारी स्टोरेज शुल्क और बीमा खर्चों को कम करना।
भंडारण विविधीकरण: लॉजिस्टिक दक्षता और जोखिम प्रबंधन के लिए भंडारण स्थानों में विविधता लाना।
यह 1991 के आर्थिक संकट के बाद भारत का सबसे बड़ा स्वर्ण स्थानांतरण है, जो वर्तमान में देश की मजबूत आर्थिक स्थिति और आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।
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